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ग़ाजियाबाद दिल्ली एन.सी.आर

गाजियाबाद में सपा संगठन की स्थिति विस्फोटक

मुद्दों को छोड़ आपस में लड़ रहे हैं सपा पदाधिकारी
गाजियाबाद। जब नोट बंदी को लेकर काग्रेंस सड़क पर है, जब भाजपा अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिये परिवर्तन यात्रा निकाल रही है जब सपा के पक्ष में माहौल बनाने के लिये मुख्यमंत्री अखिलेश यादव रथ यात्रा निकाल रहे हैं ऐसे में गाजियाबाद के सपा पदाधिकारी पद को लेकर एक-दूसरे से उलझ रहे हैं। सपा को सड़कों पर उतरना है और सपा के पदाधिकारी पार्टी कार्यालय में बैठ कर एक-दूसरे के गिरेबान पकड़ने पर आमादा हैं। सोमवार को सपा कार्यालय में दो पदाधिकारी आपस मे लड़-झगड़ रहे थे। मामला सपा संगठन के एक जिला स्तर के पदाधिकारी और महानगर स्तर के पदाधिकारी से जुड़ा था। जिले वाले अति वरिष्ठ है तो महानगर वाले अतिकनिष्ठ हैं। जिला पदाधिकारी ने नसीहत देने के अंदाज में महानगर के पदाधिकारी से कहा कि जिस पर पर आप है वो तो ठीक हैं पर इन दिनों आप अपने पद के साथ दूसरे पद की अतिरिक्त व्यवस्था को जो जोड़ रहे हो वह पार्टी गाइड लाइन के हिसाब से ठीक नहीं हैं। पार्टी में इस तरह का कोई नियम नहीं है। बस इसी बात को लेकर महानगर के पदाधिकारी उखड़ गये। दोनों के बीच बातचीत का स्वर विवाद में बदलने लगा। दोनों के बीच हो रहे वाकयुद्ध को वहां मौजूद पार्टी के कई कार्यकर्ता और वहां आए आगतुंक भी देख और सुन रहे थे। एक आयु में भी वरिष्ठ और पार्टी में भी वरिष्ठ और दूसरा आयु में भी कनिष्ठ और पार्टी में भी अतिकनिष्ठ। दोनों के बीच बहस होने लगी। महानगर पदाधिकारी ने कहा कि वह अपने पद को जिस पद से जोड़कर चल रहे है उसके लिये उन्हें पार्टी के ही बड़े पदाधिकारी ने मौखिक रूप से कहा है। मैंने अपनी मर्जी से पद नहीं बना लिया है। इस पर वरिष्ठ पदाधिकारी ने महानगर पदाधिकारी को सपा संविधान और नियमों की जानकारी से अवगत कराते हुए बताया कि जिस पद को तुम इन दिनों लिख रहे हो उस पद का कोई प्रावधान ही सपा के सविंधान में नहीं है। बहस यहीं खत्म नहीं हुई। पार्टी कार्यालय पर रखे रजिस्टर पर भी अपने नाम के साथ इस पद का जिक्र करने की बात पर फिर से स्वर कड़े होने लगे। इस पर महानगर पदाधिकारी ने कहा कि आप को क्या पता कि मेहनत कैसे होती है। जब आप शादियों में बिजी थे तब मैं ही लखनऊ में रजत जयंती पर बसों की व्यवस्था करवा रहा था। बात तो किसी तरह शांत हो गई पर अपने पीछे कई सवाल छोड़ गई। जब जनता के बीच जाने की बेला आई है तब सपा के पदाधिकारी कार्यालय में बैठ कर एक दूसरे मे कमियां निकाल कर लड़ रहे है। अगर पदाधिकारी कार्यालय में बैठ कर एक दूसरे से लड़ रहे हैं तो फिर सपा के उम्मीदवारों को चुनाव कौन लड़वा रहा है।
महिला पदाधिकारी उलझ गई सपा के पदाधिकारी से
सपा के दो पदाधिकारी जब आपस में भिड़कर शांत हुए ही थे कि फिर से सपा कार्यालय आरोप-प्रत्यारोप से गूंजने लगा। इस बार एक स्वर महिला का था और दूसरा स्वर पुरूष का था। मामला सक्रियता को लेकर शुरू हुआ और बहस के बाद विवाद में तब्दील हो गया। सपा सगंठन के दो प्रकोष्ठों के पदाधिकारी कार्यालय पर बैठे थे। इनमें एक महिला पदाधिकारी थी और दूसरे पुरूष पदाधिकारी थे। पुरूष पदाधिकारी ने महिला पदाधिकारी के सामने सपा की किसी अन्य महिला नेत्री की तारीफ करते हुए कह दिया कि वह महिला पार्टी मे अधिक सक्रिय रहती है। बस इसी बात को लेकर वहां मौजूद महिला पदाधिकारी आग बबूला हो गई। दोनों के बीच जमकर तू-तू-मैं-मैं हुई। महिला पदाधिकारी ने सपा प्र्रकोष्ठ के पदाधिकारी को सक्रियता का ऐसा पाठ पढ़ाया कि सपा प्रकोष्ठ के पुरूष पदाधिकारी की बोलती ही बंद हो गई।

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