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हम दुनिया से 5 साल पहले ही ‘टीबी-मुक्त भारत’ बनाने के पीएम के सपने को पूरा करेंगे: मंत्री हर्षवर्धन

नई दिल्ली। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित रोगियों के इलाज तथा देखभाल के लिए स्वैच्छिक क्राउड-फंडिंग और टीबी-मुक्त कॉरपोरेट स्पेस के बारे में चर्चा करने के लिए व्यापारिक कॉरपोरेट संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले संघों और चुनिंदा सार्वजानिक क्षेत्र के उपक्रमों के साथ एक उच्चस्तरीय आभासी बैठक की अध्यक्षता की। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस बैठक का उद्देश्यउन नेक कार्यों, जो अब तक अनदेखे रह गए हैं,में निजी कॉर्पोरेट क्षेत्र की व्यापक साझेदारी एवं भागीदारी के लिए आगे के रास्ते के बारे में चर्चा करना था।

देश को कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर से निपटने में मदद करने के उद्देश्य से उदारता के साथ समर्थन देने के लिए कॉर्पोरेट क्षेत्र और विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए, उन्होंने वर्तमान में देश में दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य संबंधी देखभाल उपलब्ध कराने में मुख्य रूप से संसाधनों की कमी और प्रतिस्पर्धी स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिकताओं की वजह से उत्पन्न मौजूदा अंतर को पाटने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी की जरूरत को रेखांकित किया। उन्होंने कॉर्पोरेट संघों और सार्वजनिक उपक्रमों से अपील की कि वे सीएसआर पहल के तहत दुर्लभ बीमारियों के रोगियों के इलाज के लिए उदारतापूर्वक योगदान दें। डॉ.हर्षवर्धन ने कहा कि “वैश्विक स्तर पर, 8% आबादी दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित है। जीवित बचे हुए लोगों में से 75% बच्चे हैं,जिनके इलाज के लिए उनके माता-पिता को एक जगह से दूसरी जगह तक भागना पड़ता है।इस प्रक्रिया में उनका संसाधन खत्म हो जाता है और वे भावनात्मक रूप से परेशान होते हैं।

डॉ. हर्षवर्धन ने देश के भीतर दुर्लभ बीमारियों के लिए नैदानिक ​​और चिकित्सीय उपायों के अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने वाले वातावरण के निर्माण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों को भी गिनाया। उन्होंने कहा कि“दुर्लभ रोग समितियों का गठन किया गया है, नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं और अधिसूचित किए गए आठ उत्कृष्टता केंद्रों (सीओई) में दुर्लभ रोग फंड खाते भी शुरू किए गए हैं। उम्मीद कार्यक्रम के तहत आनुवंशिक जांच के लिए निदान केन्द्र खोले गए हैं। दुर्लभ बीमारियों के लिए कम लागत वाले चिकित्सीय उपाय और दवाओं के पुन: उपयोग के लिए आईसीएमआर, डीबीटी, सीएसआईआर के साथ डीएचआर के तहत एक अनुसंधान संकाय बनाया गया है ताकि इन बीमारियों के अध्ययन को संभव बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर दुर्लभ रोग निदान के लिए सबसे बड़ा मुफ्त एक्सोम (डीएनए)-सिक्वेंसिंग कार्यक्रम (गार्जियन योजना) चलाता है, जबकि सीडीएससीओ ने नई दवाए व नैदानिक ​​परीक्षण नियम, 2019 के तहत दुर्लभ बीमारियों के लिए नई दवाओं से संबंधित आवेदनों को तेज गति से निपटाने के प्रावधान किए हैं और संभावित दवा उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क में छूट दी है। इसी तरह वित्त मंत्रालय भी इन बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली विशिष्ट दवाओं के आयात पर सीमा शुल्क को कम करने के लिए काम कर रहा है।

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