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क्यों उठ रही है भाजपा में आवाज कि वो नहीं हैं दर्जा प्राप्त मंत्री

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। राजनीति में कई बार वरिष्ठ नेताओं को पूरी उम्र बीत जाने के बाद कुछ मिलता है। इसे एक तरह से लाईफ टाईम एचिवमेंट अवार्ड भी कह सकते हैं। लेकिन पूरी जिन्दगी सेवा करने के बाद जब कुछ मिलता है तो सियासत में अपने लोग ही उस पर अंगुलियां उठाते हैं। जिन्हें नहीं मिला वो चर्चा उठाते हैं कि यदि मुझे नहीं मिला तो उसे क्यों मिला। फिर जिसे मिला उसके बारे में ये जिज्ञासा हो जाती है कि उसे क्या मिला है। अब देने वाले ने दे दिया और लेने वाले को कोई गिला नहीं है मगर जिन्हें मिला नहीं है उन्हें तो सवाल उठाने हैं। लिहाजा गाजियाबाद में भी ये सवाल उठ जाते हैं कि जो कुछ मिला है क्या उसमें वेतन भी मिल रहा है। फिर पूछ ही लेते हैं कि क्या गनर भी मिला है।

यह भी जानकारी जुटा लेते हैं कि क्या सरकारी गाड़ी भी मिली है। इस बात की भी तहकीकात होती है कि सरकारी दफ्तर भी मिला है या नहीं। लेकिन भगवा गढ़ में तो चर्चा बहुत तेजी से इस बात को लेकर है कि जो मिला सो मिला लेकिन वो दर्जा प्राप्त मंत्री तो कहीं से कहीं तक नहीं है।  चर्चा तेजी से घूम रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें पार्टी ने उन्हें किसी संवैधानिक पद पर नवाजा है। अब ये नेता हाल ही में एक अधिकारी से मिले। इस दौरान उनके साथ भाजपा वाले भी थे। साथ वालों ने अधिकारी से परिचय कराते हुए जोरशोर से बताया कि यह दर्जा प्राप्त मंत्री हैं। अब अधिकारी से बेहतर सरकार को कौन जानता है। उन्होंने यहां पर परिचय कराने वालों को करेक्ट किया और बताया कि ये जिस सिस्टम में  हैं मैं उसे जानता हूं लेकिन यह भी कन्फर्म हूं कि उस सिस्टम में दर्जा प्राप्त मंत्री जैसा पद नहीं होता। इसलिए यह दर्जा प्राप्त मंत्री नही हैं। अब अधिकारी ने तो करेक्ट कर दिया लेकिन नेता जी के समर्थक उनके नाम के आगे दर्जा प्राप्त मंत्री लगाने के लिए उत्सुक रहते हैं। अब यहां पर भाजपा से ही आवाज आई कि जब अधिकारी ने करेक्ट कर दिया और सारे वरिष्ठों को ये बात पता है तो कम से कम वो खुद ही आकर अपने समर्थकों को ये क्यों नहीं कह देते हैं कि वह दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री नहीं हैं। अब बताने वाले तो ये तक बताने पर आ गये हैं कि सरकारी वाली कृपा उन पर बरसी कहां से है। बताने वाले ने कहा कि जनरली जब वो साहब के चुनाव में जिम्मेदारी लेकर जुटे थे तो उनकी सेवाओं से साहब खुश हो गये थे और वह साहब के मन में बस गये थे। इसके बाद उनकी ताजपोशी की अहम भूमिका है। लेकिन जो भी हो वह प्रोटोकॉल वाले पद पर तो हैं मगर दर्जा प्राप्त मंत्री नहीं हैं। इस बात को सरकारी गलियारों में अफसर से लेकर अफसर का संतरी तक जानता है।

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