पीएम क्यों खामोश

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रेडियों स्टेशन पर दिल खोलकर मन की बात कहने वाले बड़ी बड़ी रैलियों को बुलंद आवाज से संबोधित करने वाले विदेशों में जाकर भारत की उपलब्धियों का डंका पीटने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खामोश हो गये हैं। (opinion in ghaziabad) उनकी खामोशी उस जनता के लिए बड़ा सवाल है, जिससे हमारे पीएम ने गुड गर्वनेंस का वादा किया था। जीरो टालरेंस वाली नीति मोदी सरकार की चार मंत्रियों के विवाद में आने पर शून्य हो गई है। अब तो सरकार के धारदार प्रवक्ता भी मीड़िया के सामने आकर अपने विवादित मंत्रियों के पक्ष में बयान देते नजर आ रहे हैं। शायद वह जानते हैं कि उनके पीएम की खामोशी यही सब बताना चाहती है।

आज भाजपा सरकार चौतरफा सवालों के घेरे मे है। ये सवाल एक ऐसे सक्श को लेकर हैं, जिस पर वित्तीय अनियमित्ताओं के बहुत बड़े आरोप हैं। इस शख्स को रेड कार्नर नोटिस भी जारी हो गया है। ललित मोदी नाम के इस व्यक्ति की क्यों सुषमा स्वराज ने मद्द की क्यों राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इसके डाक्यूमेंट पर साइन किये, इन सवालों के जबाव देने से भाजपा बच रही है। विपक्ष और जनता ये जानना चाहती है कि आखिर नरेंद्र मोदी अपने नुमार्इंदों को बचाने के लिए क्यों खामोशी धारण किये हुए हैं। क्यों ये स्पष्ट नहीं किया जा रहा है कि देश की शिक्षा मंत्री स्मृति इरानी की डिग्री असली है या फिर फर्जी। पंकजा मुंडे के 2 सौ करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले पर भाजपा शांत बैठी हुई है। यह वह सवाल है जिसे जनता जानना चाहती है।

जनता जानना चाहती है कि चुनावी रैलियों में भ्रष्टाचार के खिलाफ तीखे बोल बोलने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्यों खामोश हैं। जब तक इन सवालों का जबाव नहीं मिलेगा तब तक भाजपा खुद को क्लीन चिट नहीं दे पायेगी। तस्वीर साफ होने के बावजूद क्यों विवादित मंत्रियों पर मोदी कार्यवाही करने से बच रहे हैं। ये सवाल भाजपा के लिए बहुत पेचिदा बन गया है। भाजपा के इन मंत्रियों की स्थिति उस गर्म पदार्थ की तरह हो गई है, जो ना निगलने में आ रहे हैं और ना ही उगलने में। सरकार इनके आरोपों को सच मानकर कार्यवाही करती है, तो साख पर बट्टा लगना तय है, नहीं करती है तो विपक्ष के हमले लगातार जारी रहने की उम्मीद बनी रहेगी। लेकिन अपने कुछ लोगों को बचाने के लिए सरकार जनता के साथ खिलवाड़ करे ये कहीं से नैतिक नहीं है। और किसी ने ठीक भी कहा है कि जिनके घर शीशे के होते हैं, वह दूसरों पर पत्थर नहीं मारा करते।
ऐसे में पीएम नरेंद्र मोदी को इन सवालों का जबाव देने के लिए अपने मौन योग को तोड़ना होगा, क्योंकि जनता अगर हट योग पर आ गई, तो मन की बात कहने का ज्यादा मौका नहीं मिलेगा। धन्यवाद। मनोज कुमार