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ग़ाजियाबाद दिल्ली एन.सी.आर

कब होगा निगम में कार्यकारिणी उपाध्यक्ष के लिए चुनाव

भाजपा के हाथ में सारे पत्ते और उसे ही खेलना है यहां दांव
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। भाजपा इन दिनों सियासत की नई नीति पर काम कर रही है। भाजपा केंद्र से लेकर प्रदेश तक बहुमत में है। वह निगम से लेकर नगर पालिका तक जनादेश का परचम लहरा रही है। इसके बावजूद भाजपा पॉलिटिक्स विद पब्लिक नियम पर चल रही है। उनके कार्यकर्ता आॅनलाइन बिजी हैं।
भले ही लॉकडाउन चल रहा है, लेकिन भाजपा वर्चुअल रैली के साथ पब्लिक की पॉलिटिकल नब्ज को थाम रही है। वह अपने कार्यकर्ता को बिल्कुल भी फ्री हैंड छोड़ने के मूड में नहीं है। संगठन की इस बात से अलग चुनाव की बात करें तो भाजपा किसी भी छोटे बड़े चुनाव को छोड़ने के मूड में नहीं है। वह हर चुनाव में मैदान में आ रही है। गन्ना सोसाइटी से लेकर ग्राम पंचायत तक वह अपनी छाप छोड़ना चाहती है। एक संदेश देना चाहती है कि यह जनादेश भी भाजपा के नाम है। ऐसे में भगवा गढ़ कहे जाने वाले गाजियाबाद में भाजपा उस नगर निगम में निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष चुनाव से क्यों दूर है जहां इस छोर से उस छोर तक उसे ही फैसला लेना है। यहां कार्यकारिणी उपाध्यक्ष चुनाव में भाजपा ए टीम भी खुद है और बी टीम भी खुद है। 100 पार्षदों वाले निगम में भाजपा के पास उसके टिकट पर जीते हुए पार्षद 57 हैं।
कम से कम दस पार्षद ऐसे हैं जो चुनाव तो दूसरे टिकट पर लड़े थे, लेकिन वो आज की तारीख में खड़े भाजपा के साथ हैं। मेयर भाजपा की हैं और यहां पर भाजपा को निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष की घोषणा करनी है। यह निगम का नियम है और इस पद पर भाजपा क्यों बैकफुट पर है इसे लेकर सवाल भाजपा में उठ रहा है। मेयर आखिर क्यों इस चुनाव
को लेकर बैकफुट और साइलेंट मोड पर हैं।
निकल गया सोमवार और घोषित नहीं हुए उम्मीदवार
भाजपा निगम के अखाड़े में पूरे तरीके से मजबूत है। यहां पर दो ब्राह्मण चेहरों की दावेदारी की बात चली थी। इनमें निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष पद के लिए सीनियर पार्षद अनिल स्वामी और राजीव शर्मा का नाम चल रहा था। इस बीच एक वैश्य पार्षद के नाम की चर्चा चली। मेयर आशा शर्मा ने पूर्व में कहा था कि वह नगर आयुक्त को सोमवार को पत्र लिखेंगी। भाजपा महानगर अध्यक्ष ने कहा था कि भाजपा चुनाव से एक घंटा पहले अपना उम्मीदवार घोषित करेगी। लेकिन सावन का पहला सोमवार निकल गया और उम्मीदवार का पत्र ही नहीं लिखा गया। अब तो दूसरा सोमवार भी आ गया। ऐसा क्या हुआ कि भाजपा खेमे ने निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष पद को लेकर बिल्कुल ही मौन धारण कर लिया। आखिर सुनील यादव कब तक निवर्तमान निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष बने रहेंगे। भाजपा का कौन-सा पार्षद निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष बनेगा। यह सस्पेंस भी सोशल डिस्टेंस के साथ सामने आना ही चाहिए।

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