मासूमियत पर पसीज गया दरोगा का दिल

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गाजियाबाद (करंट क्राइम)। समाज में जहां पुलिस अपनी नकारात्मक शैली को लेकर हमेशा चर्चा में रहती है, वहीं महकमे के एक दरोगा का दिल मासूम मजदूर की मासूमियत को देखकर पसीज गया। इस दरोगा ने ख़ाकी की मानवीयता की ऐसी मिसाल पेश की जिसे सुनकर हर आदमी के मुंह से उसके लिए सम्मान भरे शब्दों की पूरी श्रृंखला ही बाहर निकली। यह बात थाना मसूरी में तैनात दरोगा लोकेंद्र सिंह की है। दरोगा ने एक राह चलते 7-8 साल के बच्चे को अपने पास बुलाया। इस अनजान बच्चे के तन पर फटे हुए कपड़े और पैरों में चप्पल नहीं थी। लोकेंद्र ने बच्चे से पूछा कि कहां से आ रहे हो, इस पर बच्चे ने जवाब दिया कि ईट डालकर आ रहा हूं। 12 रुपये कमाकर लाया हूं। मैं गरीब हूं। इनसे मैं अपने लिए नई चप्पल खरीदूंगा। मासूम की यह बात सुनकर लोकेंद्र सिंह कुछ समय के लिए भावुक हो गए और उनके अंदर की मानवीयता जाग उठी। मासूम की नन्ही हथेलियों में दबे पैंसों को देखकर ख़ाकी के नीचे छिपा फरिश्ता का भेष भी जल्द ही सामने आ गया। दरोगा बच्चे को अपने साथ लेकर सीधा जूते-चप्पल की दुकान पर पहुंचा और उसकी पसंद के चप्पले मासूम को दिलाए। नई चप्पल पाते ही जैसे ही मासूम का चेहरा मारे खुशी के खिला तो लोकेंद्र के दिल को बेहद सुकून महसूस हुआ। इस संस्मरण को जानने के बाद दुकानदार ने बच्चे के साथ दरोगा का फोटो लेकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। जैसे ही ख़ाकी की इस मानवीयता की कहानी लोगों को पता चली तो सबसे के मुंह से दरोगा के लिए सम्मान के स्वर ही निलकते सुनाई दिए। अगर देखा जाए तो यह कोई बड़ी बात नहीं है, मगर कभी-कभी बातों के भी बड़े संदेश होते हैं। शायद दरोगा लोकेंद्र की मानवीयता ने पुलिस विभाग के सकारात्मक चेहरे को आगे किया है। इस नेक कार्य के लिए लोगों की शाबाशी और वाह-वाही सोशल मीडिया पर दरोगा को खूब मिल रही है। फोटो के साथ दरोगा के लिए लिखा गया है कि पसंद की चीज मिलने के बाद जो खुशी मैंने उस मासूम चेहरे पर देखी है, उससे मुझे जो राहत मिली है उसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता हूं।