अटल जी हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे: रीना भाटी, यादव वैवाहिक परिचय सम्मेलन के कार्यालय का हुआ उद्घाटन, क्यों आ रही है भाजपा के क्षेत्रीय कार्यालय से आवाजमानसिंह गोस्वामी ने अपना रिपीट वाला पन्ना खुलने से पहले ही बंद कर दिया, किस्सा आठ लाख के लोन का: सपा नेता को घुमा दिया बैंक वालों ने, लेखराज माहौर का अध्यक्ष बनने का सपना हुआ चकनाचूर, क्या कुसुम और अनीता में से बनेगी कोई एक भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष, सुल्लामल रामलीला कमेटी में आ गया फैसला, हो गया कमाल भाजपा महानगर कार्यालय के बाहर तख्त डालकर हुई बूथ समीक्षा, तुराबनगर की मार्केट में पहुंचे दो हजार के नकली नोट, करंट क्राइम ने दिया करंट खंभा लग गया तुरंत,
Home / अन्य ख़बरें / वोटों का खेल, कांग्रेस हो गई फेल

वोटों का खेल, कांग्रेस हो गई फेल

गाजियाबाद (करंट क्राइम)। कांग्रेस के लिए जीडीए बोर्ड का चुनाव लोकसभा से पहले उस सबक की तरह है जिससे उसे बहुत कुछ सीखना है। 25 वोटों वाले गेम में कांग्रेस फेल हो गई। यहां कांग्रेस का संगठन वाला दांव पूरी तरह फ्लाप रहा और कांग्रेस की एकता निगम के चुनाव में बिखर गई। कांग्रेस के साथ स्टोरी का ट्वीस्ट यह भी रहा कि उसे हराने के लिए भाजपा को प्रयास नहीं करने पड़े, क्योंकि इस काम को कांग्रेस के नेता और पार्षद ही बखूबी अंजाम दे रहे थे। कांग्रेस ने यहां से मिथलेश शर्मा को जीडीए बोर्ड चुनाव में उम्मीदवार बनाया था। खास बात यह रही कि कांग्रेस के पास 16 वोट थे और उसकी उम्मीदवार को 17 वोट मिले। लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव हार गई। दरअसल कांग्रेसी इस जीडीए चुनाव को लेकर पहले से ही एक दूसरे से उलझ रहे थे। कांग्रेस के पार्षद बैठक में वोट के बदले नोट मांग रहे थे और कांग्रेस महानगर संगठन एक बार भी अपने पार्षदों को अपने साथ बिठाकर अपनी रणनीति ही नहीं समझा पाया। कांग्रेस संगठन ने मिथलेश शर्मा को उम्मीदवार घोषित किया और कांग्रेस के 13 पार्षद मिलकर रजनीश चौधरी को अपना उम्मीदवार बनाकर ले आए। पार्षद रजनीश चौधरी के पक्ष में लामबंद हो गए और संगठन इस लामबंदी को तोड़ने में नाकामयाब रहा। बताते हैं कि पार्षदों ने बाकायदा रजनीश चौधरी का पर्चा तैयार कर लिया और दिल्ली ले जाने की तैयारी हुई। पार्षद जब तक अपने उम्मीदवार को दिल्ली ले जाते तब तक कांग्रेस के ही एक जाट और गुर्जर नेता ने कार से कार अड़ाकर पार्षदों के बनाए गए उम्मीदवार को ही हाईजैक कर लिया। कांग्रेसियों को जब निगम में भाजपा से लड़ना था तब कांग्रेसी एक-दूसरे से लड़ रहे थे। कांग्रेस निगम पार्षद दल के नेता जाकिर सैफी निगम में भूख हड़ताल पर हैं और कांगे्रस के ही सलीम सैफी उनमें कमियां निकाल रहे हैं। वह उनके बैनर में राहुल गांधी का फोटो ढंूढ रहे हैं और कांग्रेस संगठन का नाम न होने की वजह पूछ रहे हैं। अब जब सोमवार को कांग्रेस को संगठित होकर चुनाव लड़ना था, तब वह पूरी तरह बिखर गई। संगठन यहां फेल नजर आया और कांग्रेस के साथ खेल हो गया। कांग्रेस पहली ऐसी पार्टी बनकर उभरी,जहां संगठन पदाधिकारियों की उसके पार्षद नहीं सुन रहे और पार्षदों की राय संगठन नहीं ले रहा। कोई रणनीति नहीं, कोई सहयोगी नहीं और संगठन की रणनीति यहां पूरी तरह बिखर गई।

Check Also

किस्सा आठ लाख के लोन का: सपा नेता को घुमा दिया बैंक वालों ने

Share this on WhatsAppप्रमुख संवाददाता (करंट क्राइम) गाजियाबाद। अगर आपने किसी प्राइवेट या सरकारी बैंक …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *