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जनपद के किन अधिकारियों ने लगा दी भाजपा चौपाल की वाट

बन रही है चौपाल को चौपट करने वाले अधिकारियों की सूची
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। किस्सा भाजपा से जुड़ा है और बताते हैं कि सरकार जब अपने कार्यकाल की उपलब्धियां बताने निकली तो उसके कार्यकर्ता तो चौकस रहे लेकिन उसकी सरकार के कार्यकाल मेंं तैनात अधिकारियों ने ही भाजपा की चौपाल की वाट लगा दी। नतीजा ये हुआ कि भाजपा नेता भी आ गये और लोग भी आ गये लेकिन सरकार की योजनाओ का जिन लोगों को लाभ मिला, उन लोगों की सूची ही अधिकारी कई चौपाल पर नही दे पाये। कार्यक्रम के बाद जब यह रिपोर्ट संगठन के पास पहुंची तो उन्होंने अधिकारियों के इस रवैये को बेहद गंभीर लिया है। सूत्र बताते हैं कि अब संगठन स्तर पर उन अधिकारियों की सूची बन रही हैं, जिनकी ड्यूटी इस अभियान में लगाई गई थी। बताते हैं कि सूची को लखनऊ वालों ने तलब कर लिया है। सूत्र बता रहे हैं कि भाजपा ने एक जून से 15 जून तक चौपाल कार्यक्रम आयोजित किया था। यह कार्यक्रम पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चार नगर निगम सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद और मुरादाबाद के हिसाब से रखा गया था। चूंकि यह कार्यक्रम भाजपा हाईकमान की ओर से जनता के बीच जाकर सरकार की उपलब्धि बताने को लेकर था,इसलिये इस कार्यक्रम में सांसद, विधायक, संगठन के बड़े पदाधिकारियों से लेकर मंत्रियों तक की ड्यूटी लगाई गई थी। सरकार की ओर से जिले के अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया था और इन अधिकारियों को इन चौपाल में सरकार की योजना से लाभान्वित हुए लाभार्थियो की सूची लेकर हाजिर होना था। संगठन सूत्र बता रहे हैं कि चौपाल में भाजपा नेता,कार्यकर्ता तो मुस्तैद रहे लेकिन सरकारी अधिकारी इस कार्यक्रम को लेकर गंभीर नही रहे। जिम्मेदारी एक दूसरे के ऊपर टलती रही और हाल ये रहा कि चौपाल में जो अधिकारी पहुंचे भी उनके पास लाभार्थी सूची ही नहीं थी और किन्हीं किन्हीं मामलों में तो जो अधिकारी पहुंचे तो उन्हें विषय तक की जानकारी नहीं थी। अब ऐसे अधिकारियों की सूची बन रही है और जल्द ही नाम शार्ट लिस्ट होकर लखनऊ पहुंचने वाले हैं। सूत्र बता रहे हैं ्रकि जिले के दो अधिकारियों ने इस मामले में शासनादेश का पालन नहीं किया और चौपाल को हलके में लेते हुए उन विभागों के अधिकारी इन चौपालों में भेज दिये, जिनका इन योजनाओ से कोई लेना- देना ही नहीं था। कहीं पशुपालन तो कहीं मत्स्य विभाग के अधिकारी चौपालों में भेजे गये। सूत्र बताते हैं कि इस मामले में चौपाल के संयोजक संबंधी दायित्व को संभाल रहे एक पदाधिकारी ने भी अपनी रिपोर्ट भेजी है। अब चौपाल कार्यक्रम में सहयोग ना करने को लेकर जिले के दो अधिकारी भाजपा संगठन के रडार पर आ गये हैं। सूत्र बताते हैं कि मामला गरमाने के बाद अंदरखाने अब कागजी खेल और आंकड़ों का गेम शुरू हुआ है लेकिन दूसरी तरफ संगठन भी इस मामले में नरम रुख के मूड में नहीं हैं। संगठन के बड़े नेता कह रहे हैं कि यदि सरकार के कार्यक्रम का इस तरह मजाक बनाना था तो इसमें प्रशासन को साथ ही नहीं लेना चाहिये था और यदि लाभार्थी की सूची भी अपडेट नहीं है तो फिर और क्या अपडेट है।
इन योजनाओं की देनी थी जानकारी चौपाल में
बताते हैं कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में अटल पेंशन योजना,आयुष्मान योजना, उज्ज्वला योजना,स्वच्छता अभियान और किसान बीमा जैसी योजनाओं की जानकारी दी जानी थी। चौपाल का उद्देश्य भी यही था कि जनता के बीच भाजपा के जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे और जनता के बीच बताया जायेगा कि इन योजनाओं का लाभ इन इन लोगों को मिला है। किन लोगों को लाभ मिला है, इसकी जानकारी प्रशासन से जुड़े अधिकारी ही दे सकते थे और जैसी अपेक्षा उनसे की जा रही थी,वैसा सहयोग उधर से मिला नहीं। जिस कार्यक्रम मे उज्ज्वला योजना की जानकारी देनी थी उस कार्यक्रम में मत्स्य विभाग के अधिकारी पहुंच गये और जिस कार्यक्रम में अटल पेंशन योजना की जानकारी देनी थी
उसमें पशुपालन विभाग के अधिकारी पहुंचे और जानकारी उनके पास भी नहीं थी।
जनरल,सुनील और अतुल गर्ग
की चौपाल में ही थी रूचि

सूत्र बता रहे हैं कि सरकार की योजनाओं की जानकारी देने के लिये जब पूरी भाजपा एकजुट होकर इस चौपाल कार्यक्रम को धार दे रही थी तब ऐसे में सरकार के अधिकारियों ने एकजुट भाजपा को लेकर भी अपने हिसाब से गुट बना लिये। खुद ही तय कर लिया कि किस विधायक की चौपाल को महत्व देना है और किसे इग्नोर करना हैं। बताते हैं कि लोकसभा सांसद व केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह,शहर विधायक व खाद्य एव रसद राज्यमंत्रीअतुल गर्ग,साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा की चौपाल में ही अधिकारी उस सूची को लेकर पहुंचे थे,जिसमें उन लाभार्थियो का ब्यौरा था, जिन्हें सरकार की योजनाओं का लाभ मिला था। इसके अलावा अन्य चौपाल में सूची के नाम पर मामला चौपट ही रहा। भाजपा के अन्य नेताओं ने चौपाल भी लगा ली और लोग भी बुला लिये लेकिन सरकार के अधिकारी बता ही नहीं पाये कि इस क्षेत्र में किस व्यक्ति को सरकार की कौन सी कल्याणकारी योजना का लाभ मिला है। बताते हैं कि गलती उन अधिकारियों की भी नहीं थी जिन्हें भेजा गया था। जिन योजनाओं की जानकारी देनी थी वो अधिकारी उस विभाग के थे ही नहीं। प्रशासन ने केवल जनरल वीके सिंह,मंत्री अतुल गर्ग और साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा को ही इस काबिल माना कि मांगने पर उन्हें चौपाल में लाभार्थी सूची उपलब्ध करा दी जाये। अन्य नेताओं को एक तरह से चौपाल कार्यक्रम में हाशिये पर रख दिया गया।

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