प्राइस बढ़ाने के लिए वेदांता ने इंडियन ऑयल की क्रूड सप्लाई घटाई

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नई दिल्ली (ईएमएस)। वेदांता ने पिछले वर्ष अक्टूबर तक लगभग तीन महीनों के लिए इंडियन ऑयल को क्रूड ऑयल की सप्लाई कम कर दी थी। हालांकि, दोनों कंपनियों के बीच एक वर्ष के लिए ऑयल के रेट पर सहमति बनी थी। बावजूद इसके वेदांता ने सरकार के हस्तक्षेप के बाद ही सप्लाई आधिकारिक तौर पर आवंटित मात्रा पर बहाल की थी। सरकार देश में प्रोड्यूस होने वाले क्रूड ऑयल को रिफाइनरियों को उनकी लोकेशन, प्रोसेसिंग की क्षमता और ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स के आधार पर आवंटित करती है। ऑयल का प्रॉडक्शन करने वाली सभी सरकारी और प्राइवेट कंपनियों को वर्ष के लिए आवंटित मात्रा की सप्लाई करनी होती है। हालांकि, ऑयल प्रॉडक्शन करने वाली कंपनियां और रिफाइनरीज ऑयल के प्राइस का फॉर्मूला तय करने के लिए स्वतंत्र होती हैं। इसपर आमतौर पर वित्तीय वर्ष की शुरुआत में सहमति बनाई जाती है, लेकिन इस वर्ष वेदांता और आईओसी के बीच प्राइस को लेकर मोलभाव लंबा खिंचा इसकारण मध्य में ही सहमति बन सकी थी।
सूत्रों ने बताया कि अधिक प्राइस का दबाव डालने के लिए वेदांता ने आईओसी को सप्लाई में कमी कर दी थी। वेदांता प्राइवेट रिफाइनरी कंपनियों को भी सप्लाई करती है जो आमतौर पर सरकारी रिफाइनरियों की तुलना में ऑयल का अधिक रेट देती हैं। इससे वेदांता को प्राइवेट रिफाइनरियों को सप्लाई करने से अधिक फायदा मिलता है।
केयर्न ऑयल एंड गैस, वेदांता लिमिटेड के सीईओ सुधीर माथुर ने बताया, हम अपने सभी कस्टमर्स को लेकर प्रतिबद्ध हैं। प्राइसिंग और वॉल्यूम को स्टेकहोल्डर्स के लिए बेहतर रिजल्ट हासिल करने के उद्देश्य से तय किया जाता है। वेदांता से जुड़े सूत्रों ने कहा कि सरकार के साथ प्रॉडक्शन कॉन्ट्रैक्ट में ऑयलफील्ड की ऑपरेटर को रेवेन्यू अधिकतम करने के लिए कहा जाता है, जिस ऑयल को रिफाइनरी को कम प्राइस पर बेचकर हासिल नहीं किया जा सकता। ऑयलफील्ड के अधिक रेवेन्यू से सरकार की आमदनी में भी वृद्धि होती है।