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ग़ाजियाबाद

जुबान संभाल के (23/02/2021)

हो जाये जांच तो कर लेगे सब डासना जेल का सफर

मकान वाले महकमें में खेल तो इतना बड़ा है कि ढंग से जांच हो जाये तो साहब से लेकर अर्दली तक डासना जेल का सफर कर लेगें। जिस योजना के साथ पीएम आवास योजना का नाम जुड़ा हैं और डीएम तक निगरानी हैं उस महकमें में मकानो की चाबी किसे मिलनी हैं इसका फैसला एक बाबू कर देता है। दलाल प्राईवेट कर्मचारी बनकर यहां सीटो पर काबिज हो गये हैं। महकमें के साहब से लेकर वीआईपी बाबू तक भ्रष्टाचार का गुलाब महक रहा हैं। जो पार्षद निगम में भ्रष्टाचार का मुददा उठाते हैं उन्हे क्या इस महकमें में मकानो के नाम पर गरीबो का हर प्रकार से होता ये शोषण नही दिखता क्या। त्यागी जी से लेकर मित्तल जीतक कभी इस महकमें में इतना ही जाकर देख ले कि सीटो पर बैेठकर काम रहे कितने लोग वास्तव में इसी विभाग के कर्मचारी हैं। कभी तो पीएमओ वाले ही इस बात का संज्ञान ले ले कि मकानो के नाम पर खुला खेल गाजियाबादी हो कैसे रहा हैं। नगर निगम की चूले हिल जायेगी वो सच यहां से सामने निकलकर आयेगा।

चपरासी बता देगा किसे मिलेगा किस काम का टेंडर

भाज΄ाा ने चुनाव में शमशान घाट का मुददा उठाया था और अब जीतने के बाद सरकार में यही शमशान घाट सरकार के लिये रोज एक सिरदर्द पैदा कर रहा हैं। उखलारसी शमशान घाट के लैंटर ने बता दिया कि कमीशन कम ना होगा और अब भगवागढ़ में तूफान उस शमशानघाट को लेकर मचा जिसका टेंडर होने से पहले ही ठेकेदार ने काम शुरू कर दिया। मीडियाई तूफान के बाद मेयर ने भी लैटर से मैटर पूछा और साथ में ये भी पूछा कि ठेकेदार को कैसे पता था कि उसे ही ठेका मिलेगा। अब मेयर के इस लैटर का मैटर जब ठेकेदारो में डिसकस हुया तो जोर का ठहाका गूंजा। कहने वाले ने कहा कि लो कर लो बात और सुन लो इनकी। वो तो ठेकेदार पर ही सारे फूल बरसाने की रीत हैं इधर वरना किसे ठेका मिलेगा ये तो साहब का चपरासी भी बता देगा। ठेकेदार अपनी मर्जी से लेबर और सामान लेकर नही पहुंच गया था वहां काम करने। उठाकर देख लो पुराने मामले पहले काम शुरू होता है बाद में टेंडर निकलता हैं। कई काम ऐसे मिल जायेगें और सीधे सीधे साहब और ठेकेदार का सच वाला आमना सामना करा दो पता चल जायेगा कि पहले साहब ने आदेश दिया या पहले ठेकेदार खुद अपनी लेबर लेकर पहुंच गया। ये बात भी चपरासी ही बता देगा महकमें का।

टीआरपी में कौन पिछवाड़े के लठठ या आंख के आंसू

फूल वाले तो आंसू एपीसोड के बाद मान रहे है कि हाथरस वाले लठ सीन से ये आंसू वाला मामला ज्यादा संगीन हो गया है। डैमेज कंटÞÑोल को लेकर अपने सियासी सूरमा मैदान में लगा दिये। चर्चा फूल वालोंं मे इस बात को लेकर है कि जब छोटे चौधरी के पिछवाड़े पर पुलिसिया लठठ बजे तो सीन इतना संगीन नही हुया था। हुया सो हुया वाले अदांज में भाजपा ने ना भेजा एक भी जाट नेता गांव में कि जाकर बिरादरी वालो को समझाओं। मगर सिसौली वाले चौधरी की आंख में आंसू आते ही इमोशन का तूफान आ गया। सारे भगवा चौधरी दिल्ली मे तलब हो गये और फरमान जारी हुया कि गांवो में फैल जाओ और बिरादरी को समझा कर ही लौेटना। चौपाल से लौट कर ही चाय पर चर्चा थी कि हमारी तो समझ में ये ना आ रहा कि टीआरपी में टाप कौन चल रहा हैं सही मे तो। पिछवाड़ेके पुलिसिया लठठ या आंख के आंसू। क्योकि जब वो बात करते हैं तो बताना नही भूलते कि ऐसा मिसबिहेव तो मैडम नीली ंऔर साईकिल सरताज हकुूमत में भी ना हुया शुगर बेल्टके जाटो पर भाई।

गुरू जी मास्टर जी वाली पालिटिक्स खत्म

सियासत कभी मास्टरो और वकीलो के नाम थी। लेकिन अब मास्टरों की पालिटिक्स फिनिश हो गई है। गुरूजी से लेकर मास्टर जी तक सीन वेटिंग का ही चल रहा है। एक सिरे से नाम गिनाये और बता दिया कि पालिटिक्स अब मास्टरो का नही कालेज मालिको की हो गई है।

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