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महापुरूषों की मूर्तियों की बदहाली का जिम्मेदार कौन

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। एक तरफ तो शहर में स्वच्छता अभियान चल रहा है, वही इस तस्वीर का एक पहलू यह भी है कि शहर में सरकार के खजाने से जिन महापुरूषों की मूर्तियां स्थापित की गई थी। आज यह मूर्तियां बदहाली का शिकार है। किसी को इस ओर ध्यान देने का समय ही नहीं है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से लेकर शहीद प्यारेलाल शर्मा तक की मूर्ति स्थलों का यही हाल है। इसके अलावा कई ऐसे स्थान है जहां सरकार का पैसा लगा और आज इस पैसे का बर्बादी वाला मंजर दिखाई देता है। बड़ी बात यह है कि मूर्तियों के रख-रखाव के लिए नगर निगम द्वारा बाकायदा बीओटी ठेका छोड़ा गया था। बीओटी कंपनियों को ठेका देकर इस बात की जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि सभी महापुरूषों की मूर्तियों पर फ्रेम वर्क भी होगा और मूर्तियों को सही हाल में रखा जाएगा। लेकिन तस्वीर यह है कि मूर्तियां और उनके स्थान खस्ता हालत में है। यदि बीओटी कंपनियां काम नहीं कर रही है तो फिर निगम ने इस दिशा में क्या किया है। यदि बीओटी कंपनियां फाइलों पर ही काम कर रही है तो यह स्थिति और भी दुर्भाग्यपूर्ण है। अब जब सरकार भी बदल गई है और नगर निगम भी बदल गया है, तब इस दिशा में भी बदलाव कब आएगा। क्या निगम की मेयर और जीडीए के अधिकारी इस ओर ध्यान देंगे।
महात्मा गांधी मूर्ति स्थल का चबूतरा है क्षतिग्रस्त
जब भी किसी को उपवास रखकर अपना विरोध जताना होता है या मानवता की सेवा हेतु कोई कार्यक्रम करना होता है तो सबको महात्मा गांधी पार्क याद आता है। लोहिया नगर में अग्रसेन भवन के बराबर में स्थित गांधी पार्क आज पूरी तरह उपेक्षा का शिकार है। इस पार्क की याद ही केवल राजनेताओं को 2 अक्टूबर को आती है। इसके बाद सब भूल जाते हैं। गांधी पार्क में लगी महात्मा गांधी की मूर्ति शहर के जाने-माने समाजसेवी स्व. आशाराम पंसारी ने नगर निगम को भेंट की थी। आज भी शिलापट पर यह लिखा हुआ है। गांधी पार्क में लगी महात्मा गांधी की मूर्ति वाला चबूतरा टूटा हुआ है। जगह-जगह से यहां प्लास्टर उखड़ चुका है। कई मेयर बदल गए और मूर्ति को नगर निगम को देने वाले आशाराम पंसारी भी आज दुनिया में नहीं है। लंबा समय बीत गया लेकिन शहर की पहचान जिस गांधी पार्क को होना चाहिए था आज वह गांधी पार्क अपनी पहचान के लिए मोहताज है।
लोहिया पार्क का बोर्ड
ही हो चुका है गायब
लोहिया नगर मोड़ पर बना राममनोहर लोहिया पार्क कभी समाजवादियों के आकर्षण का केंद्र था। समाजवादी पार्टी में राममनोहर लोहिया का वह स्थान है कि उनके नाम पर बाकायदा समाजवादी पार्टी में लोहिया वाहिनी का गठन हुआ था। सपा सरकार के समय यहां लोहिया जयंती पर समाजवादियों का जमावड़ा लगता रहा है। लेकिन अब न समाजवादियों को इस पार्क की सुध लेने का समय है और न ही जीडीए के पास इतना समय है कि वह राममनोहर लोहिया के नाम पर बने इस पार्क और यहां लगी राममनोहर लोहिया की मूर्ति पर ध्यान दे सके। यहां मूर्ति और पार्क का निर्माण जीडीए द्वारा कराया गया था। आज पार्क के बाहर लगा बोर्ड आधा गायब हो चुका है।
टूट चुका है शहीद प्यारेलाल मूर्ति का फ्रेम
पूर्व विधायक स्व. प्यारेलाल शर्मा को गाजियाबाद का गांधी कहा जाता है। प्यारेलाल शर्मा उन नेताओं में रहे हैं, जिनका सदस्यता फार्म भरने के लिए खुद राममनोहर लोहिया गाजियाबाद आए थे और उन्होंने ही स्व. प्यारेलाल शर्मा का सदस्यता फार्म अपने हाथों से भरा था। हर साल उनकी जयंती पर मालीवाड़ा में उनकी स्मृति में बनाए गए प्यारेलाल पार्क में उनकी मूर्ति पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए सभी दलों के नेता आते हैं। आज शहीद प्यारेलाल शर्मा मूर्ति स्थल पर बदहाली का आलम है। मूर्ति का फे्रम टूट चुका है। शिलापट पर दरारें आ गई है। यहां लगा फव्वारा कब का सूख चुका है। इस पार्क के सौंदर्यकरण को लेकर निगम और जीडीए गंभीर ही नहीं है।

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