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दलित छात्र की आत्महत्या को लेकर प्रदर्शन, केंद्रीय मंत्री पर मामला दर्ज

हैदराबाद/नई दिल्ली| हैदराबाद विश्वविद्यालय के एक दलित शोध छात्र की आत्महत्या के खिलाफ विश्वविद्यालय और दिल्ली में प्रदर्शन हुए। इस मामले में पुलिस ने केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय, विश्वविद्यालय के कुलपति अप्पा राव और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के दो नेताओं पर मामला दर्ज किया है। इन सभी पर छात्र को आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति-जनजाति (उत्पीड़न निवारण) अधिनियम के उल्लंघन का आरोप है। दलित छात्र रोहित वेमुला ने विश्वविद्यालय के छात्रावास के कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। घटना के खिलाफ हैदराबाद के केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्रदर्शन शुरू हो गए। दिल्ली में भी छात्रों ने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी के दफ्तर के घेराव की कोशिश की। छात्रों ने बैरिकेड तोड़ दिया। पुलिस ने पानी की बौछार से इन्हें तितर-बितर किया। कई छात्र गिरफ्तार किए गए हैं। इन छात्रों के हाथ में बाबा साहेब अंबेडकर के चित्र थे। ये सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए पुलिस से भिड़ गए।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने आत्महत्या के मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति बनाई है। समिति दो दिन में अपनी रपट देगी।

स्मृति ईरानी ने रोहित के घरवालों के प्रति संवेदना जताई है। उन्होंने घटना पर सिर्फ इतना ही कहा कि उनके मंत्रालय का केंद्रीय विश्वविद्यालयों पर कोई प्रशासनिक नियंत्रण नहीं है।

हैदराबाद में विश्वविद्यालय परिसर में तनाव बना हुआ है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने पोस्टमार्टम के लिए रोहित का शव लेने पहुंची पुलिस को भी रोकने का प्रयास किया। वे ‘पुलिस लौट जाओ’ के नारे लगा रहे थे। उन्होंने शव को कमरे में बंद कर दिया था। उनका कहना था कि कुलपति को बुलाया जाए।

पुलिस ने छात्रों पर काबू पाने के लिए लाठियां भाजीं। आठ छात्रों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए उस्मानिया अस्पताल पहुंचाया।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी और समाज अध्ययन विभाग के द्वितीय वर्ष के शोध छात्र रोहित वेमुला (28) को रविवार रात शोध छात्रों के छात्रावास में अपने दोस्त के कमरे में छत से लटकता पाया गया था।

पिछले साल अगस्त में एबीवीपी कार्यकर्ताओं से झड़प के कारण अम्बेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एएसए) से संबद्ध पांच दलित छात्रों को निलंबित कर छात्रावास से निकाला गया था। रोहित इनमें से एक था।

इन छात्रों को उनके छात्रावास से दिसंबर में निष्कासित कर दिया गया था। उन्हें विश्वविद्यालय परिसर में स्थित छात्रावासों और अन्य इमारतों में जाने से रोक दिया गया था। उन्हें सिर्फ अपने विषय से संबंधित कक्षा, पुस्तकालय, सम्मेलनों और कार्यशालाओं में जाने की अनुमति थी।

अम्बेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन वेमुला और चार अन्य छात्रों के निष्कासन के खिलाफ बीते 15 दिनों से प्रदर्शन कर रहा था। उसका कहना था कि ये ‘भेदभाव’ और ‘सामाजिक बहिष्कार’ के खिलाफ प्रदर्शन है।

गुंटूर के गरीब परिवार से संबंध रखने वाले रोहित ने छह पन्ने का सुसाइड नोट छोड़ा है जिसमें उसने लिखा है कि उसकी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है।

रोहित ने लिखा है, “मैं हमेशा एक लेखक बनना चाहता था। विज्ञान का लेखक, जैसे कार्ल सैगन। आखिर में, बस यही एक पत्र है जिसे मैं लिख सका।”

रोहित की मां राधिका ने छात्रों और कई दलित संगठनों के नेताओं के साथ विश्वविद्यालय में धरना दिया। उनका कहना था कि कुलपति को बुलाया जाए और वह बताएं कि उन्होंने उनके बच्चे को क्यों निलंबित किया था।

विभिन्न छात्र समूहों की संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) ने कहा कि वेमुला निलंबन और निष्कासन के कारण काफी निराश था। जेएसी का कहना है कि परिसर में दक्षिणपंथी समूहों के बढ़ते प्रभाव की वजह से यह घटना हुई। जेएसी के एक नेता ने कहा कि बीते पांच साल में नौ दलित छात्र खुदकुशी कर चुके हैं।

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री दत्तात्रेय और कुलपति के साथ एबीवीपी के नेताओं, सुशील कुमार और विष्णु के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। मामला साइबराबाद पुलिस कमिश्नरी क्षेत्र के गचिबावली थाने में दर्ज किया गया है।

गचिबावली थाने के पुलिस अफसर ने आईएएनएस से कहा कि जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बंडारू दत्तात्रेय ने सोमवार को कहा कि हैदराबाद विश्वविद्यालय में पांच दलित छात्रों के निलंबन से न तो उनका कोई संबंध है और न ही उनकी भारतीय जनता पार्टी का।

लेकिन, मंत्री ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजे अपने उस पत्र का बचाव किया जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में ‘राष्ट्र विरोधी’ और ‘समाज विरोधी’ तत्वों की गतिविधियों की जानकारी दी थी।

दत्तात्रेय ने अपने खिलाफ दर्ज मामले पर कुछ भी कहने से मना कर दिया।

तेलंगाना राष्ट्र समिति की सांसद के.कविता ने आरोप लगाया कि दो केंद्रीय मंत्रियों के दबाव की वजह से कुलपति ने पांच दलित शोध छात्रों को निलंबित किया।

कांग्रेस प्रवक्ता आर.पी.एन.सिंह ने नई दिल्ली में दत्तात्रेय को मंत्री पद से हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि मंत्री के साथ कुलपति को भी हटाया जाए।

विवाद की शुरुआत बीते साल अगस्त में हुई थी। यह मामला दिल्ली विश्वविद्यालय में ‘मुजफ्फरनगर बाकी है’ वृत्तचित्र की स्क्रीनिंग पर एबीवीपी के हमले के बाद शुरू हुआ। एएसए ने एबीवीपी के इस कदम की निंदा करते हुए इसके विरोध में परिसर में प्रदर्शन किया था। एबीवीपी के सुशील कुमार ने बाद में शिकायत दर्ज कराई थी कि एएसयू कार्यकर्ताओं ने उन्हें पीटा है। एएसयू ने इसे गलत बताया था।

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