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ग़ाजियाबाद दिल्ली एन.सी.आर

नए नगर आयुक्त के दौरे हैं इस बात का स्टेटमेंट

होली तक शहर से कचरा मुक्त वाला पूरा होगा उनका कमिटमेंट

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। नए अधिकारी जब नए विजन के साथ काम करते हैं तो फिर उनके विजन का पूरे समाज को लाभ होता है। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि आमतौर पर ये धारणा रहती है कि अधिकारी समग्र विकास और सभी को लाभ देने की भावना के साथ काम करते हैं। वह शासन की मंशा के अनुरूप काम करते हैं और गाजियाबाद में कई उदाहरण हैं जब अधिकारियों ने इस तरीके से काम किया है कि शहर की दशा और दिशा ही बदल गई है। नगर निगम में हरदेव सिंह बाबा को आज तक अतिक्रमण हटाओ अभियान के लिए याद किया जाता है। नगर निगम में आरबी मौर्या ऐसे नगर आयुक्त रहे जिन्होंने शहर को झुग्गीमुक्त और हरा-भरा वातावरण दिया। सांई उपवन से लेकर कविनगर रेलवे लाइन के आसपास झुग्गी बस्ती को हटाया और आज यहां ग्रीन बेल्ट उन्हीं की देन है। वरना एक समय यहां पर धीरे-धीरे पूरी झुग्गी-बस्ती से अवैध कब्जा हो रहा था। सीपी सिंह ऐसे नगर आयुक्त रहे जो सुबह सवेरे दौरे पर निकला करते थे। खुद सफाई अभियान की मॉनीटरिंग करते थे। सफाई कर्मियों के बीच पहुंच जाते थे और उनका विजन था और उनकी प्लानिंग थी कि गाजियाबाद स्वच्छता अभियान में प्रथम आया। एक बार फिर से शहर को ये उम्मीद जगने लगी है कि नगर निगम स्वच्छता के मामले में फिर से शहर को टॉप पर लाएगा और गाजियाबाद का नाम देश और प्रदेश में रोशन होगा। युवा अधिकारी जब किसी भी काम को हाथ में लेते हैं तो वह एनर्जी और विजन दोनों का ही एक शानदार मुलाहिजा पेश करते हैं। नवनियुक्त नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर को लेकर भी उम्मीदें जग रही हैं। नए आईएएस अधिकारी हैं और कम समय में उन्होंने अपनी कार्यशैली से हर उस शहर में एक छाप छोड़ी है जहां वे तैनात रहे हैं। करंट क्राइम ने जब नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर से मुलाकात की तो यहां पर बात शहर की स्वच्छता को लेकर हुई। जब यह सवाल उठा तो नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि मुझसे मीडिया के अन्य साथियों ने भी पूछा था कि क्या बड़ा करोगे? तब मैंने कहा था कि जब बड़ा हो जाता है तो खुद दिखता है, इसलिए जो करने जा रहे हैं वह दिखेगा। शहर की सफाई व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त करना मेरी प्रथम प्राथमिकता है। शहर को कचरा मुक्त करना मेरा एजेंडा है। मेरा कमिटमेंट है कि होली से पहले गाजियाबाद को कूड़ा निस्तारण की समस्या से मुक्ति मिलेगी और शहर पूरी तरह से कचरा मुक्त होगा।

खुद जा रहे हैं हर वार्ड में और फेस टू फेस करते हैं बात

आईएएस महेंद्र सिंह तंवर का वर्किंग स्टाइल थोड़ा हटकर है। वह आॅफिस के काम आॅफिस में और फील्ड के काम फील्ड में पूरा करते हैं। लगातार वार्डों में जा रहे हैं। बड़ी बात यह है कि उन्होंने निगम की नब्ज भांपी हैं और शिकायतों का निस्तारण वह कक्ष में नहीं बल्कि फील्ड में मौके पर पहुंचकर कर रहे हैं। किसी भी वार्ड में पहुंचते हैं और यहां पर एक संवाद कायम करते हैं। वार्ड के पार्षद और सफाई नायक को जरूर मौके पर बुलाते हैं। दोनों के सामने समस्या को लेकर फेस टू फेस बात करते हैं। नतीजा ये है कि फिर मौके पर ही समस्या का समाधान भी हो जाता है।

नालों के निरीक्षण से लेकर हाजिरी के रजिस्टर पर है नजर

नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर की वर्किंग शैली का असर निगम के काम पर दिखाई देने लगा है। नालों के निरीक्षण से लेकर सफाई कर्मियों के हाजिरी रजिस्टर तक उनकी नजर है। इसकी बानगी ये है कि 10 सितंबर को वो वसुंधरा जोन में पहुंचे और कर्मचारियों के उपस्थिति रजिस्टर चैक किए। 13 सितंबर को नालों की सफाई का निर्देश दिया और खुद कई नालों का निरीक्षण किया। 14 सितंबर को विजय नगर जोन में पहुंचे और 15 सितंबर को नगर निगम मुख्यालय से दो गाड़ियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और ये वो गाड़ियां हैं जो कोविड मरीजों को अस्पताल पहुंचाएंगी। 16 सितंबर को बम्हैटा में पहुंचकर प्राचीन तलाब का निरीक्षण किया। मेयर को भी इस मौके पर साथ लिया और अब तालाब का जीर्णोद्धार होगा। इंदिरापुरम पहुंचकर एसटीपी प्लांट की व्यवस्थाओं को देखा। 16 सितंबर को कविनगर जोन में पहुंचे और पार्षद राजेंद्र त्यागी को साथ लेकर यहां की तैयारियों का निरीक्षण किया। 17 सितंबर को मोहननगर जोन और 18 सितंबर को वसुंधरा जोन में पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।

मेयर से लेकर पार्षद भी कर रहे हैं नए नगर आयुक्त की तारीफ

आमतौर पर निगम में ये परम्परा रही है कि नए नगर आयुक्त के आते ही बाहर जिंदाबाद और मुर्दाबाद होने लगती है। सफाई कर्मचारियों के नेताओं से लेकर निगम कर्मचारियों के नेता पुरानी फाइलें खोल लेते हैं। लेकिन महेंद्र सिंह तंवर ने जिस दिन से चार्ज लिया है अभी तक सीन ऐसा नहीं बना है। इसकी वजह उनका व्यवहार और कार्य प्रणाली बताई जाती है। बड़ा कक्ष लोगों के लिए और छोटे कक्ष में जब सभी से अकेले में मिलते हैं तो सब अपने मन की बात बताते हैं। स्वयं मेयर ने नगर आयुक्त की प्रशांत करते हुए उन्हें एक विजनरी और ऊर्जावान अधिकारी बताया था। पार्षदों को उनका अलग से मिलना और काम कराने में मित्रवत व्यवहार पसंद आ रहा है। बताते हैं कि महेंद्र सिंह तंवर ऐसे आईएएस अधिकारी हैं जो अब से पहले जिस भी जिले में रहे हैं। वहां उनकी कार्यशैली के लोग कायल हुए हैं। कानून के साथ मनोविज्ञान से काम लेते हैं।

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