नींद में खर्राटे लेना, ‎दिल की सेहत के ‎लिए खतरनाक

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नई दिल्ली(ईएमएस)। आमतौर पर कई लोंगों को रात में खर्राटे लेने की आदत होती है। हांला‎‎कि फै‎मिली के अन्य मेंबर्स इस बात की हमेशा ‎शिकायत भी करते हैं तो अक्सर लोग इसे मजाक में टाल जाते हैं। ले‎किन इसे नजरअंदाज न करें, क्योंकि ये खर्राटे गंभीर स्वास्थ्य समस्या को जन्म दे सकते हैं। इसलिए तुरंत सजग हो जाएं। खर्राटे अकसर नाक और गले के क्षेत्र में अत्यधिक ऊतकों के कंपन के कारण होते हैं, जिससे सामान्य रूप से सांस लेने में परेशानी आती है। उससे अधिक महत्वपूर्ण अपने खर्राटों पर नियंत्रण रखना है, क्योंकि अत्यधिक खर्राटे कई रोगों के सूचक हो सकते हैं। उनमें से एक रोग स्लीप एप्निया है। भारत में करीब 6 करोड़ 40 लाख वयस्क ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया से पीड़ित हैं। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया का प्रकोप आम लोगों में काफी अधिक है। इसके बावजूद इस समस्या से पीड़ित 80 प्रतिशत लोगों में इसकी पहचान नहीं हो पाती। ऐसा इस कारण होता है, क्योंकि ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया से पीड़ित कई लोग या तो अपनी इस समस्या से बेखबर होते हैं या इसे नजरअंदाज करते रहते हैं और किसी को इस बारे में बताये बगैर इसके दुष्परिणामों को झेलते रहते हैं।
हर व्यक्ति कभी-कभी खर्राटे लेता है। कम होती ठंड के दौरान नाक और गले से ट्रेन चलने जैसी आवाज भी निकलने लगती है। यदि आपके साथ भी ऐसा होता है, तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है, लेकिन आदतन खर्राटे लेने वालों के लिए अत्यधिक चिंता करने की जरूरत है। यह गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो सकती है। नई दिल्ली स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल्स के ईएनटी सर्जन डॉ ललित मोहन पाराशर के मु‎ता‎बिक, स्लीप एप्निया सोने के दौरान एयरवे के सिकुड़ने के कारण होता है। सोने के दौरान ऊपरी वायुमार्ग (एयरवे) की मांसपेशियां और जीभ नीचे आ जाती हैं, जिस कारण ऊपरी एयरवे में आंशिक रूप से बाधा पहुंचती है। इस कारण रक्त में ऑक्सीजन के स्तर में कमी आ जाती है और यह स्थिति घातक भी साबित हो सकती है। एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के कार्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ ऋषि गुप्ता कहते हैं, खर्राटे बाधित नींद का संकेत हैं, जो कई स्वास्थ्य संबंधी बीमा‎रियों को जन्म दे सकते हैं। एक शोध के अनुसार खर्राटे हृदय रोग के खतरे को बढ़ा सकते हैं। अधिक वजन वाले, धूम्रपान करने वाले या कोलेस्ट्रॉल के उच्च स्तर वाले लोगों में कैरोटिड आर्टरी के मोटा होने के कारण खर्राटे अधिक खतरनाक साबित हो सकते हैं। स्लीप एप्निया का इलाज और उचित डॉक्टरी नियंत्रण नहीं कराने पर स्ट्रोक, डायबिटीज और डिप्रेशन जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
खर्राटों की समस्या की गंभीरता को एक रात की नींद का अध्ययन कर सुनिश्चित किया जा सकता है। इसके तहत मशीन से लाल रक्त कोशिकाओं के ऑक्सीजन सैचुरेशन को नापा जाता है। इन जांचों के परिणामों के आधार पर ही डॉक्टर सही इलाज की सलाह देते हैं। स्लीप एप्निया के इलाज में सीपीएपी यानी कंटिन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर करीब 100 प्रतिशत प्रभावी है। इससे खर्राटों की समस्या दूर हो सकती है और मरीज की उनींदी में भी सुधार आ सकता है। लेकिन ऐसा तभी संभव है जब इसका नियमित इस्तेमाल किया जाए। बहुत सारे लोगों को सीपीएपी मास्क भद्दा और रात में परेशानी वाला महसूस होता है। यही कारण है कि जिन्हें सीपीएपी की सलाह दी गई होती है, उनमें से 83 प्रतिशत लोग इसका उपयोग नहीं करते हैं। अगर आपको सच में सीपीएपी मास्क पहनने में काफी तकलीफ होती है, तो आप दूसरे विकल्प पर भी विचार कर सकते हैं। एक ओरल उपकरण, जो माउथ गार्ड अथवा रीटेनर की तरह होता है, आपके जबड़े को कुछ ऐसी स्थिति में रखता है, जिससे नींद में जीभ पीछे की ओर लुढ़क कर सांस नली को बाधित न करे। अगर अन्य इलाज कारगर नहीं होता है, तो सर्जरी आखिरी उपाय है।