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जनपद गाजियाबाद में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में फिसड्डी हैं महिलाएं

वेदांश वशिष्ठ (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। महिलाओं के समान अधिकारों की बातें यूं तो रोजाना सामाजिक मंचों से की जाती हैं, और शासकीय स्तर पर भी महिलाओं को समान अधिकार देने का ताना बाना भी बुना जा रहा है, लेकिन जिला सम्भागीय परिवहन विभागीय की लाइसेंस प्रणाली पर गौर की जाये तो यहां पर पुरूषों के अपेक्षाकृत महिलाएं बेहद कम संख्या में लाइसेंस के लिए आवेदन कर रही हैं। जनपद गाजियाबाद ही नहीं बल्कि जनपद से सटे जनपद गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर में भी पुरूष ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में अग्रणी हैं और महिलाएं बेहद पीछे हैं। बता दें कि जनपद गाजियाबाद की सड़कों पर यूं तो दो पहिया वाहन व कार आदि चलाती महिलाएं आमतौर पर देखी जाती हैं। स्कूलों में भी लड़कियां बड़ी संख्या में वाहनों का इस्तेमाल करती हैं। इसके अलावा जनपद गाजियाबाद में व्यवसायिक ट्रांसपोर्टेशन में महिलाएं लगी भी हुई हैं, लेकिन जिला संभागीय परिवहन विभाग के मई और जून माह के आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाये तो यहां पर ड्राइविंग लाइसेंस के लिए कम संख्या में महिलाओं ने अपने लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। पिछले दो माह के आंकड़ों के मुताबिक जनपद गाजियाबाद में 6467 पुरूषों ने जहां ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया है वहीं 752 महिलाओं ने लाइसेंस के लिए जिला संभागीय परिवहन विभाग में आवेदन किया है। गौतमबुद्धनगर में 2650 पुरूष और 580 महिलाओं ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। हापुड़ जनपद की स्थिति तो ओर भी बत्तर है जहां 4295 पुरूषों और सिर्फ 20 महिलाओं ने ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अपना आवेदन विभाग में दिया है और विभाग की ओर से लाइसेंस जारी किए गए हैं।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है जनपद गाजियाबाद समेत सीमा से सटे जनपदों में महिलाएं लाइसेंस बनवाने की ओर ज्यादा गंभीर नहीं है और यहां की सड़कों पर महिलाएं वाहनों को खूब तेज रफ्तार से दौड़ा भी रही हैं। विभाग को इस ओर गंभीरता से कदम उठाने चाहिए ताकि जो महिलाएं लाइसेंस की प्रणाली से बाहर हैं उन्हें उक्त नियमावली के भीतर लाया जा सके।

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