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ग़ाजियाबाद दिल्ली एन.सी.आर

करंट क्राइम ने जब छेड़े वरिष्ठता समर्पण और सम्मान को लेकर तार तब आ गयी एक साथ कई पुराने चेहरों की भावनाएं बाहर

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)
गाजियाबाद। सियासत में समीकरण एक अलग चीज है और वफादारी अलग चीज। कार्यकर्ता के समर्पण, कार्यकर्ता की वरिष्ठता और कार्यकर्ता के सम्मान के आगे सभी समीकरण छोटे पड़ जाते हैं। कार्यकर्ता पार्टी की रीढ़ होता है और पार्टी की पहचान होता है। भाजपा आज विजय रथ पर सवार है। बात अगर गाजियाबाद की करें तो यहां जिला पंचायत से लेकर नगर निगम और लोकसभा से लेकर राज्यसभा तक भाजपा काबिज है। विधानसभा सीटों पर उसका जलवा है। जब सूबे में सरकार उसकी है और केन्द्र में भाजपा का परचम लहरा रहा है तो जाहिर है कि पुराने कार्यकतार्ओं को कुछ मिलना चाहिए। पुराना कार्यकर्ता सम्मान चाहता है। जब उसकी पार्टी का राज है तो फिर उसका आज गोल्डन होना चाहिए। गाजियाबाद में कई ऐसे भाजपा नेता हैं जिन्होंने लाईफ भाजपा में गुजारी है और जब सरकार है तो फिर लाईफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड बनता है।
करंट क्राइम ने बुधवार को इस मुद्दे को अपनी खबर के माध्यम से प्रमुखता से उठाया था। करंट क्राइम ने बताया था कि भाजपा में कई ऐसे पुराने चेहरे हैं जिन्होंने जिन्दगी भर भाजपा का झंडा उठाया है। करंट क्राइम ने कई ऐसे चेहरे गिनाये थे जिन्हें सरकार आने के बाद कुछ ना कुछ मिला है तो करंट क्राइम ने वो चेहरे भी बताये थे जिन्हें सरकार में कुछ नही मिला है।
यहां पर करंट क्राइम ने बालेश्वर त्यागी से लेकर बृजपाल तेवतिया और पूर्व पार्षद मुकेश त्यागी से लेकर जितेन्द्र त्रिवेदी तक पुराने भाजपाईयों के नाम गिनवाये थे। लाईनपार से लेकर हिण्डन पार क्षेत्र के पुराने भाजपाईयो का जिक्र किया था।
बुधवार को जब यह खबर प्रकाशित हुई तो इस पर प्रतिक्रियाओं का एक सैलाब आ गया। करंट क्राइम ने जब भाजपा के पुराने चेहरों की सक्रियता, वफा, समर्पण को लेकर चर्चा का तार छेड़ा तो एक साथ कई पुराने चेहरों की भावनाएं बाहर आ गर्इं। वो नाम भी सामने आये जिनका जिक्र खबर में नही हुआ था। सभी पुराने भाजपाइयों ने अपने भाजपाई इतिहास को बताया। अपना सियासी शिजरा बताया और यहीं से ये भी सच सामने आया कि भाजपा इतने सालों में कितनी बदल गयी है। भाजपा के पास आज भी ऐसे कार्यकर्ता हैं जिन्होंने उम्र भाजपा में गुजारी है और उन्होंने कभी भी पार्टी नही बदली।

पीढ़ियां खप गर्इं साहब इस संगठन को बनाने में
जब किसको क्या मिला वाला तार हिला तो फिर गिला भी बाहर आया। वफाओं का सिला क्या मिला ये भी बताया। देशराज देसी का नाम आया और योगेश त्यागी ने लिखा कि बड़े भाई देशराज उर्फ देसी जी गाजियाबाद भाजपा महानगर के पुरातन समय से कार्यकर्ता हैं। मिला तो उन्हें भी संगठन से कुछ नही। पीढ़ियां खप गर्इं इस संगठन को बनाने में और जिनका नाम लेवा भी सत्ता में नही है।

एक्स फौजी ने बताया बीस साल किया है पार्टी का काम
बात जब वफा की चली तो फिर भगवा गढ़ से कई आवाजें एक साथ आर्इं। भाजपा के चौधरी जयपाल सिंह एक्स फौजी हैं। निगम चुनाव में जब टिकट नही मिला था तो गुलाब के फूल चुनाव चिन्ह पर निर्दलीय चुनाव लड़े थे। एक बार उनका गिला ये था कि उन्हें कार्यक्रम में बुलाया और फिर उनका अपमान हो गया। बहरहाल चौधरी जयपाल सिंह ने लिखा कि मेरी गिनती भी कहीं हो सकती है या नहीं क्योंकि काम तो पार्टी में मैंने भी 20 वर्ष तक किया है। भाजपा के सैनिक प्रकोष्ठ को पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश में खड़ा किया है और पूरी तरह सक्रिय भी रखा है। खुद भी सक्रियता की मिसाल रहा हूं लेकिन मैं जहां तक देखता हूं। आजकल गाजियाबाद में तो प्रकोष्ठों को शायद पार्टी ने समाप्त ही कर दिया है तो क्या कहीं अपना भी जिक्र होगा।

आठ साल की उम्र में संघ और आज 41 में भाजपा के संग
जब करंट क्राइम ने पुराने भाजपाईयों का जिक्र किया तो यहां कुछ नाम छूट गये। लेकिन पुराने भाजपाई आगे आये और उन्होंने पूरी भाजपाई हिस्ट्री बताई और फिर यह भी मिस्ट्री रही कि इतने पुराने भाजपाईयों को हाशिये पर क्यों रखा गया है। नागेन्द्र चौधरी ने लिखा कि भाई साहब मुझे आप भूल गये। बताया कि जब आठ साल का था तब से संघ स्वयं सेवक हूं। 23 साल से भाजपा में हूं और आज 41 साल का हो चुका हूं लेकिन आज भी भाजपा के संग हूं।

विनोद उपाध्याय बोले 14 वर्ष की उम्र से हुआ सफर शुरू
भाजपा के विनोद उपाध्याय संघ के क्षेत्रीय प्रचारक रहे हैं। भाजपा संगठन में काम किया है और विधानसभा चुनाव में टिकट के दावेदार रहे हैं। इन दिनों कुछ नाराज हैं और सोशल मीडिया के जरिये व्यवस्था परिवर्तन आंदोलन चला रहे हैं। इस आंदोलन के जरिये वो भाजपा की मौजूदा कार्यप्रणाली और कई नेताओं को निशाने पर लेते हैं। करंट क्राइम की खबर के बाद पुराने भाजपाई ने दिल की बात रखी और लिखा कि मैं इन सभी चेहरों से सीनियर हूं। मेरा सफर 14 वर्ष की उम्र में शुरू हुआ और मुझे क्या मिला। क्योंकि मैंने मांगा ही नही और बस काम करता गया।

40 साल भाजपा में और मुझे क्या मिला
भाजपा के पुराने कार्यकर्ता देशराज देसी भी करंट क्राइम की खबर के बाद सामने आये। उन्होंने बताया कि सन 1991 में जब मुरली मनोहर जोशी राष्टÑीय अध्यक्ष थे तब कन्याकुमारी से लाल चौक एकता यात्रा में कोई मुझे बतायेगा कि कितने लोग गये थे। पंजाब में आतंकवाद का दौर था और मैं देशराज देसी उसमें भी एक बस लेकर गया था। 40 साल हो गये मुझे भारतीय जनता पार्टी में क्या मिला। देशराज देसी ने बताया कि लाल कृष्ण आडवाणी ने एक नारा था कि जात-पात से तोड़ेंगे, हम संस्कृत से जुड़ेंगे। मैंने अभी तक अपनी जाति का भी ब्लॉक नही किया था। किसी को यह भी नही मालूम की मैं कौन सी बिरादरी का हूं और मैं अपना नाम दशरथ देसी लिखता था। क्या मिला मुझे।

भूमि पुत्र बोले बिहार पूर्वांचल के लोगों का भाजपा में नही खास महत्व
जब पुराने नेताओं की बात चली तो यहां भूमि पुत्र प्रियरंजन सिंह भी आये। उन्होंने लिखा कि डीएन सिंह पूर्वांचल बिहार से आते हैं। पिछले 30 साल से ज्यादा समय से भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। क्या मिला आज तक वैसे भी भाजपा में बिहार और पूर्वांचल के लोगों के लिए कोई खास महत्व नही है गाजियाबाद के नेताओं के मन में। यह कड़वा है मगर सच्चाई है। हालांकि भूमि पुत्र को शायद यह नही पता कि डीएन सिंह संजय नगर इलाके से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़कर हार चुके हैं। उन्हें उस समय मनवीर नागर ने चुनाव हराया था। बिहार से अर्चना सिंह नामित पार्षद हैं। रनीता सिंह पूर्वांचल से हैं और महानगर उपाध्यक्ष हैं। इसके अलावा कई मंडल अध्यक्ष और अन्य पदों पर नेता पूर्वांचल से हैं। कई पार्षद पूर्वांचल से आते हैं। हिण्डन पार में तो कई इलाकों में बिहार और पूर्वांचल के लोग निर्णायक वोट बैंक माने जाते हैं।

प्रेम त्यागी और जितेन्द्र त्रिवेदी को किया गया इग्नोर
जब वफा की बात चली तो फिर कई पुराने चेहरे शांत रहे मगर समर्थक आगे आ गये। अनूप सोनी ने लिखा कि इस लिस्ट में सबको कुछ ना कुछ मिला है लेकिन प्रेम त्यागी और जितेन्द्र त्रिवेदी को कुछ नही मिला। लाईनपार क्षेत्र में बीजेपी को खड़ा करने वाले और कार्यकर्ता को बनाने वाले ये लोग हैं। जितने पहले कार्यकर्ता थे आज उससे ज्यादा हैं। जहां पर बस्ते नही लगते थे, वोट नही निकलती थी, उन्होंने वहां पर बस्ते लगवाये और वोट निकलवाई। नीरज पांचाल ने लिखा कि जितेन्द्र त्रिवेदी लाईनपार क्षेत्र में ऐसे नेता जिन्होंने भाजपा के लिए सबसे ज्यादा कार्यकर्ता खड़े किए हैं और जितेन्द्र त्रिवेदी निस्वार्थ और बेदाग छवि के नेता हैं।

जेल भी गये और काम भी किया मगर सब बेकार
कैलाश यादव ने बताया कि 1989 से भाजपा में हैं। वार्ड अध्यक्ष रह चुके हैं। राम कार सेवा में 6 दिसम्बर को अयोध्या में गये। साइकिल यात्रा से पदयात्रा भी की। देसी जी के साथ बालेश्वरत्यागी के साथ, दुर्गेश गुप्ता, मुकेश त्यागी के साथ और मुकेश भाटी से लेकर उपेन्द्रनाथा तथा विधायक सुनील शर्मा के साथ सभी कार्यक्रम में रहे हैं। अशोक संत ने लिखा कि जिन वर्गों की वजह से सरकारें बनीं हैं वो चेहरे गायब हैं। रमेश मंगल ने देसराज देसी को बताया कि रामजन्म भूमि आंदोलन में जेल में रहा और ढांचा तोड़ने में भी जेल में रहा। अब कोई पूछता नही है। यह मेहनत का इनाम है।

बालेश्वर और बृजपाल तेवतिया का नाम नही होना चाहिए
किसे क्या मिला और किसे कब क्या मिलेगा पर अविनाश दीक्षित ने अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि बालेश्वर त्यागी व बृजपाल तेवतिया का नाम नही होना चाहिए। बालेश्वर त्यागी मंत्री रह लिए हैं और तेवतिया जी को विधायक का टिकट मिल चुका है।

आज कार्यकर्ता को सम्मान नही मिल रहा
पूर्व पार्षद मुकेश त्यागी का नाम भी उन चेहरों में करंट क्राइम ने लिया था जिन्हें कुछ नही मिला है। मुकेश त्यागी ने लिखा कि अनेक पुराने कार्यकर्ता जिन्होंने पार्टी को यहां तक पहुंचाया है उन्हें सम्मान मिलना चाहिए। मगर आज परिस्थिति भिन्न है। सम्मान उसको मिलता है जिसका ग्रुप मजबूत हो या वह कार्यकर्ता किसी मजबूत स्तंभ का खास हो। अन्य योग्यता कोई मायने नही रखती। क्षेत्र में क्या काम किया है, क्या छवि है इससे कोई वास्ता नही है।

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