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ग़ाजियाबाद दिल्ली एन.सी.आर

क्यों रख लिया साहिबाबाद विधायक ने दिल पर स्टोन

विधानसभा में कार्यक्रम और सीन ऐसा कि तुम हो कौन

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)
गाजियाबाद। राजनीति में क्षेत्र का जनप्रतिनिधि होने के बाद नियम तो यही है कि वहां पर होने वाले राजनीतिक कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि की मौजूदगी जरूर होनी चाहिए। यदि सरकार जनप्रतिनिधि के दल की है तो फिर उन्हें इग्नोर नही किया जा सकता। मगर सबसे बड़ी विधानसभा में जब विधायक को इग्नोर किया गया तो फिर सवाल उठने ही थे। किस्सा विकास वाले पत्थर से जुड़ा है और बताया ये जा रहा है कि विधायक ने अब इस पत्थर वाले एपिसोड के बाद कुछ ना कहते हुए दिल पर पत्थर रख लिया है। कुछ दिन पहले साहिबाबाद में वार्ड 78 में एक कार्यक्रम हुआ था। कार्यक्रम में भाजपा के महामंत्री पप्पू पहलवान का नाम बोर्ड पर है। 12 सितम्बर को हुए इस कार्यक्रम में उनकी पत्नी और वार्ड की पार्षद ओमवती का नाम है। लोकसभा सांसद जनरल वीके सिंह ने जिस ब्लैक स्टोन का फीता काटा उस पर मेयर आशा शर्मा अध्यक्ष हैं तो जनरल वीके सिंह चीफ गेस्ट हैं। इन्टरलॉकिंग टाईल्स से लेकर सड़क निर्माण तक हुए कार्यों के इस पत्थर पर नगर आयुक्त महेन्द्र सिंह तंवर का नाम है और मुख्य अभियंता मोईनुद्दीन का भी नाम है। अब जब इस पत्थर पर विधायक सुनील शर्मा का नाम नही है तो चर्चा स्वभाविक थी। हालांकि बताया ये जाता है कि यह सभी कार्य पार्षद निधि और मेयर निधि से हुए हैं। बहरहाल किस्सा पूरी विधानसभा में गूंज रहा है और कहा यही जा रहा है कि विधायक ने अपनी अनदेखी से नाराज होकर दिल पर पत्थर रख लिया है और साहिबाबाद में होर्डिंग और पत्थर की पॉलिटिक्स चल रही है।

बिग विधानसभा के विधायक का स्मॉल फोटो

इस मामले में क्या पॉलिटिक्स है यह नही पता लेकिन बताया ये जाता है कि पहले हुए किसी कार्यक्रम से संजीव शर्मा का नाम गायब था और अब बैनर से सुनील शर्मा का नाम गायब है। जब करंट क्राइम ने जानकारी की तो बिग विधानसभा में स्मॉल फोटो का किस्सा सामने आ गया। बताया गया कि होर्डिंग पर सबसे ऊपर जो स्मॉल फोटो लगे हैं उनमें विधायक सुनील शर्मा का फोटो भी है। लेकिन यह फोटो भी टैंट की ओट में दब गया। फोटो स्मॉल लगा और पत्थर से नाम ही गायब हो गया। अधिकारियों का नाम आ गया, सांसद का नाम आ गया, मेयर आ गर्इं मगर विधायक सीन से आउट हो गये।

नही मिला इन्वीटेशन और स्टोन पर नाम की नही है टेंशन

करंट क्राइम ने जब साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा से बात की और पूछा कि आप कार्यक्रम में नही गये तो उन्होंने कहा कि मुझे इस कार्यक्रम का कोई इन्वीटेशन नही मिला था। पत्थर पर नाम ना होने को लेकर विधायक सुनील शर्मा ने कहा कि मुझे इस बात की कोई टेंशन नही है। पत्थर पर नाम ना होने से मेरी राजनीति पर कोई फर्क नही पड़ता। मुझे आगे भी कोई दिक्कत नही है लेकिन यहां सरकार के शासनादेश का पालन होना चाहिए। उन्होंने बताया कि यह शासनादेश है कि जिस भी विकास कार्य में राज्य सरकार का पैसा खर्च हो रहा है उस शिलापट पर वहां के विधायक का नाम जरूर लिखा जाना है। यहां भी लगभग 1.5 करोड़ रूपये का काम हुआ है। विधायक ने फिर दोहराया कि मैं पत्थर पर नाम ना होने से नाराज नही हूं लेकिन यह सिर्फ जानकारी के लिए बता रहा हूं।

सरकारी अस्पताल को लेकर भी कर चुके हैं निहाल

साहिबाबाद के विधायक सुनील शर्मा हैं। लेकिन ऐसा क्या है कि यहां पार्षद से लेकर महानगर अध्यक्ष तक अपने विधायक को किसी भी चीज में साथ नही लेते। जब सरकारी अस्पताल की मांग उठी तो महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा ने सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। पार्षद नीलम भारद्वाज पैदल चलकर महानगर कार्यालय आर्इं और उन्होंने अपना ज्ञापन ही जीडीए बोर्ड सदस्यों को दिया। ज्ञापन सरकारी अस्पताल की मांग को लेकर था। क्षेत्रीय कार्यालय प्रभारी योगेश त्रिपाठी जब जमीन तलाशने वसुंधरा आये तो अधिकारी साथ में रहे लेकिन विधायक यहां भी नही थे। राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल ने जब कैलाश मानसरोवर भवन को अस्पताल में बदलने का सुझाव दिया तो यहां भी विधायक सीन से आउट थे और पत्र सीधे सीएम को लिखा गया। अब जब पत्थर वाला मामला आया है तो यहां भी विधायक को स्थान नही मिला है। अब चर्चा भाजपा में है कि कुछ तो जरूर है और ऐसे ही तो विधायक से नही ये गिला है।

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