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सरकार ने माना महामारी का रूप ले रहा है स्वाइन फ्लू

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। अभी गोरखपुर मैडिकल कांड से यूपी उभरा नहीं है लेकिन अब स्वाईन फ्लू का खौफ यूपी में छाने लगा है। सरकार भले ही लाख दावे करे और सरकारी अस्पताल भी ये कहें कि इलाज की पूरी व्यवस्था है लेकिन हकीकत ये है कि स्वाईन फ्लू अब महामारी का रूप ले रहा है। ये बात कोई और नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव ही कह रहे हैं। उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव प्रशांत त्रिवेदी ने सभी जिलाधिकारियों को जो पत्र लिखा है उसमें उन्होंने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश में स्वाईन फ्लू लगातार तेजी से बढ़ रहा है और धीरे धीरे महामारी का रूप ले रहा है। उन्होंने अपने पत्र में इसके रोकथाम और लोगों को इससे बचाने के लिए अत्यन्त सावधानी बरतने की अपील की है। वहीं स्थिति जिले में इसके विपरीत है। यहां स्वाईन फ्लू की दवा के रेट ही आम आदमी के लिए अलग और स्टाफ के लिए अलग हैं। सबसे पहले स्टाफ को दवाई मिलेगी और उसके बाद आम आदमी को दवाई मिलेगी। जनपद में स्वाईन फ्लू की दवा टैमिफ्लू, एन 95 मास्क और पीपीई किट की उपलब्धता बनाये रखने के निर्देश दिए गए हैं।

स्कूलों में प्रार्थना सभाओं में रोक लगाने के निर्देश
प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर स्वाईन फ्लू से रोकथाम और बचाव के निर्देश देते हुए कहा है कि सभी स्कूलों द्वारा स्कूलों में होने वाली प्रार्थना सभाओं में फिलहाल रोक लगाई जाए और अधिक संख्या में बच्चों को एक स्थान पर एकत्रित ना होने दें। कक्षाएं शुरू होने से पहले अध्यापक और अध्यापिकाएं बच्चों का परीक्षण करें। यदि किसी भी बच्चे में स्वाईन फ्लू के कोई भी लक्षण दिखें तो उन्हें तत्काल सात दिन आराम करने की सलाह देकर घर वापिस कर दिया जाए। अभिभावकों को भी ये निर्देश दिया है कि वे अपने बच्चों की देखभाल घर पर ही करें। वहीं स्कूल प्रबंधन अभिभावकों पर बच्चों के चिकित्सा प्रमाण पत्र देने की मांग ना करें और ना ही उन्हें बाध्य करें।

सावधानी बरतें, मरीजों का इलाज करने वाले
स्वाईन फ्लू रोगियों के उपचार में लगे मैडिकल स्टाफ को भी सावधान रहने की हिदायत दी गयी है। इनमें समस्त मैडिकल कर्मचारी, अधिकारी, एम्बुलेंस के ड्राईवर और स्टाफ भी शामिल हैं। एम्बुलेंस के ड्राईवर और स्टाफ का टीकाकरण करवाना सुनिश्चत किया जाए। साथ ही उन्हें यह भी बताया जाए कि रोगियों के परिक्षण के समय वे यथा संभव व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करें। जिस एम्बुलेंस से स्वाईन फ्लू के मरीजों को लाया जाए, उन्हें पहुंचाने के बाद एम्बुलेंस की सफाई और स्टाफ का टीकाकरण प्राथमिकता पर हो। सभी चिकित्सालयों में स्वाईन फ्लू के रोगियों के लिए अलग से आईसोलेशन वार्ड बनाया गया। जहां पर हवा आने की समुचित व्यवस्था हो। यथा संभव एसी का उपयोग ना किया जाए। नगरपालिकाओं को भी निर्देशित किया जाए कि वे सुअर बाड़ों को आबादी से दूर स्थानों पर स्थापित करें।

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