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आखिर क्यों परेशान है इंडिपेंडेट स्कूलस फेडरेशन आफ इंडिया-दीपा त्यागी

गाजियाबाद। पूर्व जिला पंचायत सदस्य डाक्टर दीपा त्यागी ने कहा है कि शासन से प्राप्त आदेश ने अनुसार पेरेंट्स तिमाही फीस के बजाए मासिक फीस जमा करें तथा उसी आदेश के अनुसार ही स्कूलो को भी आदेशित किया गया है। कि यदि कोई अभिभावक फीस जमा न करा सके तो किसी भी बच्चे की आॅन लाईन क्लास न रोकी जाए,किसी भी बच्चे का स्कूल से नाम न काटा जाए हकीकत ये है कि लॉक डाउन के कारण व्यापार ठप्प होने की वजह से आर्थिक रूप से तंगहाली झेल रहे अभिभावक फीस जमा नही करा पा रहे है। चूंकि उनकी आर्थिक स्थिति फीस जमा करने की नही है इस लिए शासन से फीस माफी की अपील कर रहे है। जोकि उनका लोकतांत्रिक अधिकार भी है। कुछ लोग राजनैतिक रोटियां सेक रहे है।उनका ये ब्यान खुद राजनीति से प्रेरित है। फैडरेशन खुद इस मुद्दे को एक ही दिन में समाप्त कर सकती है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक,शिक्षक व स्कूल का अन्य स्टाफ सभी एक परिवार के सदस्य के बराबर है। परिवार के मुखिया होने के नाते इन सभी की जिम्मेदारी स्कूल संचालकों की बनती है। लेकिन अपने निजी स्वार्थ के चलते स्कूल संचालक अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी से निर्वहन नही कर रहे है।बल्कि लगतार फीस मांग कर फीस जमा न होने की स्थिति में स्कूल स्टाफ के वेतन जारी न करके अभिभावकों की छवि खलनायकों जैसी बना रहे है। सभी स्कूलो के पास रिजर्व फंड है। जिसका उपयोग कर उन्हें स्कूल स्टाफ का वेतन जारी करना चाहिए तथा स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए लॉक डाउन अवधि की फीस माफी का निर्णय लेना चाहिए।

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