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कोरोना और बढ़ती कीमतों से फीकी पड़ी स्टील कारोबार की चमक, डर कर काम कर रहे हैं ट्रेडर्स

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन की वजह से बाजार में मंदी है और इससे स्टील का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अब देश भर में स्टेनलेस स्टील के दाम बढ़ने का असर दिल्ली में भी महसूस किया जा रहा है। यहां के ट्रेडर्स भी अभी डर-डर के काम कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि अगर आगामी त्योहारों के दौरान कोरोना की तीसरी लहर आई तो कामकाज को लेकर बची-खुची उम्मीदों पर भी पानी फिर जाएगा। वैसे ही स्टील से जुड़े कारोबारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
ईस्ट दिल्ली स्थित कृष्णा नगर में स्टेनलेस स्टील फेब्रिकेशन के कारोबारी मनदीप गोयल ने बताया कि अभी स्टील के रेट्स में काफी तेजी है। इसके दाम बढ़ते हैं, जो मुनाफा भी देते हैं, लेकिन ये अचानक गिरते भी हैं। स्टेनलेस स्टील के बड़े प्लेयर्स को रेट्स के बारे में ज्यादा मालूम होता है। जब उन्हें लगता है कि अगले 3 से 4 दिनों में रेट 5 से 10 रुपए किलो बढ़ेंगे, तो वे सेल होल्ड कर देते हैं।
इससे छोटे व्यापारी को माल मिलने में दिक्कत होने लगती है। कोविड महामारी के दौर में वैसे ही स्टेनलेस स्टील में फेबिक्रेशन बिजनेस अभी डाउन चल रहा है। कोविड लॉकडाउन में काम पूरी तरह बंद रहा। कोई घर का रेनोवेशन या नया घर बनाता है, तभी स्टेनलेस स्टील के प्रॉडक्ट्स की जरूरत पड़ती है। उसमें भी फिनिशिंग के दौरान स्टेनलेस स्टील के गेट, रेलिंग, खिड़की आदि लगते हैं। अभी लोगों के पास पैसों की कमी है, तो मकान बनने की स्पीड धीमी है। नए प्रोजेक्ट भी ठंडे बस्ते में है। किसी तरह पुराने निर्माणों को पूरा किया जा रहा है। दिल्ली-एनसीआर के कई बिल्डर्स भी संकट में हैं, जिसके प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हैं। इसका असर भी मार्केट पर पड़ता है। दिल्ली से बिहार, झारखंड, राजस्थान और कश्मीर जैसे राज्यों में भी स्टेनलेस स्टील भेजते हैं। अभी कई राज्यों में कोरोना की वजह से सख्ती लगी है, जिससे माल सप्लाई में कमी आई है।
डिप्टीगंज स्टेनलेस स्टील यूटेन्सल्ज ट्रेडर्स असोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी कृष्ण अग्रवाल का कहना है कि डेढ़ साल से कोरोना और बाजार बंद रहने के कारण स्टेनलेस स्टील में बर्तन का कारोबार भी लगभग ठप है। कोविड की वजह से पिछले दिनों ब्याह-शादियों पर सख्ती रही, तो उसका असर बिजनेस पर पड़ा। महामारी में सबकी जेब टाइट है। तीसरी लहर का भी खतरा लग रहा है। दिल्ली समेत आसपास के शहरों के कारोबारी भी घबरा रहे हैं। कोरोना की पहली वेव के बाद दो-तीन महीनों में काम रूटीन पर आ गया था।
मगर, दूसरी लहर ने जो तबाही मचाई है, उसके बाद लोग सहमे हैं। यदि सितंबर-अक्टूबर के फेस्टिव सीजन में कोरोना की तीसरी लहर आई और लॉकडाउन लगा, तो व्यापारी सड़क पर आ जाएंगे। जन्माष्टमी के बाद से त्योहार शुरू हो जाते हैं। नवरात्र, दशहरा, धनतेरस, दिवाली और गंगा दशहरे जैसे बड़े पर्व पर बिजनेस चलता है। शादियां भी 4 महीनों के लिए बंद हो गईं। मार्केट में कैश वाले कस्टमर्स की कमी है। बाहर से छोटे-बड़े खरीदार भी नहीं आ रहे। उधार वाले संशय में हैं कि कहीं पैसा न फंस जाए। स्टेनलेस स्टील के ट्रेडर्स बड़े मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं।
अब बहुत-सी जगहों पर स्टेनलेस स्टील का इस्तेमाल होने लगा है। घरों में गेट, विंडो, रसोई, रेलिंग और बाथरूम तक में स्टेनलेस स्टील का यूज हो रहा है। फर्नीचर भी स्टेनलेस स्टील से बन रहे हैं। मनदीप गोयल ने बताया कि यह थोड़ा महंगा जरूर होता है, लेकिन इसकी लाइफ अच्छी है। स्टील का टांका, लोहे के टांके के मुकाबले 3 गुना ज्यादा मजबूत होता है। स्टेनलेस स्टील का रख-रखाव भी आसान है। थोड़ा-सा कपड़ा रगड़ देने पर चमकने लगता है। जिस तरह घर के स्टील बर्तन सालों-साल चलते हैं, उसी तरह स्टेनलेस स्टील का सामान भी चलता है। आज से 10-15 साल पहले लोगों को लगता था कि स्टेनलेस स्टील का सामान पैसे वाले लोग लगाते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं है। बाजार में हर वेरायटी के डिजाइनर प्रॉडक्ट्स आ गए हैं।

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