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ग़ाजियाबाद

संगठन ने नहीं लगाई ड्यूटी या कुछ और थी मजबूरी अजय शर्मा को बंगाल से अच्छी लगी केरल वाली दूरी

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। भगवा गढ़ के भाजपा नेता आउट डोर चुनाव प्रचार के लिए फेमस हैं। लखनऊ से लेकर बस्ती तक इनकी चुनाव प्रचारकी हस्ती है। अब जब वेस्ट बंगाल से लेकर केरल तक चुनाव हो रहा है तो गाजियाबाद के लोकसभा सांसद से लेकर क्षेत्रीय संगठन पदाधिकारी वहां भाजपा का प्रचार कर रहे हैं। जनरल वीके सिंह केरल में हैं तो क्षेत्रीय उपाध्यक्ष मानसिंह गोस्वामी वेस्ट बंगाल में बूथ सूची बना रहे हैं। पूर्व क्षेत्रीय महामंत्री अशोक मोंगा और पूर्व क्षेत्रीय कार्यालय प्रभारी योगेश त्रिपाठी के बाद कोई ऐसा दिखा नहीं जो वेस्ट बंगाल में अपने बेस्ट प्रयास और प्रचार के लिए गया हो। किसी नेता ने अभी तक हावड़ा ब्रिज पर खड़े हुए, फ्लाईट से उतरते हुए, फ्लाईट के लिए जाते हुए, बंगाल के बाजारों से फोटो नहीं डाले हैं। अब जब पार्टी वोटों का रण लड़ रही है तो गाजियाबाद वालों के फोटो का रंग साईलेंट है। सवाल यही है कि बाकी नेताओं की ड्यूटी नहीं लगी और नहीं लगी तो क्यों नहीं लगी। सवाल पूर्व क्षेत्रीय मंत्री अजय शर्मा को लेकर उठा। अब कहा गया कि जब पूर्व वालों की ड्यूटी लग सकती है तो फिर अजय शर्मा की लोकेशन बंगाल के बजाय कन्याकुमारी और केरल की आ रही है।
कहने वाले तो इस कदर ध्यान रख रहे हैं कि किलोमीटर से लेकर कार के सफर के घंटे तक गिना दिए। बता दिया कि यदि वो कार से वेस्ट बंगाल जाते तो उन्हें 26 घंटे लगते और 1432.2 किमी० का सफर वो तय करते। बता दिया कि 26 घंटे में बंगाल पहुंच जाते मगर वो तो 43 घंटे वाले सफर पर हैं। 2611.6 किमी० की दूरी और 43 घंटे वाली दूरी को पार कर केरल पहुंचे हैं। अब इस दूरी के पैरामीटर नापे जा रहे हैं कि अजय शर्मा के लिए वेस्ट बंगाल पास था और केरल दूर था। आखिर अजय शर्मा वेस्ट बंगाल ना जाकर केरल क्यों गये। और बता रहे हैं कि 26 घंटे वाले सफर को नहीं किया और 43 घंटे वाले सफर को किया है। गाजियाबाद से बंगाल का डिस्टेंस तो कम रहता। पूरी नजर अजय शर्मा पर रखी जा रही है। उनके सफर के किलोमीटर से लेकर सफर के घंटे तक गिनने वालों ने गिन लिए हैं। कह रहे हैं कि यदि बंगाल चले जाते तो चुनाव का प्रचार भी हो जाता और घूमने की इच्छा भी पूरी हो जाती। वहां डबल बेनिफिट रहता। वहां पर सिर्फ सागर है और यहां गंगासागर भी है। यहां पर घूमना सैर माना जायेगा और बंगाल में घूमना प्रचार माना जाता। आखिर ऐसी क्या वजह है कि उनके दल वाले उनकी हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं। अजय शर्मा केरल जायें कि तमिलनाडू जायें वो कन्याकुमारी जायें या रामेश्वरम जायें मगर ऐसा क्या है कि भाजपा वाले इस टूर को दूर से भी वॉच कर रहे हैं।

केरल टूर कर देगा साहिबाबाद टिकट की दुविधा दूर

भाजपा वाले यदि अजय शर्मा के केरल और तमिलनाडू टूर को लेकर इतना इंट्रस्ट ले रहे हैं तो बात जरूर है। सूत्र बताते हैं कि इतनी लम्बी डिस्टेंस तय करने के पीछे टिकट वाला सस्पेंस छुपा है। किसी गुरु ने सागर किनारे वाला मंत्र दिया है। बताया है कि रामेश्वरम, मदुरई और कन्याकुमारी में हुआ पूजन साहिबाबाद टिकट के दरवाजे खोल देगा। वैसे भी टिकट वाली कृपा को लेकर चन्दन मंत्र पहले काम आया था। दूसरी पारी में लोकसभा में जनरली लोगों को चन्दन के पौधे बांटे गये थे और फिर टिकट भी आ गया था और चन्दन की तरह महकती हुई जीत भी आ गयी थी। अब अजय शर्मा ने यहां एक स्थान को लेकर लिखा भी कि ये ऐसी जगह है जहां एक साथ सूरज अस्त भी होता है और निकलता भी है। हो सकता है वो बताने की कोशिश कर रहे हों कि सियासत का सूरज अस्त नहीं हुआ है बल्कि और मस्त होकर निकलने की तैयारी में है। बहरहाल इस टूर का टिकट से बड़ा ही क्लोज कनेक्शन बताया जा रहा है। ऐसे ही इतनी दूर जाकर विद फैमिली मंदिरों में माथा नहीं टेका गया है। कुछ तो बात जरूर है।

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