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अनेकता में एकता की संस्कृति से दूसरे देश हैरान : प्रणब

मथुरा| राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को कहा कि एकता, सद्भाव, प्रेम और मानवता ही चैतन्य महाप्रभु के जीवन का ध्येय था और आज भी भारत की अनेकता में एकता की संस्कृति उसे मजबूत बनाती है। इससे दूसरे देश भी हैरान हैं। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी बुधवार को वृंदावन में आयोजित चैतन्य महाप्रभु के पंचशती महोत्सव में हिस्सा लेने पहुंचे हैं।

मथुरा में हेलीपैड पर उप्र के राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मथुरा की सांसद हेमा मालिनी ने राष्ट्रपति का स्वागत किया। व्यस्त कार्यक्रम के चलते वह मुख्य कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।

इस दौरान मौजूद राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि आज काफी लोग कुष्ठ रोगियों को घृणा की ²ष्टि से देखते हैं, जबकि 500 साल पहले चैतन्य महाप्रभु ने कुष्ठ रोगियों की सेवा की थी। उन्होंने प्रेम की भाषा से वैष्णव धर्म का ऐसा प्रचार-प्रसार किया कि पशु पक्षी तक आनंदित हो उठते थे।

मथुरा से सांसद हेमा मालिनी ने चैतन्य महाप्रभु के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

चैतन्य महाप्रभु वैष्णव धर्म के भक्ति योग के परम प्रचारक एवं भक्तिकाल के प्रमुख कवियों में से एक थे। इन्होंने वैष्णवों के गौड़ीय संप्रदाय की आधारशिला रखी, भजन गायकी की एक नई शैली को जन्म दिया तथा राजनीतिक अस्थिरता के दिनों में हिंदू-मुस्लिम एकता की सद्भावना को बल दिया। जात-पात, ऊंच-नीच की भावना को दूर करने की शिक्षा दी तथा विलुप्त वृंदावन को फिर से बसाया और अपने जीवन के अंतिम दिन यहीं बिताए।

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