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अखिलेश यादव ने किसे बता दिया अनमैच्योर नेता

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। पंडारा रोड के किस्से और समाजवादियो का पुराना नाता है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जब पंडारा रोड आते हैं तो गाजियाबाद वाले सपाई बुलाने का इतंजार नही करते। निमंत्रण की सोच को एक तरफ रखकर सिर्फ सूचना मिलने पर ही पहुंच जाते हैं। जब दिल्ली में पंडारा रोड पर अखिलेश यादव आये तो हमेशा की तरह सपा टोला वहीं मौजूद था। मौका मिला तो सपाईयो ने परिवर्तन की मांग रख दी। मगर राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी एक के बाद एक सभी प्रस्तावित नाम रिजेक्ट कर दिये। एक पूर्व अध्यक्ष को कह दिया कि वो बेकार है उसकी बात मत करो। सूत्र बताते हैं कि पंडारा रोड पर एक पूर्व अध्यक्ष और भी मौजूद थे। अध्यक्ष के लिये कई नामों पर पैरवी हो रही थी।
जब किसी ने पूर्व अध्यक्ष का नाम जिलाध्यक्ष के लिये अखिलेश के सामने रखा तो राष्ट्रीय अध्यक्ष ने तुरंत कहा कि वो तो अभी मैच्योर ही नही है। वो तो परिपक्व ही नही है। उसके भीतर तो परिपक्वता ही नही हैं उसे बनाकर क्या करेगें। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के मुंह से यह सुनकर सब हैरान रह गये। क्योंकि जो नाम उनके सामने रखा गया था उनके बारे में कहा जाता है कि वो राष्ट्रीय अध्यक्ष के काफी करीबी हैं। सूत्र बतातें हैं कि इसके बाद लोनी के मुस्लिम नेता का नाम सामने रखा गया। इस नाम को सुनते ही राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इसे भी रिजेक्ट करते हुये कहा कि वो तो झगड़ा करता है। अब तीन नाम रखे और तीनो ही नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष ने रिजेक्ट कर दिये। इसके बाद सपा के वो चेहरे खामोशी साध गये जो इन नामों की पैरवी कर रहें थे। अब पंडारा रोड के रिजेक्ट एपीसोड की व्याख्या राजनगर वाले कार्यालय पर हो रही हैं। कोई ठीक नही है , कोई मैच्योर नही हैं और कोई झगड़ा करता है। जब सबमें कमिया है तो फिर महानगर और जिलाध्यक्ष बनेगा कौन। अब ऐसे में माना ये ही जाये कि इन तीनो कमियो से दूर वर्तमान वाले पदाधिकारी ही हैं और राष्ट्रीय अध्यक्ष की पसंद अभी वर्तमान वाले ही हैं। जिलाध्यक्ष रामकिशोर अग्रवाल और महानगर अध्यक्ष जेपी कश्यप परिपक्व भी हैं और दोनो किसी से झगड़ा भी नही करतें हैं। भले ही कोई इन दोनो से पुतले को लेकर झगड़ा कर ले मगर ये दोनो किसी से झगड़ा नही करते। भले ही इनके सामने झगड़ा हो जाये लेकिन ये झगड़े का हिस्सा नही बनतें। परिपक्वता के मामलें में भी दोनो उम्र, अनुभव और कार्यप्रणाली के हिसाब से ठीक हैं। अब गाजियाबाद वाले ही कहने लगें हैं कि पंडारा रोड पर जिले और महानगर की बात करनी बंद करनी पड़ेगी कभी इस चक्कर में अपनी बात ही ना बिगड़ जाये।

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