Current Crime
अन्य ख़बरें ग़ाजियाबाद दिल्ली एन.सी.आर

होली के बाद से दिल नहीं लग रहा अपने दल में कई नेताओं का

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)
गाजियाबाद। चुनाव से पहले सभी दल अपने-अपने स्तर पर प्रचार में लगे हुए थे। कहीं टिकट को लेकर रोजाना दिल्ली के चक्कर थे तो कहीं इसी बात का डर लगा रहता था कि टिकट न कट जाए। फंडिंग वाले दल में तो अजब ही माहौल था। बड़े नेता गारंटी देकर गए कि किसी का टिकट नहीं कटेगा और जो ऐसी बात करेगा उसका पार्टी से ही पत्ता कटेगा। बड़े नेता कि गारंटी को डांसर के ठुमको ने कहां पटका कुछ पता नहीं चला। गारंटी के बाद भी टिकट कट गया। नोट बंदी में जब सब खर्चे से परेशान थे तब टिकट वालों का फरमान आ गया कि पुराने नोट ले जाओ और नए नोट के साथ आओ वरना पर्चा कैंसिल समझा जाएगा। कोई कोहरा चीर के दिल्ली पहुंचा तो किसी ने संघ वालों की खातिरदारी में कमी नहीं छोड़ी। जिन्हें किसी ने भी टिकट नहीं दिया वो नल वालों के यहां से टिकट ले आए। समाजवादी संग्राम में सीटें ही गठबंधन धर्म की भेंट चढ़ गयीं। कुश्ती शुरू हो गयी और एक महीना इंतजार को दे दिया। अब बचपन हो और स्कूल के एग्जाम हों तो दादी-नानी के घर भी चले जाएं। यहां तो एक महीना कॉपी पैंसिल लेकर गणित ही बिठाते रहे। ईवीएम ने जब नतीजा बताया तो कई खुशी से बेहाल हो गए और कई का गम से बुरा हाल हो गया। अब नतीजे आने के बाद वफादारी ने यूटर्न ले लिया। जो नारा लगा रहे थे कि ये जवानी है कुर्बान अखिलेश भैया तेरे नाम अब वो ही कह रहे हैं कि सपा में तो कोई स्कोप ही नहीं है। अब उन्हें जवानी बेकार होती दिख रही है। सपा के आधा दर्जन से ज्यादा नेता चुनाव नतीजा आने के बाद से ही जुगाड़ में लगे हैं। बसपा वाले 11 मार्च से पहले कह रहे थे कि सरकार आ रही है। 11 मार्च के बाद अब हाथी वाले खेमें में ही बगावत मच गयी है। बसपा कार्यालय के बाहर नसीमुद्दीन सिद्दीकी का पुतला फूंका जा रहा है। खुद बसपा नेता कभी नसीमुद्दीन सिद्दीकी को जिम्मेदार बताते हैं तो कभी दबे सुर में कहते हैं कि बहनजी ही इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। कुल मिलाकर अब कभी भाजपा अच्छी लगती है तो कभी कांग्रेस। रालोद वाले तो समीक्षा का समय भी नहीं निकाल पा रहे। उनकी बॉडी लैंग्वेज ही बताती है कि काहे की समीक्षा और काहे का दुख हमें तो पहले से ही पता था क्या होना है। अब इन नेताओं का मन अपने दल में लग नहीं रहा और भाजपा वालों ने अपने यहां नो एंट्री का बोर्ड लगा दिया है। अब सैटिंग के तरीके बदल गए हैं। बसपा वाले और सपा वाले भाजपा वालों के यहां डायरेक्ट जाएंगे और उन्होंने मुंह नहीं लगाया तो बात बिगड़ जाएगी। अब नए अड्डे तलाश लिये गए हैं। शोक सभा, भजन संध्या को मिस नहीं किया जा रहा। ये वो अड्डे हैं जहां सभी दलों के नेता मिल जाएंगे। पांव छूने की रस्म से लेकर सिफारिश वाली बातें हो जाएंगी। कुछ तो साफ ही कह देते हैं कि भाई कुछ सेटलमेंट कराओ। पांच साल में तो राजनीति बहुत बदल जाएगी। भगवा प्रेम ऐसा छाया है कि जो कभी भाजपा में नहीं दिखते थे उन्होंने भाजपा सरकार बनने पर बधाई के होर्डिंग लगवा दिए। होर्डिंग में बड़े फोटो के साथ उन नेताओं का फोटो जरूर लगवाया है जो सैटिंग करा सकते हैं। सपा और बसपा वालों का अपने दल में मन नहीं लग रहा है। अकेले वही नहीं है कांग्रेस और रालोद के भी कई नेता अब भाजपा में जाने को छटपटा रहे हैं।
मिसकॉल वाले भी भाजपाई माने जाएंगे या नहीं
गाजियाबाद (करंट क्राइम)। भाजपा में नई एंट्री पर नो एंट्री का बोर्ड लग गया है। एचआरआईटी में संगठन महांमंत्री भी कह गए कि कोई पदाधिकारी किसी को भी नई ज्वाईनिंग न कराए वरना कार्यवाही होगी। अब लोगों को वो दिन याद आया जब भाजपा वाले सड़क किनारे मेज लगाकर मोबाईल फोन की मिसकॉल से मैम्बर बना रहे थे। पार्षद बनने के इच्छुक कई भाजपाई अब विधायकों से लेकर अध्यक्ष के घर तक हाजरी लगा रहे हैं। कोई बिना काम के ही साथ में लग रहा है। किसी ने फेसबुक की डीपी में ही सीएम का फोटो लगा लिया है। अब इन हरकतों से पुराने भाजपाई विचलित हो रहे हैं। क्योंकि पार्षद लड़ने के इच्छुक नेता ही इस टाईप की हरकतें कर रहे हैं। कई की तो कारों पर झण्डे बदल गए हैं। कई ने भगवा शर्ट ही गर्मियों के लिए ले ली है। कई भगवा अंगोछे खरीद लाए हैं। लेकिन यक्ष प्रश्न यही है कि हू ईज रियल भाजपाई। तो दूसरा पक्ष भी पूछ रहा है कि मिसकॉल वाले मैम्बर माने जाएंगे या नहीं। उनका तर्क भी है कि मिस कॉल से मैम्बर बने थे और इसका पूरा रिकॉर्ड मोबाईल पर उपलब्ध है। अब अगर भाजपा नेता कहें कि मिस कॉल वाले मैम्बर नहीं माने जाएंगे तो फिर ये माना जाए कि मैम्बरी का जुमला मिस कॉल से छोड़ा गया था।

Related posts

Current Crime
Ghaziabad No.1 Hindi News Portal
%d bloggers like this: