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धरना देने वाली पार्षद को मिला दूसरी महिला पार्षद का समर्थन

गाजियाबाद (करंट क्राइम)। वैशाली के वार्ड-77 की भाजपा पार्षद नीलम भारद्वाज गुरुवार को वसुंधरा गेस्ट हाउस में धरने पर बैठ गई थीं। वह क्षेत्र के जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन चाहती थीं और इस बात पर उनका एसडीएम से विवाद हो गया था। इस मामले में भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा के हस्तक्षेप के बाद धरना तो समाप्त हो गया, लेकिन यहां पर एसडीएम ने भी कहा दिया था कि वह दबाव में काम नहीं करेंगे। उनका कहना था कि जो लिस्ट निगम से वैरिफाई होगी वह उसी के अनुसार भोजन देंगे। शुक्रवार को इस मामले में नया मोड़ आया और वैशाली के ही वार्ड-76 की पार्षद शिवानी गौरव सोलंकी नीलम भारद्वाज के समर्थन में आ गई। शिवानी सोलंकी ने कहा कि हम एसडीएम सदन के बयान से बिल्कुल सहमत नहीं है। क्योंकि जो लिस्ट प्रशासन के पास गई थी वह लिस्ट हमने दो तारीख को ही दे दी थी। वह लिस्ट जरूरतमंद लोगों की थी और इस लिस्ट को स्थानीय विधायक सुनील शर्मा और भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा के माध्यम से प्रशासन को उपलब्ध कराया गया था। जब लिस्ट विधायक और संगठन के महानगर अध्यक्ष व चुने हुए पार्षद के माध्यम से पहुंच गई तो फिर प्रशासन किसका वैरिफिकेशन चाहता है। शिवानी सोलंकी ने कहा कि वसुंधरा जोन में तो मुश्किल से दो दिन ही खाना बंटा होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि खाने का वितरण सरकारी स्तर पर बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
कहीं दान के भोजन को प्रशासन ने कागजों में तो नहीं दिखा दिया अपना
कोरोना लॉकडाउन काल में बहुत ही समाजसेवी संस्थाएं और कई अन्य व्यक्ति अपने धन से लोगों को भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। लेकिन जब भोजन में प्रशासनिक एंट्री हुई तो यहां विवाद शुरू हो गया और अब हर वार्ड में लोगों की शिकायत यही है कि उन्हें भोजन नहीं मिल रहा। महिला पार्षद धरने पर बैठी और उसके पहले भाजपा के ही पार्षद हिमांशु लव भोजन की वैराइटी को लेकर सवाल उठा चुके हैं। अब मामला भोजन में प्रशासनिक घुसपैठ को लेकर उठ रहा है। पार्षद शिवानी सोलंकी ने कहा कि हम रोजाना अपने स्तर पर 500 से 600 लोगों को भोजन दे रहे हैं। मगर इतने दिनों में चार बार ही ऐसा हुआ है जब प्रशासन की ओर से खाना आ है। उन्होंने बाकायदा इसकी गिनती बताते हुए कहा कि पहली बार 150 पैकेट भोजन के आए थे। दूसरी बार 70, तीसरी बार 50 और चौथी बार 100 पैकेट भोजन के आए और फिर खाना आया ही नहीं। शिवानी सोलंकी ने कहा कि प्रशासन के अधिकारी पार्षदों को लेकर सरकार को गुमराह कर रहे हैं। 25 मार्च से लेकर आज तक कई पार्षद और मैं स्वयं अपने पास से लोगों को भोजन दे रहे हैं। प्रशासन यह आरोप लगा रहा है कि कुछ पार्षद अपने स्टीकर लगाकर प्रशासन के खाने के पैकेट बांट रहे हैं। यदि प्रशासन के पास इस बात के कोई सबूत है तो वह दें। अन्यथा वह सभी पार्षदों की बदनामी ना करें। हमें तो ऐसा लग रहा है कि प्रशासन के अधिकारियों ने हमारे द्वारा बनाए गए भोजन व कई अन्य संस्थाओं द्वारा भोजन को अपनी रिपोर्ट में जोड़ लिया है। महानगर अध्यक्ष इस मामले में संज्ञान लें। क्योंकि मामला एक जगह से नहीं बल्कि कई जगह से सुनाई दे रहा है।

विधायक सुनील शर्मा आए पार्षदों के सम्मान में आगे

कहा कि अगर ताली नहीं बजा सकते तो गाली ना दें
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। इस समय लॉकडाउन पीरियड में सबसे बड़ी चुनौती पार्षदों के सामने है। जब तक खाने में प्रशासन की एंट्री नहीं हुई थी तब तक भोजन ज्यादा था और जरूरतमंद कम थे। लेकिन प्रशासन की एंट्री होने के बाद अचानक से पैकेट कम हो गए और गरीब बढ़ गए। यहां जनता के इस असंतोष का सामना स्थानीय पार्षदों को करना पड़ा रहा है और एक तरफ वह जनता की नाराजगी झेल रहे हैं तो दूसरी तरफ उन्हें अधिकारियों से भी कई बातें सुनने को मिल रही है। एक एसडीएम के व्यवहार से आहत होकर भाजपा की एक महिला पार्षद तो धरने पर ही बैठ गई थीं। साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा पार्षदों के सम्मान में आगे आए हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना की लड़ाई में डॉक्टर, पुलिस, सफाईकर्मचारी के साथ-साथ वो जनसेवक भी हैं जो लोगों की सेवा कर रहे हैं और कई स्थानों पर तो लोगों की गाली खाकर भी वह सेवा कर रहे हैं। वह वर्ग ऐसा है जो सेवा कर रहा है मगर उसे ताली के स्थान पर गाली मिल रही है। पार्षद भी चुना हुआ जनप्रतिनिधि होता है और उसे ना कोई भत्ता मिलता है और ना ही वेतन मिलता है। उसका तो कोई कोटा भी नहीं होता है। लॉकडाउन की अवधि में ना जाने कितने पार्षद अपनी जेब से पैसे खर्च कर अपने क्षेत्र के गरीबों को राशन उपलब्ध करा रहे हैं। जब राशन नहीं मिलता तो लोग उनके घर पर आ रहे हैं और उन्हें बातें सुना रहे हैं। पार्षदों के जज्बे को सलाम है कि वह खुद भी क्षेत्र की सेवा में लगे हुए हैं। इन पार्षदों को जनता से सम्मान मिलना चाहिए और अधिकारी भी पार्षदों के प्रति अपने व्यवहार को सम्मानजनक रखे। पार्षद क्षेत्र के लोगों के लिए पास बनवा रहे हैं। पका हुआ भोजन और सूखा राशन उपलब्ध करवा रहे हैं। अपनी जान की परवाह ना करते हुए जनता की सेवा कर रहे हैं। उनके पास ना पीपीई किट है और ना दस्ताने हैं। लेकिन फिर भी सेवा कर रहे हैं। एक पार्षद तो जनसेवा करते-करते कोरोना पॉजिटिव हो गर्इं। पार्षद गुजरात का हो या गाजियाबाद का वह जनता का सेवक होता है और उसका सम्मान होना चाहिए।

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