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कैग ने मांगी जानकारी तो जीडीए में मच गया हड़कंप

गाजियाबाद (करंट क्राइम)। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पीएम नरेंद्र मोदी ने कमला नेहरूनगर मैदान पर मंच से जीडीए में बिल्ड़र नेता गठजोड़ की बात कहकर जीडीए में व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया था। इसके बाद जीडीए में कंम्ट्रोलर एंड आडिटर जनरल आॅफ इंडिया (कैग) की जांच आ गई थी। शुरू में तो जीडीए के अधिकारियों ने इस जांच से बचने के भरकस प्रयास किए। यहां तक कह दिया कि जीडीए तो इस जांच के घेरे में आता ही नहीं है।
इसके बाद काफी हीलहुज्जत के बाद जांच शुरू हो गई। तब तक जीडीए में वीसी से लेकर कई इंजीनियरों के तबादले हो गये। कैग की जांच चलती रही ओर इस जांच में गति तब आई जब आईएएस अधिकारी कंचन वर्मा ने जीडीए वीसी के रूप में चार्ज लिया। अब कैग की जांच की आंच कईयों पर आने वाली है। जीडीए में तैनात कर्मचारियों का ब्यौरा कैग ने मांग लिया है। इस ब्यौरे में कर्मचारियों की नियुक्ति का आधार मांगा गया है। इसके अलावा कर्मचारियों को जारी होने वाले वेतन का आधार भी पूछा गया है। कैग ने जांच में कई अन्य बिंदुओं पर भी जानकारी मांगी है।
माना जा रहा है कि कैग के आड्टि में जीडीए में व्याप्त दस साल से भी अधिक का भी भ्रष्टाचार उजागर होने वाला है। सूत्र बताते हैं कि जीडीए में वर्ष-1988 से 1990 के बीच कई भर्तियां हुई थी जिनमें बाबू से लेकर अधिकारी तक शामिल थे। इन भर्तियों को अधिसंख्य वर्ग और केंद्रीय सेवा वर्ग के कर्मियों में विभाजित किया गया था। इसके बाद जीडीए में हर बाबू ओर जेई ने अपने निजी कर्मचारी भी रख लिये।
इन कर्मचारियों को जेई और बाबू अपनी जेब से वेतन देते रहे। कैग की जांच में अब बड़ा खुलासा होने वाला है। 1988 और 1990 के बीच हुई भर्तियों के अलावा जब भी यूपी में सरकार बदली तब तब जीडीए में भी बहुत कुछ बदल जाता था।

वर्ष-2007 से 2011 के बीच हुई नियुक्तियां
सूत्रों के अनुसार मायावती जब सूबे की मुख्यमंत्री थी उस समय जीडीए में बड़े स्तर पर जीडीए कर्मियों को शासन स्तर से नियुक्त किया गया था। अधिसंख्य वर्ग की नियुक्तियां पर भी मोहर इसी दौरान लगी थी, लेकिन केंद्रीय सेवा वर्ग के कर्मचारियों एवं अधिकारियों को नियुक्ति नहीं दी जा सकी थी। अब कैग की रिपोर्ट में उक्त के संबंध में जानकारियां मांगी गई हैं कि किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की नियुक्ति में शासन स्तर से कोई परमिशन नहीं ली गई है। फिलहाल जीडीए में कैग की जानकारी मांगे जाने के बाद हडकंप की स्थिति मची हुई है।

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