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उत्तर प्रदेश ग़ाजियाबाद

व्यापारियों ने ही कहा था जमीन को कॉमर्शियल कर दो सरकार

उसी के बाद जीडीए ने भेजा था प्रमुख सचिव आवास को प्रस्ताव

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। शहर के कई रास्तों पर बने मकान अब कॉमर्शियल माने जाएंगे। जीडीए ने यह प्रस्ताव प्रमुख सचिव आवास को भेजा। प्रमुख सचिव शहरी नियोजन को भेजे गए इस प्रस्ताव में जीडीए ने बताया था कि गाजियाबाद महायोजना 2021 में कुछ रास्तों पर नक्शा आवासीय में पास है, लेकिन यहां पर कॉमर्शियल निर्माण हुआ है। जीडीए ने ऐसी कॉलोनी बताई थी और बरेली फॉर्मुले का जिक्र किया था। इसके बाद जनरल वीके सिंह ने एक पत्र नगर विकास मंत्री को लिखा और कहा कि जीडीए से सबंधित जोनिंग रेगुलेशन तथा भवन निर्माण और विकास उपविधि में आंशिक संशोधन कर मुख्य मार्गों पर कॉमर्शियल निर्माण वैध कर दिया जाए। अब यह पता चला है कि जीडीए और जनरल तो सड़क के दोनों और बने मकानों को आवासीय से कॉमर्शियल कराने के सीन में बाद में आए हैं, यह काम तो खुद गाजियाबाद के व्यापारियों ने किया। जीडीए वीसी ने जो पत्र प्रमुख सचिव आवास को लिखा उसमें इस बात का जिक्र है कि जनवरी महीने में ही व्यापारी सरकार से कह चुके थे कि बाजारों को कॉमर्शियल कर दिया जाए। यह काम जिला व्यापार बंधु गाजियाबाद की बैठक में 17 जनवरी को ही हो गया था। व्यापारियों की प्रार्थना पर ही निर्देशित किया गया था कि मुख्य मार्गों पर कॉमर्शियल निर्माण वैध किए जाने के संबंध में शासन को रिमाइंडर भेजा जाए। व्यापार बंधु की बैठक में जनवरी में फैसला लिया गया था और मार्च में शासन के पास पत्र पहुंच चुका था।

बजरिया से लेकर नेहरू नगर तक होगा स्ट्रीट बाजार

महायोजना में छह रास्ते ऐसे हैं जो बदलेंगे इनमें पुराने शहर से लेकर शास्त्रीनगर, कविनगर इलाके शामिल हैं। मेरठ रोड से पुराने बस अड्डे के चौराहे तक दोनों ओर की जमीन कॉमर्शियल होगी। पुराने बस अड्डे के चौराहे से चौधरी मोड़ तक पूर्व दिशा में और जीटी रोड पर हापुड़ मोड़ से लेकर रेल आरओबी तक दोनों ओर कॉमर्शियल जमीन होगी। घंटाघर से रेलवे रोड और बजरिया के दोनों तरफ कॉमर्शियल यूज होगा। तुराबनगर अम्बेडकर रोड से रमते राम रोड तक और घंटाघर से सिहानी गेट तथा दिल्ली गेट से डासना गेट तक दोनों ओर कॉमर्शियल जमीन होगी। जीडीए के प्रस्ताव पर पूरी सहमति बनी तो पटेल नगर, शास्त्रीनगर, नेहरू नगर, लाजपत नगर से लेकर राजेंद्रनगर, इंदिरापुरम, वैशाली की कई इलाकों की जमीन रिहायशी ना होकर कॉमर्शियल हो जाएगी।

आवास भू-उपयोग में इन प्रतिबंधों के साथ लागू होगा कॉमर्शियल सिस्टम

जीडीए ने बरेली और दिल्ली विकास प्राधिकरण के फॉर्मुले का उदाहरण दिया है और यहां पर ये बताया गया है कि दिल्ली महायोजना में मिश्रित भू-उपयोग में कुछ क्रियाएं वैध नहीं की गई है, जिनमें बिल्डिंग मैटिरियल के काम, वर्कशॉप, गोदाम, शराब की दुकान और प्रिंटिंग प्रेस हैं। जीडीए भी चाहता है कि गाजियाबाद महायोजना के जोनिंग रेगुलेशन में आवासीय भू-उपयोग में कुछ प्रतिबंध लगाए जाएं और तभी कॉमर्शियल निर्माण वैध किया जाए। यह कार्रवाई उन्हीं योजनाओं में प्रस्तावित की जाए जिन योजनाओं का नक्शा 2000 से पहले का हो। प्राधिकरण की योजनाओं के अलावा भी यह प्रावधान 24 मीटर और उससे अधिक चौड़े रास्ते पर लागू हो। यदि जमीन प्राधिकरण की योजना का हिस्सा है तो फिर यह उन्हीं योजनाओं में लागू की जाए जहां प्राधिकरण की अवशेष कॉमर्शियल जमीन ना हो। ऐसे कॉमर्शियल निर्माण केवल ग्राउंड फ्लोर पर ही वैध किए जाएं और दूसरे फ्लोर पर आवासीय निर्माण ही स्वीकृत किया जाएगा।

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