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ग़ाजियाबाद दिल्ली एन.सी.आर

जिला प्रशासन ने अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ छेड़ा अभियान पब्लिक रहे सजग और पुलिस रखे ऐसे तत्वों पर विशेष निगाह

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)
गाजियाबाद। जिले में दो घटनाक्रम ऐसे हुए जब किसी घटना का स्वरूप ही दूसरे तरीके से पेश किया गया। इस मामले में मीडिया और सोशल मीडिया दोनों का ही रोल रहा और सबसे बड़ी बात यह है कि पुलिस का एलआईयू सिस्टम पूरी तरह से फेल नजर आया। अब डीएम ने इस पर संज्ञान लिया है और उन्होंने सभी थानाध्यक्षों को पत्र लिखकर निर्देश दे दिए हैं कि सभी थानाध्यक्ष अपने-अपने थाना क्षेत्र में अफवाह फैलाकर जिले की फिजा, सौहार्द और वातावरण बिगाड़ने वाले लोगों को चिंहित कर उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करें और रासुका लगाने की तैयारी करें। जिलाधिकारी ने लोगों से अपील की है कि वह सोशल मीडिया और अन्य स्रोतो के माध्यम अफवाहों पर बिल्कुल भी ध्यान ना दें तथा अफवाह फैलाने वालों को पकड़वाने में जिला प्रशासन के साथ अपना सहयोग करें। यह एक्शन सोमवार को शिब्बनपुरा इलाके में बौद्ध धर्म दीक्षा के एक मामले को लेकर दिए गए हैं। उससे पहले करहैड़ा को लेकर भी इसी तरीके का माहौल बनाया गया था।

अगर कोई फैलाता है अफवाह तो बताएं इस नंबर पर
प्रशासन ने जिले की शांति व्यवस्था बिगाड़ने वाले लोगों की हालत बिगाड़ने की पूरी तैयारी कर ली है। जिलाधिकारी ने जहां लोगों से अफवाहों पर ध्यान ना देने की अपील की है। वहीं उन्होंने लोगों से कहा कि यदि कोई व्यक्ति अफवाह फैला रहा है तो पब्लिक का कोई भी व्यक्ति अफवाह फैलाने वाले व्यक्ति के बारे में जिला प्रशासन को सूचना दे दे। इसके लिए प्रशासन ने बाकायदा कंट्रोल रूम का नंबर दिया है। अफवाह फैलाने वाले व्यक्ति की सूचना 9643208970 पर दी जा सकती है। डीएम ने कहा है कि जिला प्रशासन द्वारा अफवाह फैलाने वाले व्यक्ति को पकड़वाने वाले और सूचना देने वाले व्यक्ति को पुरस्कृत किए जाने का भी फैसला किया गया है।

सभी एसडीएम अपनी-अपनी तहसील में करेंगे मॉनीटरिंग
प्रशासन अफवाह फैलाने वालों को लेकर पूरी तरह से एक्टिव है। डीएम ने जिले के सभी एसडीएम को निर्देश दिए हैं कि वह अपनी-अपनी तहसील क्षेत्र में फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों के माध्यम से ऐसे लोगों को चिंहित करें जो अफवाह फैला रहे हैं और उनके विरुद्ध साक्ष्य इकट्ठा कर उसकी सूची एडीएम प्रशासन को भेज दें।

जिले का आईटी सेल रखेगा सोशल मीडिया पर कड़ी नजर
सोशल मीडिया इन दिनों सूचना तंत्र का सबसे मारक अस्त्र बनकर उभरा है। जब तक किसी मामले में सच्चाई सामने आती है तब तक सोशल मीडिया से उस बात का रूप और स्वरूप पूरी तरह बदलकर किसी अन्य रूप में जनता के पास पहुंच जाता है। यही वजह थी कि सीएए के दौरान प्रशासन को नेटबंदी करनी पड़ी थी। करहैड़ा और शिब्बनपुरा की घटना के बाद जिला प्रशासन ने जहां सभी थानाध्यक्षों को पत्र लिखा तो वहीं जिले की आईटी सेल को पूरी तरह से एक्टिव रखे जाने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर विशेष निगरानी रखे जाने और ऐसी अफवाहों को सोशल मीडिया पर आगे फॉरवर्ड कराए जाने की पहचान के निर्देश दिए हैं। डीएम ने एसएसपी को भी एक पत्र लिखा है। सोशल मीडिया पर विशेष रूप से पुलिस की नजर अब उन लोगों पर हैं जो किसी भी विवादित पोस्ट को सोशल मीडिया पर फॉरवर्ड और शेयर करते हैं।

पुलिस को सोशल कनेक्टिविटी मंत्र से लेना होगा काम
जिस घटना को लेकर प्रशासन ने संज्ञान लिया वास्तव में उस मामले में पुलिस को पहले ही कदम उठाने चाहिए थे। पुलिस का नेटवर्क ज्यादा मजबूत माना जाता है। उसके पास एलआईयू भी होती है और बीट कॉन्स्टेबल भी होते हैं। पुलिस के पास मुखबिर तंत्र भी होता है और चेकिंग अभियान भी पुलिस चलाती है। लेकिन ये तीसरी बार हुआ जब प्रशासन के पास इनपुट और पुलिस नेटवर्क फेल हो गया। जब प्रवासी मजदूर कोरोना लॉकडाउन काल में गाजियाबाद से गुजरे थे तब बसों और ट्रेनों का इंतजाम होने की खबर पर मजदूरों का एक पूरा रैला गाजियाबाद में आ गया था। कमाल ये हुआ था कि यहां किसी को भनक नहीं थी और लोकसभा सांसद जनरल वीके सिंह के आवास से इनपुट दिए गए थे कि शहर में कई स्थानों पर मजदूर रुके हैं और इनकी संख्या अधिक है। तब प्रशासन ने रात में ही इंतजाम किए थे और अब जब धर्म परिवर्तन जैसे अफवाह तेजी से फैली उससे ये साबित हो गया कि जिले का एलआईयू नेटवर्क पूरी तरह फेल है। पुलिस का मुखबिर तंत्र कमजोर है और बीट कॉन्स्टेबल को और ताकत मिलनी चाहिए। पुलिस को अपने सोशल कनेक्टिविटी मंत्र के जरिए पब्लिक में अधिक पैंठ रखने की जरूरत है। मामले अभी और भी होंगे और यहां पर नेटवर्क अगर कमजोर रहा तो फिर कभी भी स्थिति बिगड़ सकती है। शासन को भी जिले की इस स्थिति पर संज्ञान लेना चाहिए। यहां पर भाजपा के केंद्रीय मंत्री से लेकर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री रहते हैं। अफसरों की एक पूरी फौज यहां है और यहां का भौगोलिक और सामाजिक समीकरण ऐसा है कि चौकसी की जरूरत है।

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