कांग्रेस के झूठे वायदों पर जनता को भरोसा नहीं : नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री ने लालपुर में विशाल आमसभा को किया संबोधित प्रत्येक मतदाता से मतदान करने की जा रही अपील जीका बुखार से बचाव के लिए सावधानी बरतें चिल्ड्रन होम में गार्ड द्वारा बच्चों नशीली दवा देने के मामले में हाईकोर्ट ने शासन से मांगा जवाब पीएम मोदी का खुला चैलेंज पहले 4 पीढ़ियों का हिसाब दो, मैं तो 4 साल का हिसाब दे रहा हूं इमली के बीज में छिपा है चिकनगुनिया का इलाज: आईआईटी वैज्ञानिक गेहूं की बुआई के लिए खेतों में पानी ना होने से संकट में 3 हजार किसान bhopal क्राईम ब्रांच कार्यालय के सामने से कार चोरी तेज रफ्तार कार ने बाईक को मारी टक्कर, एक की मौत दुसरा घायल सिग्नेचर ब्रिज पर निर्वस्त्र होने का वीडियो वायरल
Home / दिल्ली / दिल्ली में पैदल चलना खतरनाक, मरने वालों की तादाद 10 फीसदी बढ़ी

दिल्ली में पैदल चलना खतरनाक, मरने वालों की तादाद 10 फीसदी बढ़ी

नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली की सड़कों को सुरक्षित बनाने की मुहिम में लगी तमाम सरकारी और गैर-सरकारी एजेंसियों और स्वयंसेवी संस्थाओं की मुहिम को एक तगड़ा झटका लगा है। दिल्ली की सड़कें राहगीरों के लिए पहले से भी ज्यादा खतरनाक बन गईं हैं। दिल्ली में सड़क हादसों में राहगीरों की मौत के मामलों में इस साल करीब १० फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे खासतौर पर डब्लूएचओ की उस मुहिम को झटका लगा है, जिसके तहत २०२० तक दिल्ली समेत पूरे देश में सड़क हादसों में ५० प्रतिशत तक की कमी लाने और सड़कों को राहगीरों और साइकल सवारों के लिए सुरक्षित बनाने का लक्ष्य तय किया है। हालांकि डब्लूएचओ के लिए थोड़ी सी राहत की खबर यह जरूर रही है कि इसी साल दिल्ली में साइकल सवारों और टु वीलर सवारों की रोड क्रैश में मौतों के मामलों में कमी आई है, लेकिन सेल्फ हिट और अज्ञात वाहनों की टक्कर से होने वाली मौतों के मामलों में काफी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। हिट ऐंड रन के ज्यादातर मामलों में मरने वाले लोग राहगीर, साइकिल सवार या टु वीलर सवार ही होते हैं।
ट्रैफिक पुलिस से मिले ताजा आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में पिछले साल १५ सितंबर तक सड़क हादसों में जहां ४६९ राहगीरों की मौत हुई थी, वहीं इस साल १५ सितंबर तक यह तादाद बढ़कर ५१३ तक पहुंच गई है। यानी पिछले साल के मुकाबले इस साल ४४ राहगीरों की मौत ज्यादा हुई है। इस तरह राहगीरों की मौतों के मामले में इस साल करीब साढ़े ९ फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। राहगीरों की मौत के सबसे ज्यादा मामले रिंग रोड, आउटर रिंग रोड, एनएच-८, एनएच-२४, एनएच-१ जैसे हाईस्पीड सिग्नल फ्री कॉरिडोर्स पर सामने आए हैं, क्योंकि इन जगहों पर लोगों के सुरक्षित तरीके से पैदल सड़क पार करने के लिए फुट ओवरब्रिज, पैडस्ट्रियल सिग्नल, जेब्रा क्रॉसिंग, प्रॉपर लाइटिंग जैसी सुविधाओं का काफी अभाव है। सड़क हादसों में मरने वालों में दूसरी सबसे बड़ी तादाद साइकलिस्टों और टु वीलर सवारों की होती है, लेकिन ट्रैफिक पुलिस की सख्ती के साथ-साथ टु वीलर सवारों के बीच चलाए जाने वाले अवेयरनेस प्रोग्रामों के असर के चलते इस साल इन हादसों में कमी आई है। १५ सितंबर,२०१७ तक जहां सड़क हादसों में ५२ साइकिल सवारों की मौत हुई थी, वहीं इस साल (अब तक) ३९ लोगों की मौत हुई। वहीं ३७१ बाइक और स्कूटर सवारों की मौत हुई , वहीं इस साल यह आंकड़ा घटकर ३४० पर आ गया है।

Check Also

नाबालिग ने 5 वर्षीय बच्ची के साथ किया रेप

मुरादनगर (ईएमएस)। नाबालिग बच्चे ने एक मासूम को प्रलोभन देकर दुष्कर्म का शिकार बनाया है। …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *