Current Crime
उत्तर प्रदेश राज्य

बिहार में दिमागी बुखार का कहर, अब तक 132 बच्चों की मौत, हजारों बीमार

मुजफ्फरपुर (ईएमएस)। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में दिमागी बुखार (एक्यूट इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम एईएस) से बच्चों की मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। बिहार में दिमागी बुखार से अब तक 132 बच्चों की मौत हो चुकी है। हालांकि सरकारी आंकड़ों में यह संख्या 105 बताई जा रही है। इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को हालात का जायजा लेने के लिए मुजफ्फरपुर जाने वाले हैं। उनके दौरे से ठीक पहले एसकेएमसीएच अस्पताल में तीन और बच्चों की मौत हो गई है। इतनी बड़ी संख्या में एईएस मरीज आने से अस्पतालों में अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई है। बढ़ती गर्मी, बच्चों के पोषण से जुड़ी योजनाओं की नाकामी और अस्पतालों में बीमारी से निपटने के कम पड़ते इंतजामों के बीच स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
बच्चों की मौत का सिलसिला शुरू होने के 17 दिन बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को अस्पताल में भर्ती बच्चों का हाल जानने मुजफ्फरपुर पहुंच रहे हैं। राज्य सरकार के अधिकारियों के अनुसार जिन बच्चों की मौत हुई है, उनमें लगभग सभी 10 वर्ष से नीचे के हैं। मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) में अब तक 88 बच्चों की मौत हो चुकी है। वहीं, ट्रस्ट द्वारा संचालित केजरीवाल मैत्री सदन अस्पताल में 19 मौतें हुई हैं। एईएस के लिए लीची में मौजूद विषैले तत्वों को जिम्मेदार माना जा रहा है।
अस्पताल में अभी 330 बच्चों का इलाज चल रहा है। वहीं, 100 बच्चों को डिस्चार्ज किया जा चुका है। 2000 से 2010 के दौरान संक्रमण की चपेट में आकर 1000 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई थी। बीमारी की स्पष्ट वजह अभी सामने नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक बढ़ती गर्मी, लू, कुपोषण और खाली पेट लीची खाने की वजह से इस साल मौतों की संख्या बढ़ गई है। समय से ग्लूकोज चढ़ाना ही इसमें सबसे प्रभावी इलाज माना जा रहा है।
मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. जीएस सहनी का कहना है कि केवल लीची को जिम्मेदार ठहराना न्यायसंगत नहीं होगा। वह कहते हैं शहर में रहने वाले बच्चे भी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। जबकि पिछले दो दशक के दौरान शहरी इलाकों में एईएस के सिर्फ चार मामले सामने आए थे।
इन्सेफलाइटिस से जिन बच्चों की मौत हुई है, उनमें से ज्यादातर महादलित समुदाय से आते हैं। ज्यादातर बच्चे कुपोषण का शिकार थे। इस बीच बीमारी का दायरा अब बढ़ता जा रहा है। पड़ोसी पूर्वी चंपारण, शिवहर और सीतामढ़ी से भी दिमागी बुखार के मामले सामने आ रहे हैं। हाल ही में वैशाली के दो ब्लॉक में भी कुछ संदिग्ध मामले देखे गए थे। अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, जरूरी दवाओं की अनुपलब्धता, बेड और नर्सिंग स्टाफ की कमी से स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। एसकेएमसीएच समेत राज्य सरकार द्वारा संचालित अस्पताल मरीजों से भर गए हैं, जबकि चिकित्सा सुविधाएं बौनी पड़ गई हैं।
एसकेएमसीएच के सुपरिंटेंडेंट डॉ. एसके साहनी ने कहा कि एईएस के मरीजों के इलाज के लिए विभाग को अब तक कोई अतिरिक्त फंड नहीं मुहैया कराया गया है। अचानक बड़ी संख्या में अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिहाज से हमारे पास संसाधन नहीं हैं। रविवार को अस्पताल का दौरा करने वाले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने वायदा किया था कि बाल रोग विभाग के लिए 100 बेड वाली नई बिल्डिंग का जल्द निर्माण कराया जाएगा।

Related posts

Current Crime
Ghaziabad No.1 Hindi News Portal
%d bloggers like this: