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सपा में यूथ अध्यक्षों का होगा दुर्ग ध्वस्त

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। समाजवादी पार्टी की साइकिल अब गाजियाबाद में संगठन के लिहाज से ओवर होलिंग वाले स्टाइल में है। जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष बदल चुके है। ऐसे में अब यूथ संगठन पर भी बदलाव के आसार नजर आने लगे है। सपा के सूत्र बता रहे हैं कि यूथ संगठनों पर जमे हुए अध्यक्षों की कुर्सी पर भी अब नए चेहरे नजर आ सकते है। यूथ संगठन में फिलहाल संतोष यादव, मनोज पंडित, विक्रांत पंडित, प्रवेश बैसोया, प्रदीप शर्मा, ठाकुर विक्की सिंह पदाधिकारी है। कहा यह जा रहा है कि जिस दिन से जिलाध्यक्ष के रूप में पूर्व विधायक सुरेंद्र कुमार मुन्नी और महानगर अध्यक्ष के रूप में राहुल चौधरी की ताजपोशी हुई है, उसी दिन से यूथ अध्यक्षों के ताज पर खतरा मंडरा रहा है।
किस्सों में किस्सा वॉर्ड 50 का भी चल रहा है। इस वॉर्ड के टिकट को लेकर यूथ अध्यक्षों में पूर्व विधायक के खिलाफ मोर्चा खोला था और मामला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव तक गया था। वही राहुल चौधरी महानगर अध्यक्ष बनने के बाद कह चुके हैं कि एक कार में चार अध्यक्ष बैठकर नहीं चलेंगे। यह निशाना किसी और पर नहीं बल्कि युवा अध्यक्षों पर ही है। इसके अलावा जब सपा ने महानगर और जिलाध्यक्ष का अभिनंदन किया तो मंच पर संतोष यादव के अलावा अन्य किसी अध्यक्ष को बुलाया ही नहीं गया। बताया जा रहा है कि यूथ अध्यक्षों का दुर्ग ध्वस्त होने वाला है। इसके पीछे एक बड़ा कारण यह भी बताया जा रहा है कि जितने भी यूथ अध्यक्ष है, वह सभी उस समय यूथ अध्यक्ष बने थे जब संजय यादव महानगर अध्यक्ष थे और उन्हीं के आर्शीवाद से वर्तमान यूथ अध्यक्षों को पद मिला था। सूत्र बता रहे हैं कि इस मामले में यूथ अध्यक्षों की पैरवी चलने वाली नहीं है। क्योंकि पूर्व विधायक सुरेंद्र कुमार मुन्नी और राहुल चौधरी को संगठन की बागडोर ही इसलिए सौंपी गई है कि संगठन में अब आमूलचूल परिवर्तन चाहिए। जहां तक यूथ अध्यक्षों की हाईकमान में ताकत का मामला है तो पहले ही वॉर्ड 50 के टिकट को लेकर इसका मुलाहिजा हो चुका है। एक आॅडियो वायरल के मामले में निष्कासन हो चुका है। अध्यक्षों के मामले में यूथ की राय को राष्ट्रीय अध्यक्ष ने ही इग्नोर कर दिया था। हालांकि यूथ अध्यक्ष भी सपा के प्रति पूरी तरह समर्पित है और मुद्दों पर व्यक्तिगत राय अलग हो सकती है लेकिन समाजवादी क्रांति में यूथ भी साथ रहे है। बात जब खेमा चुनने की आई थी तो इसी यूथ टोले ने एक झटके में इस्तीफे दे दिए थे। यूथ अध्यक्षों के सामने अब अपनी ताकत दिखाने का लिटमस टेस्ट मौका आ रहा है। पार्टी इस महीने के अंत में एक प्रदर्शन करने जा रही है। उस प्रदर्शन में यूथ अध्यक्षों को अपनी भीड़ और क्षमता दोनों ही दिखाने का मौका मिलेगा।
पांच हजार साइकिल का रिकॉर्ड है राहुल के नाम
राहुल चौधरी महानगर अध्यक्ष बने है। बड़ी बात यह है कि वह उन समाजवादियों में है, जो सपा की राजनीति के प्लेवे स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक के छात्र है। उनकी राजनीति सपा में बहुत पुरानी है। युवजन सभा के महानगर अध्यक्ष से लेकर मेन संगठन में पदाधिकारी रहे है। हर फार्मेट में खुद को साबित किया है। उनकी क्षमता की बात चलती है तो सपा के बड़े नेता 2 अक्टूबर वर्ष 2011 का दिन नहीं भूलते। यह वह दिन है जब गाजियाबाद में पहली बार समाजवादियों ने पांच हजार साइकिल चलाई थी। राहुल चौधरी और राशिद मलिक इस कार्यक्रम में अखिलेश यादव को बुलाने के लिए गए थे। तब अखिलेश यादव को भी कार्यक्रम की इतनी बड़ी सफलता का अनुमान नहीं था। उन्होंने कहा था कि यदि तुम पांच सौ साइकिल भी चलाओगे तो मैं हरी झंडी दिखाने के लिए आऊंगा। तब राहुल चौधरी ने कहा था कि हम पांच सौ नहीं पांच हजार साइकिल चलाकर दिखाएंगे। बताया जाता है कि जब पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी के साथ अखिलेश यादव कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो वह भीड़ देखकर गदगद हो गए थे और उन्होंने राहुल चौधरी की पीठ थपथपाई थी। वह गए तो थे साइकिल रैली को हरी झंडी दिखाने के लिए लेकिन जब पांच हजार साइकिल सवार समाजवादियों का काफिला देखा तो फिर उन्होंने लोहिया पार्क तक खुद साइकिल चलाई थी। बाद में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कई सभाओं में इस साइकिल रैली का जिक्र किया था। राहुल चौधरी युवा और शिक्षित नेता है, बेहतर वक्ता है और समाजवादी मुद्दों पर बेहद तर्कपूर्ण शैली में अपनी बात रखते हैं।

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