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नंदकिशोर हुए कमजोर तो मदन का भाग्य मारेगा जोर

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)
गाजियाबाद। लोनी विधानसभा सीट पर जिन कद्दावर चेहरों के मैदान में आने की उम्मीद थी, उन्हें भाजपा मुख्यालय से निराशा मिली। यहां भाजपा ने पूर्व जिलाध्यक्ष नंदकिशोर गुर्जर को उम्मीदवार बनाया है। नंदकिशोर गुर्जर का हिंदूवादी चेहरा भाजपा को लाभ दे या न दे, लेकिन कहीं यह चेहरा यहां से रालोद उम्मीदवार मदन भैय्या की चुनावी नैया को पार न लगा दे। यह हालात समीकरण बता रहे हैं। नंदकिशोर गुर्जर लोनी से भाजपा का हिंदूवादी चेहरा है। गाय को लेकर उन्होंने कई आंदोलन किए है, कई बार मोर्चा खोला है। यहां से रालोद ने मदन भैय्या और बसपा ने हाजी जाकिर अली को चुनावी मैदान में उतारा है। अब चर्चा के बाद जो बात निकलकर सामने आई है, वह यह है कि नंदकिशोर के आने के बाद यहां मुस्लिम एकजुट होने लगे है। मुस्लिमों ने भाजपा प्रत्याशी घोषित होने के बाद ही एकजुट होना शुरू किया है। खास बात यह है कि वर्तमान विधायक और बसपा प्रत्याशी हाजी जाकिर अली को भी मुस्लिमों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। यह नाराजगी उनके चुनावी क्षेत्र में न रहने और कई अन्य कारणों को लेकर है। सपा ने यहां से अपने पूर्व जिलाध्यक्ष राशिद मलिक को मैदान में उतारा है। अब मुस्लिम उस खेमे में जाएंगे जो भाजपा को हराएगा। मुस्लिमों की यह तलाश मदन भैय्या पर खत्म होती दिखाई देती है। मदन भैय्या क्षेत्र का बड़ा गुर्जर चेहरा है तो मुस्लिम वोटों में वह मजबूत दखल रखते हैं। हाल में ही मदन भैय्या ने एक पंचायत आयोजित की थी, तो उसमें बढ़ी संख्या में मुस्लिम आए थे। यह भी तय है कि यहां दो मुस्लिम उम्मीदवार होने की स्थिति में वोटों का विभाजन होगा। इस विभाजन का लाभ भी नंदकिशोर को नहीं बल्कि मदन भैय्या को मिलेगा। मदन भैय्या चुनाव के पुराने खिलाड़ी है और उन्हें भाजपा खेमे की उदासीनता का भी लाभ मिलना है। नंदकिशोर गुर्जर के साथ अभी तक भाजपा के वह गुर्जर चेहरे ही साथ नहीं आए हैं जो उन्हें चुनावी आॅक्सीजन दे सकते हैं। यहां से टिकट की दावेदारी कर रहे करतार सिंह निठौरा, योगेंद्र मावी, अनिल कसाना, विनोद बंसल, मनोज धामा, रूप चौधरी, मुखिया गुर्जर अभी तक नंदकिशोर गुर्जर के साथ नहीं दिखे हैं। छोटी-छोटी चीजों के भी फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड करने वाले नंदकिशोर गुर्जर ने अभी तक ऐसा कोई फोटो अपलोड नहीं किया, जिसमें यह दिख रहा हो कि मजबूत गुर्जर चेहरे नंदकिशोर के साथ है। जब चुनाव बनाने का समय है, तब नंदकिशोर रूठे चेहरे को मनाने में जुटे हैं। हालांकि नंदकिशोर छात्र संघ की राजनीति से निकले हैं। छात्र संघ अध्यक्ष रहे हैं, भाजपा के जिलाध्यक्ष भी रहे हैं। राजनीति जानते हैं, लेकिन समस्या यह है कि मदन भैय्या उनसे अधिक राजनीति जानते हैं।

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