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अगस्त में भी वैक्सीनेशन को नहीं मिल पाएगी रफ्तार

नई दिल्ली। देश में बन रहे दो कोरोना रोधी टीकों के बाजार में आने में अपेक्षित समय से थोड़ी देरी हो रही है। इसी प्रकार फाइजर की तरफ से भी अभी भारत को टीके की बिक्री को मंजूरी प्रदान नहीं की गई है। इसके चलते अगस्त-सितंबर से टीकाकरण कार्यक्रम के रफ्तार पकड़ने के आसार नहीं हैं। हालांकि सरकार की कोशिश है कि अगस्त महीने में कम से कम 18 करोड़ खुराक उपलब्ध हो सकें। जुलाई महीने में टीके की उलब्धता करीब 13.50 करोड़ के करीब है। इसमें कोविशील्ड, कोवैक्सीन तथा स्पूतनिक वी शामिल हैं। पूर्व में सरकार की योजना के तहत जुलाई में जायडस कैडिला और अगस्त में बायोलाजिकल ई के टीके की उपलब्धता शुरू होने का अनुमान व्यक्त किया गया था। लेकिन इन दोनों टीकों के आने में विलंब हो रहा है। पिछले महीने चार जून को नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पाल ने नियमित प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि जायडस कैडिला के तीसरे चरण के परीक्षण पूरे हो चुके हैं तथा दो सप्ताह के भीतर कंपनी मंजूरी के लिए आवेदन करेगी। इससे नतीजा निकाला गया था कि जुलाई मध्य से टीका उपयोग के लिए मिलना शुरू हो जाएगा। हालांकि कंपनी ने जुलाई के शुरू में आपात मंजूरी के लिए आवेदन कर दिया है लेकिन खबर है कि नियामक आंकड़ों से संतुष्ट नहीं है तथा और आंकड़े मांगे गए हैं। जो अभी कंपनी को उपलब्ध कराने हैं। इसलिए इस महीने अब टीके के आने के आसार खत्म हो गए हैं। यदि सबकुछ ठीक ठाक चला तो अगस्त मध्य या फिर सितंबर से ही ठीक मिल पाएगा। इससे प्रतिमाह 2-3 करोड़ टीके मिलने की उम्मीद थी। सरकार ने बाकायदा ऐलान किया था कि अगस्त से बायोलाजिकल ई का टीका उपलब्ध हो जाएगा। अगस्त और दिसंबर के बीच 30 करोड़ टीकों की खरीद का आर्डर और 1500 करोड़ रुपये भी कंपनी को पेशगी दिए जा चुके हैं। लेकिन अभी अंतिम चरण के आंकड़े एकत्र हो रहे है। उसके बाद कंपनी मंजूरी के लिए आवेदन करेगी। यह प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है इसलिए बहुत तेजी से भी करेंगे तो सितंबर से ही टीका इस्तेमाल के लिए उपलब्ध हो पाएगा। हाल में स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि सितंबर आखिर या अक्तूबर से बायोलाजिकल ई का टीका उपलब्ध हो सकेगा। कंपनी से प्रतिमाह 5-7 करोड़ टीके मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य मंत्रालय अगस्त में 18 करोड़ टीके उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है। इसमें कोविशील्ड की 12 करोड़, कोवैक्सीन की 3.5 डोज शामिल हैं। जबकि स्पूतनिक की आयातित और देश में उत्पादित डोज और सिप्ला के जरिए मिलने वाली मॉडर्ना की डोज मिलाकर करीब ढाई करोड़ हो सकती हैं। यदि अगस्त में 18 करोड़ डोज उपलब्ध भी होती हैं तो रोजाना 60 लाख डोज ही लग पाएंगी जो अभी 40 लाख के करीब है। इससे दिसंबर तक 94 करोड़ लोगों को दोनों डोज तो नहीं मिल पाएंगी लेकिन सभी लोगों को एक डोज का लक्ष्य हासिल हो सकता है। अभी तक 44 करोड़ खुराक दी जा चुकी हैं। अगले पांच महीनों में 18 करोड़ खुराक भी प्रतिमाह दी जाती हैं तो 90 करोड़ खुराक और दी जाएंगी। हालांकि देरी से ही सही सितंबर अक्तूबर से नए टीकों की उपलब्धता निश्चित है।

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