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किन गुप्ता जी को गनर दिलाने की आ गयी मजबूत सिफारिश

क्या शासन वालों ने कमिश्नर से पूछ लिया क्या है दिक्कत
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। गुप्ता जी का गनर वाला मामला एक बार फिर फाईल से बाहर आ गया है। गुप्ता जी के लिए फिर से शासन की ओर से पत्र आया है। गाजियाबाद के गुप्ता जी प्रतिष्ठित कारोबारी हैं। साईकिल वालों की सरकार में भी उनके पास गनर रहा था। सरकार बदली तो उन्होंने पॉवरफुल कैबिनेट मंत्री से अपने गनर की सिफारिश करवा ली। लेकिन सरकार बदलने पर गुप्ता जी को सरकार के मंत्री की सिफारिश का करंट बहुत जोर से लगा। गनर तो उन्हें मिला नहीं लेकिन तत्कालीन पुलिस कप्तान ने उन्हें पिछले गनर का लाखों रूपये का तकाजा लिखित में गुप्ता जी के घर पर भेज दिया। अब बताते हैं कि इसके बाद भाजपा के बड़े नेता का फोन गुप्ता जी की सिफारिश में आया था। सूत्र बताते हैं कि एक बार फिर से शासन से गुप्ता जी की गनर वाली सिफारिश मामला आ गया है। इस बार तो जिले वालों को भी छोड़कर सीधे मेरठ वाले कमिश्नर से ही जवाब मांग लिया गया है। मामले में भाजपा के प्रदेश वाले बड़े नेता और एक डिप्टी सीएम का भी पत्र है। बाकायदा पूछा गया है कि चार महीने पहले गुप्ता जी को जो गनर दिया गया था वो गनर क्यों हटा लिया गया। इतना ही नहीं स्टोरी का ट्वीस्ट ये है कि गनर ना मिलने को उत्पीड़न की कार्यवाही से जोड़ दिया गया है और यहां पर गुप्ता जी को न्याय दिलाने के साथ-साथ दोषी के खिलाफ कार्यवाही का सीन आ गया है। मामला 2014 और 2016 तक पहुंचा है। ये कहा गया है कि जब गृह विभाग ने 2014 और 2016 में प्रावधानों के अनुसार गुप्ता जी को गनर दिया था तो अब क्या दिक्कत आ रही है। निर्देश गुपचुप तरीके से ये भी दिए हैं कि मंडलीय सुरक्षा समिति अपनी रिपोर्ट जब दे तो इन दो सालों को भी ध्यान में रखे। सूत्र बताते हैं कि गुप्ता जी की सिफारिश में इस बार इतना करंट है कि गाजियाबाद वाले पॉवर के तार को छू नहीं रहे हैं। तत्काल प्रभाव से इसमें कागजी कार्यवाही पूरी कर दी गयी है। सूत्र बता रहे हैं कि गुप्ता जी के लिए सीधे लखनऊ से सिफारिश भाजपा के प्रदेश स्तर वाले ठाकुर नेता ने की है। गुप्ता जी का गनर अब उनके पास आकर रहेगा। सूत्र यहां तक बता रहे हैं कि गुप्ता जी का गनर अगर नहीं पहुंचा तो फिर जिले से कोई जाकर रहेगा।

गाजियाबाद वालों के गनर की गूंज लखनऊ तक

गाजियाबाद से भले ही दिल्ली करीब है लेकिन लखनऊ का रिश्ता कुछ अलग ही है। पॉवर वाली फीलिंग लखनऊ से ही आती है। रिकार्ड बताता है कि गाजियाबाद में गनर वाला सीन काफी रोचक रहता है। यहां पर जब भी किसी के पॉलिटिक्स में नम्बर घटते हैं तो सबसे पहले उसके गनर वापिस होते हैं। जिन पर सरकार मेहरबान हुई है उनके गनर अपने-आप ही एक से दो हो गये। गाजियाबाद के एक त्यागी नेता को तो तीन गनर और उनकी पत्नी को एक गनर मिल गया था। जब नेता जी की पत्नी और नेता जी के बीच लखनऊ के थाने में हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ तब पता चला कि आख्या कुछ और व्याख्या कुछ थी। गनर देने का आधार व्यापारी नेता होना था और जांच रिपोर्ट में त्यागी जी किसान मोर्चा के नेता हो गये थे। इसके अलावा कई अन्य नेताओं के गनर को लेकर भी मामला लखनऊ गलियारों में गूंजा है।

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