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हम सुशांत मामले में पेशेवर तरीके से जांच कर रहे हैं: सीबीआई

नई दिल्ली| सुशांत सिंह राजपूत के पारिवारिक वकील विकास सिंह द्वारा कुछ दिनों पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच में अपडेट मांगने के बाद शीर्ष एजेंसी ने सोमवार को कहा कि वह पेशेवर तरीकों से जांच के सभी एंगल को देख रही है। सीबीआई के प्रवक्ता आर.के. गौर ने एक बयान में कहा, “सीबीआई सुशांत की मौत के मामले में पेशेवर तरीके से जांच कर रही है, जिसमें सभी पहलुओं पर गौर किया जा रहा है और अभी तक किसी भी पहलू को खारिज नहीं किया गया है।”

उन्होंने कहा कि आगे की जांच जारी है। सिंह ने पिछले सप्ताह एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की जांच सुशांत की मौत के मामले में वास्तविक सच्चाई को सामने लाने के लिए हो रही जांच से अधिक सामने आ रही है।

सिंह ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था, “पूरे बॉलीवुड को क्यों बुलाया जा रहा हैं? जिन्हें आज या कल बुलाया गया है, उन लोगों के पास से उन्हें कुछ बरामद नहीं होने वाला है। एनडीपीएस मामले में सब कुछ मात्रा पर निर्भर करता है, परिवार को लगता है कि यह मुख्य मुद्दे (सुशांत की मौत के मामले) से हटाने के लिए किया जा रहा है।”

वरिष्ठ अधिवक्ता ने आगे कहा कि बड़े सितारों को बुलाकर मीडिया का ध्यान मामले से हटा दिया गया है। सीबीआई ने जांच के संबंध में एक भी प्रेस बयान जारी नहीं किया है और जिस दिशा में जांच चल रही है वह परिवार के लिए थोड़ी चिंताजनक है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामले की जांच कर रही सीबीआई टीम को दिल्ली आए एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन वे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में डॉक्टरों की टीम से नहीं मिले हैं।

सिंह ने कहा, “आज हम मामले पर पूरी तरह से असहाय हैं, क्योंकि सीबीआई कोई भी प्रेस ब्रीफिंग नहीं कर रही है। यह दिलचस्पी की कमी है और जिस गति के साथ मामला चल रहा है वह चिंताजनक है।”

सिंह ने कहा कि एम्स टीम के एक डॉक्टर ने दावा किया कि यह एक हत्या का मामला है। उन्होंने कहा, “एम्स की टीम में डॉक्टरों में से एक का मानना है कि यह गला घोंटने से 200 प्रतिशत मौत का मामला है न कि आत्महत्या। यह सुशांत की बहन मीतू द्वारा क्लिक की गई तस्वीरों के साथ साझा किया गया है।”

उन्होंने कहा, “अगर हत्या का मामला है तो जाहिर है, जांच का तरीका और तेजी अलग होना चाहिए। दुर्भाग्य से परिवार का कोई भी सदस्य सुशांत के साथ नहीं रह रहा था और इसलिए हम नहीं जानते कि वास्तव में क्या हुआ।” सीबीआई ने बिहार सरकार के अनुरोध पर केंद्र से अधिसूचना मिलने के बाद 6 अगस्त को मामला दर्ज किया था। सीबीआई की एसआईटी टीम 20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले को एजेंसी को सौंपने के एक दिन बाद मुंबई गई थी।

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