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महिलाओं को मंदिर से दूर नहीं रख सकते – जस्टिस दीपक मिश्रा

नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत के प्रधान न्यायाधीश के पद से हाल ही में सेवानिवृत्त जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा है कि लैंगिक समानता के लिए महिलाओं को मंदिर में प्रवेश से नहीं रोका जा सकता। उन्होंने कहा- ‘किसी विशेष धर्म में आप महिलाओं को मंदिर से बाहर नहीं रख सकते। महिलाओं का सम्मान करना जरूरी है। जीवन में महिलाएं समान पार्टनर होती हैं।’
उन्होंने 16वीं हिंदुस्तान लीडरशिप समिट में कहा- ‘मैं यहां मौजूद सभी लोगों से आग्रह करता हूं कि असुरक्षित आशावादी बनें। आपकी उम्मीद की भावना दृंढ़ होनी चाहिए। आपकी उम्मीद वास्तविकता के साथ जुड़ी होनी चाहिए और उसी वजह से कोर्ट इन उम्मीदों को महसूस करने के लिए प्रयास करती है।’
दीपक मिश्रा ने आगे कहा- ‘भारत के निवासी होने के कारण किसी को ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए कि संविधान उनके लिए एक अज्ञात व्यक्ति की तरह है या फिर वह इस संविधान का हिस्सा नहीं है। राज्य की हर शाखा द्वारा संवैधानिक व्यवहार को समझना जरूरी है चाहे वह वैधानिक हो, कार्यकारी हो या फिर न्यायिक हो। आप क्रिमिनलों को संचालित करने की अनुमति नहीं दे सकते हैं।
दीपक मिश्रा ने कहा- इतिहास में चाणक्य को निष्ठुर व्यक्ति बताया गया है लेकिन मैं ऐसा नहीं सोचता। मेरा मानना है कि वह राजा चंद्रगुप्त मोर्य के एक उचित सलाहकार थे। हमारे पास एक मजबूत स्वतंत्र न्यायपालिका है और कानून के शासन द्वारा शासित है।

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