Current Crime
अन्य ख़बरें ग़ाजियाबाद दिल्ली एन.सी.आर

गांधी और विश्वनाथ ले गए कलैक्ट्रेट की तीन सरकारी कार

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। आम तौर पर कलैक्ट्रेट में सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रहती है। हालाकि यहां से पहले भी कई वाहन जा चुके हैं। इस बार तो कलैक्ट्रेट के सरकारी वाहन ही दिल्ली वाले ले गए। खास बात ये है कि अपने वाहनों को देने के लिए खुद कलैक्ट्रेट वालों ने उन्हें बुलाया था। दरअसल कलैक्ट्रेट में तीन सरकारी वाहन ऐसे थे जिनका कभी प्रशासन में जलवा होता था। अधिकारियों के लाव लश्कर के साथ यही गाड़ियां दौड़ा करती थीं। इन गाड़ियों के नम्बर का भी रौब होता था। इनपर नीली बत्ती लगा करती थी। इन कारों को चलाने वाले चालकों का प्रशासन के गलियारों में रूतबा था। साहब कहां गए हैं, साहब ने क्या कहा और साहब का मूड कैसा है ये इन वाहनों के चालकों से बेहतर कोई नहीं जानता। समय की गर्द इन वाहनों पर चढ़ गयी। बहरहाल अब कलैक्ट्रेट के इन वाहनों को गांधी और विश्वनाथ ले गए हैं। 1996 मॉडल की जिप्सी नम्बर यूपी 14 ई-7374, 38 हजार रूपए में बिक गयी। 1998 मॉडल की जिप्सी नम्बर यूपी 14 एजी-3880 भी 38 हजार में बिकी। वर्ष 2008 मॉडल की एम्बेस्डर कार नम्बर यूपी 14 एजी-0350, 27 हजार रूपए में बिकी। कबाड़ हो चुकी इन कारों को दिल्ली के लोगों ने खरीदा। दोनों जिप्सी दिल्ली के कुलदीप गांधी और विश्वनाथ कपूर ने खरीदीं। एम्बेसडर कार आसिफ खान ने खरीदी। कभी कलैक्ट्रेट के ये वाहन शान से दौड़ा करते थे। अब ये वाहन चलने लायक तो नहीं रहे लेकिन तुलने लायक रह गए थे।
गोला बाबू का प्रयास कबाड़ हो गया साफ
कलैक्ट्रेट में नाजिर के पद पर तैनात संतराम गोला को लोग गोला बाबू के रूप में ज्यादा जानते हैं। सही में केन्द्र और प्रदेश सरकार के स्वच्छता अभियान को कलैक्ट्रेट में गोला बाबू ने ही अमलीजामा पहनाया है। उनके प्रयास से ही यह कबाड़ साफ हो सका है। वह इसके लिए प्रयास रत थे और बड़ी बात यह है कि कलैक्ट्रेट से कबाड़ भी साफ हुआ और कलैक्ट्रेट को आय भी हुई। इससे पहले गोदाम में रखा कबाड़ हो चुका गढ़ मेले का टैंट, पुराने कम्प्यूटर व अन्य कबाड़ भी 86 हजार रूपए में गोला बाबू के प्रयास से ही बिक सके थे। कबाड़ भी साफ हो गया और सरकारी खजाने में पैसे भी आ गए।

Related posts

Current Crime
Ghaziabad No.1 Hindi News Portal
%d bloggers like this: