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2007 में ही संन्यास लेना चाहते थे सचिन रिचर्ड्स की सलाह के बाद बदला इरादा

मुंबई (ईएमएस)। महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर साल 2007 में ही क्रिकेट को अलविदा कहना चाहते थे पर वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज विवियन रिचर्ड्स के कहने पर उन्होंने अपना विचार छोड़ दिया था। सचिन ने एक कार्यक्रम के दौरान इस बात का खुलासा किया है। इस कार्यक्रम में रिचर्ड्स भी मौजूद थे। इससे पहले कहा जाता रहा है कि बड़े भाई ‌अजित तेंदुलकर की सलाह के चलते सचिन ने 2007 में संन्यास लेने का इरादा बदल दिया था। मगर अब तक इसमें रिचर्ड्स की भूमिका के बारे में कोई बात सामने नहीं आई थी। तेंदुलकर ने खुलासा किया कि 2007 का विश्व कप उनके करियर के सबसे खराब वक्त में से था। जिस खेल ने उन्हें जिंदगी का सबसे अच्छा वक्त दिखाया था, वही तब खराब समय भी दिखा रहा था। उस समय मैंने महसूस किया कि बहुत हो गया। इसके साथ ही उस दौर में अन्य जो भी चीजें घट रही थीं, वो बिल्कुल भी अच्छी नहीं थीं। हमें कुछ बदलाव की जरूरत थी और मैंने महसूस किया कि अगर ऐसा नहीं होता है तो मैं क्रिकेट से संन्यास ले लूंगा। मैं इसे लेकर चल रह था। मगर तब मेरे बड़े भाई ने बताया कि 2011 का विश्व कप फाइनल मुंबई में है। क्या तुम कल्पना कर सकते हो कि विश्व कप की खूबसूरत ट्रॉफी तुम्हारे हाथों में होगी।
सचिन ने कहा कि बड़े भाई से बात करके मैं अपने फार्महाउस पर चला गया। तभी मुझे सर विव का फोन आया। उन्होंने कहा कि अभी तुम्हारे अंदर काफी क्रिकेट बचा है। हमने करीब 45 मिनट बात की। यह बातचीत दिल को सुकून पहुंचाने वाली थी क्योंकि जब आपका आदर्श आपको फोन करता है तो इसके बेहद खास मायने होते हैं। उनसे फोन पर बात करने के बाद से मैंने सन्यास का इरादा बदल दिया। और उसके बाद से मेरे प्रदर्शन में भी सुधार होता गया।
वहीं कार्यक्रम में मौजूद रिचर्ड्स ने कहा कि मुझे हमेशा से सचिन में विश्वास था।

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