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अरुणाचल प्रदेश

मोदीनगर तहसील में कामकाज ठप, रजिस्ट्री कार्यालय रहेगा बंद

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सोमवार को थाना कविनगर के बाहर वकीलों ने सामूहिक गिरफ्तारी देने के लिए विरोध प्रदर्शन किया। यह घटना दोपहर के समय घटित हुई, जब कई अधिवक्ता हापुड़ रोड से पैदल होते हुए कविनगर थाने पहुंचे। जैसे ही वे थाने के पास पहुंचे, पुलिस ने उन्हें थाने के अंदर जाने से रोक लिया और वहां बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया। इससे आक्रोशित वकील सड़क पर ही बैठ गए और जिला जज के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। वकील अपनी गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे, जबकि पुलिस ने उन्हें बताया कि जब तक जांच जारी है, तब तक कोई भी आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी।

इस विरोध के दौरान, बार एसोसिएशन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए न्यायालयों में वकीलों के कामकाज पर रोक लगाने का आदेश जारी किया। एसोसिएशन ने यह चेतावनी भी दी कि जो भी अधिवक्ता इस आदेश का उल्लंघन करेंगे, उनकी सदस्यता पांच साल के लिए निलंबित कर दी जाएगी। इस आदेश ने वकीलों के बीच असंतोष को और बढ़ा दिया, और पूरे जनपद में इसकी चर्चा होने लगी।

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पुलिस द्वारा दिखाए गए शांतिपूर्ण रवैये की चर्चा भी इस दिन के प्रमुख घटनाक्रमों में रही। जब वकील थाने के बाहर धरने पर बैठे थे, तब पुलिसकर्मियों ने उन्हें पानी की बोतलें मुहैया कराईं। हालांकि, कुछ वकीलों ने इस gesture का विरोध किया और पानी पीने से मना कर दिया, लेकिन अधिकांश ने इसे स्वागत की दृष्टि से देखा। यह दृश्य दर्शाता है कि तनावपूर्ण माहौल के बावजूद पुलिस और वकील एक-दूसरे के साथ सहयोगात्मक संबंध रखने की कोशिश कर रहे थे।

सोमवार को न्यायालयों में भी कामकाज जारी रहा, हालांकि यह विरोध प्रदर्शन पूरी तरह से सुर्खियों में था। जनपद न्यायालय में कुल 53 में से 31 कोर्ट में कामकाज हुआ, जिसमें 25 जमानत प्रार्थना पत्रों का निस्तारण किया गया। जिला जज अनिल कुमार की कोर्ट में दो जमानत प्रार्थना पत्रों का निराकरण किया गया और साक्ष्य के लिए समन जारी किए गए। इसी तरह, एडीजे कोर्ट नंबर-2 में चार्ज फ्रेम किए गए और सीजेएम जसवीर सिंह यादव की कोर्ट में 24 अंतिम रिपोर्टों का निराकरण किया गया। इस दिन की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि न्यायिक प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही थी, भले ही बाहर का माहौल तनावपूर्ण था।

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गाजियाबाद कोर्ट ने गुनाह कबूल करने पर एक अनोखी सजा सुनाई, आरोपी ने कहा- “मेहनत करके बच्चों को पालूंगा।”

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गाजियाबाद कोर्ट ने गुनाह कबूल करने पर एक अनोखी सजा सुनाई, आरोपी ने कहा- "मेहनत करके बच्चों को पालूंगा।"

गाजियाबाद कोर्ट ने गुनाह कबूलने पर सुनाई अनोखी सजा, आरोपी ने कहा- “मेहनत करके बच्चों को पालूंगा”

गाजियाबाद में एक दिलचस्प मामला सामने आया है, जहां एक आरोपी ने अपने गुनाह को कोर्ट में कबूल किया और इसके बाद उसे एक अनोखी सजा सुनाई गई। यह सजा उस व्यक्ति की जिम्मेदारी और समाज में उसके पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए दी गई। कोर्ट ने आरोपी को अपने बच्चों को पालने और अपनी जीवनशैली को सुधारने के लिए सजा के तौर पर मेहनत करने का आदेश दिया।

यह मामला एक ऐसे व्यक्ति का था, जिसने अपराध स्वीकार करते हुए कोर्ट से दया की उम्मीद की थी। इस व्यक्ति ने कहा कि वह भविष्य में अपने किए गए गुनाहों का पछतावा करता है और चाहता है कि उसे समाज में एक नया मौका मिले। गाजियाबाद के अदालत में सुनवाई के दौरान, आरोपी ने अपनी स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वह अपने बच्चों की जिम्मेदारी उठाना चाहता है और उन्हें एक अच्छे जीवन की दिशा दिखाना चाहता है।

कोर्ट ने आरोपी की दलील को सुनने के बाद उसे कोई पारंपरिक सजा जैसे जेल भेजने के बजाय एक सख्त परंतु रचनात्मक सजा दी। कोर्ट ने उसे कहा कि वह अपनी मेहनत से बच्चों की देखभाल करेगा और अपने जीवन को ठीक करने के लिए कड़ी मेहनत करेगा। आरोपी ने इस आदेश को स्वीकार करते हुए कहा, “मैं मेहनत करके अपने बच्चों को पालूंगा और उनकी जिंदगी को बेहतर बनाने की कोशिश करूंगा।”

इस फैसले ने एक नई बहस को जन्म दिया है कि क्या सजा केवल दंडित करने के लिए दी जानी चाहिए या व्यक्ति के सुधार और समाज में पुनर्निवेश करने के लिए भी कुछ कदम उठाए जा सकते हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सजा से समाज में सुधार संभव है, जबकि अन्य का कहना है कि अपराधियों को सख्त सजा देना जरूरी है ताकि समाज में अनुशासन बना रहे।

यह मामला गाजियाबाद की अदालत में एक नई पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें अपराधी को सजा के साथ-साथ उसे सुधारने का भी एक मौका दिया गया।

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गाजियाबाद में साइबर अपराध: अधिकारी को शेयर ट्रेडिंग के मुनाफे का झांसा देकर 24 लाख की ठगी की।

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गाजियाबाद में साइबर अपराध: अधिकारी को शेयर ट्रेडिंग के मुनाफे का झांसा देकर 24 लाख की ठगी की।

गाजियाबाद में साइबर अपराध: अधिकारी को शेयर ट्रेडिंग के मुनाफे का झांसा देकर 24 लाख की ठगी

गाजियाबाद में साइबर अपराधियों ने एक निजी कंपनी के अधिकारी को शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच देकर 24 लाख रुपये की ठगी कर ली। यह घटना गाजियाबाद के एक प्रमुख इलाके में हुई, जहां ठगों ने अधिकारी को फोन और ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से संपर्क किया।

शेयर ट्रेडिंग के जरिए बड़े मुनाफे का वादा करने वाले साइबर अपराधियों ने अपने जाल में फंसा लिया। अधिकारी को एक कथित निवेश कंपनी से संपर्क किया गया, जो बड़े मुनाफे का दावा करती थी। अपराधियों ने पहले उन्हें छोटे मुनाफे का झांसा दिया, फिर धीरे-धीरे उनकी निवेश राशि बढ़ाते गए। इसके बाद उन्होंने और भी अधिक निवेश की मांग की और अधिकारी को विश्वास दिलाया कि अगर वह ज्यादा निवेश करेंगे तो उन्हें और बड़ा लाभ होगा।

अधिकारी ने अपराधियों की बातों पर भरोसा कर करीब 24 लाख रुपये का निवेश कर दिया। इसके बाद, जब अधिकारी को मुनाफा नहीं मिला और उसे एहसास हुआ कि वह धोखा खा चुके हैं, तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने साइबर क्राइम का मामला दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है। इस मामले ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया कि साइबर अपराधी न केवल आम लोगों को, बल्कि पेशेवरों को भी अपना शिकार बना सकते हैं। पुलिस ने लोगों को सावधानी बरतने और ऑनलाइन निवेश से पहले पूरी जानकारी लेने की सलाह दी है।

यह घटना इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि साइबर अपराधियों से बचने के लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

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लो कर लो बात: गाजियाबाद में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथ भी साइबर ठगी हो गई। शेयर ट्रेडिंग के नाम पर उनसे 77 लाख रुपये की ठगी की गई।

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लो कर लो बात: गाजियाबाद में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथ भी साइबर ठगी हो गई। शेयर ट्रेडिंग के नाम पर उनसे 77 लाख रुपये की ठगी की गई।

गाजियाबाद: शेयर ट्रेडिंग के नाम पर सीए से 77 लाख की ठगी

गाजियाबाद में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) साइबर ठगों का शिकार हो गए। ठगों ने शेयर ट्रेडिंग में बड़ा लाभ दिलाने का लालच देकर उनसे 77 लाख रुपये ठग लिए। यह मामला साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं और ठगों की नई-नई तरकीबों की ओर इशारा करता है।

पीड़ित सीए, जो वित्तीय मामलों के जानकार माने जाते हैं, को ठगों ने एक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से निशाना बनाया। उन्होंने पीड़ित से संपर्क कर शेयर बाजार में बड़े मुनाफे का झांसा दिया। ठगों ने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर पहले छोटे-छोटे लाभ दिखाए, जिससे पीड़ित का विश्वास बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने पीड़ित से बड़े निवेश की मांग की और 77 लाख रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली।

जब पीड़ित ने निवेश की गई राशि और वादे के अनुसार लाभ की जानकारी मांगी, तो ठगों ने जवाब देना बंद कर दिया। उनके द्वारा दिए गए सभी संपर्क नंबर और ईमेल एड्रेस बंद हो गए। तब जाकर पीड़ित को एहसास हुआ कि वे ठगी के शिकार हो चुके हैं।

घटना की शिकायत तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर साइबर सेल को जांच के लिए कहा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ठगों ने फर्जी वेबसाइट और नकली प्रमाणपत्रों का उपयोग किया था।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी इस तरह के मामलों में पहले छोटे लाभ का लालच देकर लोगों का विश्वास जीतते हैं और फिर उन्हें बड़े निवेश के लिए फंसाते हैं।

इस घटना के बाद अधिकारियों ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। किसी भी अनजान ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, फोन कॉल, या ईमेल से मिलने वाले निवेश प्रस्तावों पर भरोसा न करें। साथ ही, किसी भी प्रकार की बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचें।

यह घटना न केवल आम जनता बल्कि विशेषज्ञ पेशेवरों को भी ठगों की धोखाधड़ी के खिलाफ सतर्क रहने की चेतावनी देती है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।

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