क्यों कह रहे थे मानसिंह तीन कुर्सियों को खाली रखने के लिए

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। कई बार कम्युनिकेशन गैप दो लोगों के बीच में बड़े गैप ले आता है। मंशा सबकी ठीक होती है लेकिन संवाद में अंतर के चलते विवाद बढ़ जाते हैं। संवादों के इसी गैप का असर इस वक्त स्थानीय सांसद एवं केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह और भाजपा महानगर अध्यक्ष मानसिंह गोस्वामी के बीच खूब सुर्खियां बटोर रहा है। सूत्र बताते हैं कि वाल्मीकि पार्क में आयोजित अंबेडकर जयंती के कार्यक्रम के अवसर पर भाजपा अध्यक्ष लगातार मंच की तीन कुर्सियों को खाली छोड़ने के लिए कह रहे थे। इसके पीछे मानसिंह गोस्वामी की मंशा स्पष्ट थी। वह कार्यकर्ताओं को या मंच पर आने वाले लोगों को बताना चाह रहे थे कि इन तीन कुर्सियों पर तीन प्रमुख चेहरों को आना है। हुआ भी कुछ ऐसा ही एक कुर्सी पर राज्यमंत्री अतुल गर्ग विराजमान हुए। दूसरी कुर्सी पर दोपहर सवा बारह बजे प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह आकर बैठे लेकिन तीसरी कुर्सी जिस पर जनरल को आकर बैठना था, वह खाली रह गई। वजह इसके पीछे वह कम्युनिकेशन गैप रहा जिसे इसका सबसे बड़ा जिम्मेदार माना जा रहा है।
सवाल यह उठ रहे हैं कि मानसिंह गोस्वामी संगठन के अध्यक्ष हैं, वह भला क्यों अपने कार्यक्रम में जनरल वीके सिंह को नहीं बुलाएंगे। कहीं न कहीं किसी से चूक हुई है। जिस व्यक्ति को निमंत्रण की जिम्मेदारी दी गई थी वो ही कहीं पर चूक कर बैठा नहीं तो गाजियाबाद आने के लिए जनरल वीके सिंह का जो सरकारी कार्यक्रम जारी हुआ था, उसमें भला वाल्मीकि पार्क का जिक्र कैसे छूट सकता था। जो भी हो सिस्टम में त्रुटि किसी न किसी वजह से हो जाती है। सिस्टम मशीन से नहीं इंसानों से चलता है। अगर बात कम्युनिकेशन गैप और बिना किसी दुर्भावना पर आधारित है तो उसे ठीक किया जा सकता है। नहीं तो कहने वालों ने कहना शुरू कर दिया है कि संगठन सोची-समझी रणनीति के तहत अपने सांसद का साथ नहीं दे रहा है।