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ग़ाजियाबाद दिल्ली एन.सी.आर

कहां रुक गई भाजपा प्रदेश कमेटी घोषणा वाली फाइल

कहीं ऐन मौके पर फंस तो नहीं गया है किसी नाम पर पेंच
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। एक महीने से भाजपा के सियासी गलियारों में इस बात का क्रेज है कि आज प्रदेश कमेटी के नामों की घोषणा वाली एक्सप्रेस चलेगी। दिन पर दिन बीते और रोजाना ही कल पर बात चली जाती थी। फिर यह कहा गया कि कमेटी अब सावन के पहले सोमवार को घोषित होगी। सावन का पहला सोमवार भी आकर चला गया और दूसरा सोमवार आ गया, लेकिन कमेटी तो घोषित ही नहीं हुई। चर्चा पूरे चरम पर रहती है और अब सबकी निगाहें प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह पर है। वेस्ट यूपी में सभी जानना चाहते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष अपनी टीम में किस-किस चेहरे को लेते हैं। सभी की जिज्ञासा है कि प्रदेश टीम में नोएडा में कौन-सा चेहरा होगा और गाजियाबाद से कौन-सा चेहरा होगा। ब्राह्मण समाज के किस चेहरे को जगह मिलने वाली है और वैश्य समाज का कौन-सा चेहरा प्रदेश टीम में आ रहा है। बात एनसीआर की हो रही है तो यहां गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ और बुलंदशहर के चेहरों को लेकर भी चर्चा चलती रहती है। गाजियाबाद को वैसे भी भगवा गढ़ माना जाता है और वेस्ट यूपी में यहां से कई नेता शामिल हैं। प्रदेश टीम में चर्चा इस बात को लेकर थी कि लगातार कई बार क्षेत्रीय टीम में महामंत्री की पारी खेलने वाले अशोक मोंगा को प्रदेश टीम में बड़ी जिम्मेदारी मिलने जा रही है। अशोक मोंगा बेहतरीन रणनीतिकार माने जाते हैं और बड़ी रैलियों में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जाती है। प्रदेश टीम में क्या गाजियाबाद से कोई जाट चेहरा शामिल होगा, इसको लेकर भी लगातार कयास लगाए जा रहे हैं। पूर्व मेयर अशु वर्मा और भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राजा वर्मा के नाम को लेकर भी चर्चा है। फिलहाल सीन यही है कि प्रदेश टीम में कौन-से चेहरे शामिल होंगे। एक महीने से प्रदेश टीम घोषित होने का इंतजार हो रहा है। अब चर्चा हो रही है कि प्रदेश कमेटी तो लिफाफे में बंद हो चुकी है और वह लखनऊ से चलकर दिल्ली आ चुकी है। बताया ये जा रहा है कि किसी बोल्ड चेहरे को लेकर कमेटी होल्ड हो गई है। अब इस चर्चा में कितना दम है यह तो कमेटी घोषित होने के बाद पता चलेगा, लेकिन चर्चा दिल्ली से लखनऊ तक है कि कोई ऐसा चेहरा अंतिम ओवर में एंट्री लेकर आया है, जिसके कारण सीन होल्ड वाला हो गया है। सिफारिश बोल्ड है इसलिए कमेटी फिलहाल होल्ड है। अब कब घोषणा होती है सभी की निगाह इसी पर है। क्योंकि कमेटी से कई समीकरण प्रभावित होंगे।
रीजनल अध्यक्ष का ताज और गाजियाबाद की बात
भाजपा में क्षेत्रीय अध्यक्ष का पद काफी प्रभावशाली और प्रतिष्ठा का पद माना जाता है। यहां पर निगाहें इस बात पर है कि क्षेत्रीय अध्यक्ष के पद पर किसकी ताजपोशी हो रही है। क्षेत्रीय टीम में गाजियाबाद से कौन-कौन चेहरे हो सकते हैं, इसको लेकर चर्चा पूरे चरम पर है। एक चर्चा ये है कि मौजूदा क्षेत्रीय अध्यक्ष अश्वनी त्यागी रिपीट हो सकते हैं और यदि वह रिपीट होते हैं तो इसके इफेक्ट किसे बीट करेंगे और किसके लिए यह ट्रीट होगा। यहां पर ठाकुर कार्ड की बात चलती है तो सतेंद्र शिशौदिया और वाईपी सिंह का नाम आता है। कहा ये जाता है कि वाईपी सिंह को किसी चुनाव की तैयारी के निर्देश भी मिले थे और उसके बाद उनके सोशल मीडिया पर विशेष रूप से विधानसभा का जिक्र उनके नाम के साथ होने लगा था। यहां पर जाट चेहरों में मोहित बेनिवाल का नाम है तो पूर्व मेयर अशु वर्मा और किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राजा वर्मा का भी नाम भाजपा वालों की जुबान पर है। सूत्र बताते हैं कि समीकरण को मेरठ और बुलंदशहर वाले शर्मा जी भी लास्ट ओवर में ट्विस्ट करा सकते हैं। फाइट काफी टाइट है और अब घोषणा के बाद पता चलेगा कि भगवा पॉलिटिकल कॅरियर किसका ब्राइट है।

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