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ग़ाजियाबाद

जुबान संभाल के (16/04/2021)

सरकारी कार और गनर भी वापिस मंगा ले वों

भगवा सरकार में तकरार का नया सीन देहात चुनाव में निकलकरआया हैं। जो कल तक जनरली स्पेशल थे वो भी सस्पेंड हो गये और जो प्रथम लेडी नागरिक आफ जिला थी वो भी सस्पेंड विद हसबैंड हो गई। चुनाव तो लड़ा गया और पूरे गाजे बाजे के साथ लड़ा गया। सस्पेंड वाले तो खामोश हैं पर सर्मथकों से लेकर घर कुनबे का जोश जुबान संभालते संभालते भी थम नही रहा हैं। सवाल फिर से बहाल को लेकर चला तो जोरदार ठहाका सर्मथक ने ही लगाया। साफ कहा कि हम पर तो बहार ही बाहर होने के बाद आयेगी जो अदंर हैं वो बता दे कि कौन सी सरकार वाली मौज ले ली। चौकी वाले तो मामूली झगड़े में तो इनके कहने से एक आदमी नही छोड़ते और सरकारी अस्पताल में सिफारिश के बाद ना इजेंक्शन लगवाने की औकात ना टेस्ट कराने की औकात। फिर तंज वाले लहजें में कहा कि जिसने सस्पेंड किया हैं उससे कहना कि वो सरकारी कार और गनर भी तो वापिस मंगा ले जो हमें सरकार ने दे रखे थे ,बगंला भी खाली कर देंगें । सस्पेंड तो ऐसे किया हैं जैसे वेतन भत्ते दे रहे थे हमें। देना दवाना कुछ नही और नखरे तौबा तौबा।

कांग्रेस ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष हैं शर्मा जी

हाथ वालो की महिमा तो गजब ही रहती हैं। कपड़ो के ऊपर जनेऊ देख रही भाजपा को खबर हो कि वो जनेऊ और गंगा स्नान पर अटकी हैं और गोत्र पूछ रही हैं और इधर गंगा में बहुत पानी बह गया हैं। प्रभाव अब टाप से बाटम तक आया हैं। लिहाजा कांग्रेस ने जब अपने ओबीसी नेताओं को पद दिये तो एक महानगर अध्यक्ष उसने शर्मा जी को भी बनाया हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पिछड़ा वर्ग विभाग ने ऐसा कमाल किया हैं। मिर्जापुर की धरती से ये कमाल हुया है और यहां से जयशकंर शर्मा को पिछड़ा विभाग का जिला अध्यक्ष बनाया गया हैं। हो सकता है कि शर्मा जी का गोत्र पिछड़ा वर्ग से आता हो। वैसे गांधी भी तो कांग्रेस में आकर ओबीसी हो गये है तभी तो मिर्जापुर शहर से सत्यप्रकाश गांधी को पिछड़ा वर्ग विभाग का अध्यक्ष ही बनाया गया है। विपक्षबतायेंअगर उसके पास ओबीसी शर्मा और गांधी हो तो

नीली पालिटिक्स में अब उन्हे स्कोप नही दिख रहा

जो विधिवत बसपा के नेता कहलाते थे और इस कदर कहलाते थे कि उनके चंदाजीवी सर्मथक उन्हे मंचो से बौद्व कहने लगे थे अब लगता है कि उन्हे ये बोध हो गया है कि नीली पालिटिक्स में स्कोप नही हैं। जुबान से कुछ नही कह रहे हैं लेकिन लहजे बता रहे हैं कि कुछ तो खिचड़ी पक रही हैं जरूर। पहले ये होप थी कि सूबे में सरकार आ जायेगी तो वो नही हुया। बताते हैकि सरकार तो नही आई लेकिन कारोबार में आफत जरूर आ गई थी और नीली फोर्स काम नही आई और पर्सनल सोर्स से कारोबार को संभाला गया दल वाले बता रहे हैं कि नीली पालिटिक्स में उन्हे स्कोप नही दिख रहा है। अब तो बस मौका देखकर राष्टÑवाद के सागर में सियासी नाव उतारी जानी है

सिफारिश पर पार्षद ने दिया पूर्व मंत्री का उदाहरण

कोरोना लहर का कहर चल रहा हैं और सबसे बैड बात ये है कि अस्पतालों में बैड नही मिल रहे हैं। वेंटीलेटर खाली नही हैें और लोग सरकार से ही उपचार के लिये गुहार लगा रहे हैं। मगर जनता तो परेशान हैं और उसे जो दर नजर आ रहा है उसी पर जा रहे हैं। सरकार वाले दल के नामित पार्षद ने कभी किसी से कहा था कि ये इलेक्टिड मेंबर क्या होते हैं हमारे सामने। ये एक वार्ड के पार्षद और हम पूरे महानगर के हैं । अब जब पब्लिक के एक आदमी का काम पड़ा तो वो नामिनेट के घर गया और उससे कहा कि हमारे फंला रिलेटिव को अस्पताल में भर्ती करा दो। नामित मेंबर ने पहले तो कई जगह फोन मिलाये और हाथ जोड़ लिये। पब्लिक के आदमी ने याद दिलाया कि आप तो पूरे महानगर के पार्षद हों। पार्षद ने भी कह दिया कि तीन बार सरकार में मंत्री रहे की तो चल ना रही और हम क्या हैं भाई। मैं तो जितनी ताकत लगा सकता था उतनी ताकत तेरे सामने ही तेरे लिये लगाई हैं भाई।

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