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क्या प्रभावी होगा कांग्रेस का भारत बंद

एससी/एसटी एक्ट को लेकर सवर्णों द्वारा बुलाए गए भारत बंद की अपार सफलता के बाद कांग्रेस ने पेट्रोल-डीजल के आसमान छूते दामों और बढ़ती महंगाई के विरोध में 10 सितंबर को भारत बंद का ऐलान किया है। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर जनता की गाढ़ी कमाई लूटने का आरोप लगाया है और कहा हे कि इस सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर टैक्स लगाकर साढ़े ग्यारह लाख करोड़ रुपये की वसूली कर ली है, लेकिन इसके बाद भी महंगाई पर कोई काबू नहीं रह गया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की कैलास मानसरोवर यात्रा के बीच मोदी सरकार के खिलाफ बुलाए गए भारत बंद को कितनी सफलता मिलेगी यह देखने वाली बात होगी, क्योंकि विरोधी तो यही कह रहे हैं कि कांग्रेस नेताओं में एकजुटता की कमी है, ऐसे में जमीनी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे और बंद को सफल करवाएंगे कहना मुश्किल है। जानकारों की मानें तो पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमतों से आमजन भी परेशान है, इसलिए भारत बंद को स्वत: समर्थन मिलेगा, जिसके लिए कांग्रेस अपनी पीठ न ही थपथपाए तो बेहतर होगा।

चुनाव को लेकर गुप्त समझौता?
तेलंगाना में समय से पहले चुनाव कराए जाने को लेकर मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने विधानसभा भंग करने की घोषणा कर दी। इसे लेकर विपक्षी पार्टियां खासतौर पर कांग्रेस का कहना है कि समय से पहले चुनाव कराने के पीछे ‘केसीआर और मोदी के बीच गुप्त और संदिग्ध समझौता’ हुआ है। इस प्रकार राव पर नकारात्मक राजनीति करने का आरोप भी लगा है। कांग्रेस का कहना है कि मुख्यमंत्री यह स्पष्ट करें कि ऐसी क्या जरूरत आन पड़ी थी कि उन्होंने विधानसभा को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही भंग कर दिया। विरोधियों का कहना है कि यदि कुछ समय और यह सरकार रहती तो जनता में इसके गलत फैसलों और गलत नीतियों की पोल खुल जाती, ऐसे में अचानक विधानसभा भंग करके सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से भी पल्ला झाड़ लिया है। अब सवाल यह है कि क्या मतदाता इतना नादान है कि उसे कुछ दिख ही नहीं रहा है।

रुपया गिरता गया तो..?
डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है, जिसके दुष्परिणाम भी देखने को अब मिलने लग गए हैं। इस पर सवाल यह है कि आखिर रुपया क्यों गिर रहा है और आरबीआई और सरकार की लाचारी क्या है जो रुपये को थामने की बजाय उसे गिरता हुआ देख रही है। गौरतलब है कि डॉलर के मुकाबले रुपया 72 के स्तर पर पार पहुंच गया है, जिसका सीधा असर तेल आयात करने और कीमत निर्धारण में हो रहा है। जानकारों की मानें तो रुपये में यह गिरावट वैश्विक कारणों से है, लेकिन राजनीतिज्ञ तो यही कह रहे हैं कि जब मनमोहन सरकार के समय रुपये में मामूली गिरावट होती थी तो भाजपा और उसके नेता चढ़ाई कर देते थे और इसे देश की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखने लगते थे, लेकिन अब जबकि मोदी सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने जा रही है फिर रुपये का यूं गिरते जाना और महंगाई का सातवें आसमान पर पहुंचना चिंता का विषय बन गया है।

बाजवा का बाज न आना
पाकिस्तान में इमरान की सरकार बनने के बाद भी सेना अध्यक्ष बाजवा के सुर बदलते नहीं दिख रहे हैं। यही वजह है कि वो पाकिस्तान रक्षा दिवस पर भी कश्मीर राग छेड़ते दिखे हैं। आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा ने रक्षा दिवस पर कहा कि वे कश्मीर के भाईयों और बहनों द्वारा उनकी आजादी की लड़ाई में दी जाने वाले कुर्बानी के लिए सलाम करते हैं। यह कहते हुए बाजवा भूल गए कि वो कश्मीर मसले पर नहीं बल्कि सन् 1965 की लड़ाई की सालगिरह की याद में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस अवसर पर चूंकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और राष्ट्रपति ममनून हुसैन भी मौजूद थे अत: जानकार कह रहे हैं कि आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा इस सरकार को भी अपने ही रंग में रंगने की कोशिश कर रहे हैं और इसलिए वो कश्मीर के जख्म को कुरेद रहे हैं।

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