बिशपों की नियुक्तियों के लिए वेटिकन ने चीन के साथ की सुलह

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वेटिकन सिटी (ईएमएस)। दुनियाभर में स्थापित कैथोलिक चर्चों का संचालन वेटिकन से होता है। चीन में बिशप की नियुक्ति पर कम्युनिस्ट देश के साथ ऐतिहासिक समझौते की शनिवार को घोषणा की जिससे दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले देश और कैथोलिक चर्च के बीच संबंधों के सामान्य होने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। चीन ने तुरंत कहा कि उसे संबंध बेहतर होने की उम्मीद है जबकि ताइवान ने कहा कि चीन के साथ समझौते के बावजूद वेटिकन के साथ संबंध सुरक्षित हैं। चीन में तकरीबन एक करोड़ 20 लाख कैथोलिक सरकार की ओर से संचालित एक एसोसिएशन और एक गैर सरकारी चर्च के बीच विभाजित हैं। ये गैर सरकारी चर्च वेटिकन के प्रति निष्ठा रखता है। एसोसिएशन के तहत आने वाले चर्च के पादरियों की नियुक्ति चीन की कम्युनिस्ट पार्टी करती है।
वेटिकन के कम्युनिस्ट पीपुल्स रिपब्लिक की स्थापना के दो साल बाद 1951 से ही चीन के साथ कूटनीतिक संबंध नहीं है। वेटिकन ने एक बयान में कहा कि चीन के साथ प्राथमिक समझौता सावधानीपूर्वक की गई बातचीत की लंबी प्रक्रिया के बाद हुआ है। वेटिकन के प्रवक्ता ग्रेग बुर्के ने लिथुआनिया की राजधानी में पत्रकारों से कहा कि इस समझौते का मकसद राजनीतिक नहीं बल्कि पादरी संबंधी है। इसका मकसद कैथोलिक के लिए ऐसे बिशप नियुक्त करना है जो रोम से जुड़े हों, लेकिन साथ ही उन्हें चीनी अधिकारियों से मान्यता मिली हो। वेटिकन दुनिया के उन 17 देशों में से एक है जो बीजिंग के बजाय ताइपे को मान्यता देता है, लेकिन पोप फ्रांसिस ने 2013 में पदभार संभालने के बाद से ही चीन के साथ संबंध सुधारने का आह्वान किया है।