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वैज्ञानिकों ने सुलझाया लंबी गर्दन वाले समुद्री जानवर का 170 साल से उलझा रहस्य

-ट्रियासिक युग के इस समुद्री जीव की गर्दन एक बांस की तरह बहुत ही लंबी दिखाई देती थी
वाशिंगटन। डायनासोर जैसे अनोखे जीवों की कड़ी में एक और नाम जुड़ गया है। एक हैरतअंगेज खोज के तहत वैज्ञानिकों ने करोड़ों साल पुराने एक ऐसे समुद्री जीव के बारे में पता लगाया है जिसकी गर्दन बहुत ही लंबी थी, लेकिन यह गुत्थी 170 साल से उलझी हुई थी। ट्रियासिक युग के इस समुद्री जीव की गर्दन एक बांस की तरह बहुत ही लंबी दिखाई देती थी। इस जीव के तीखे दांत थे और इसकी नाक मगरमच्छ के जैसी थे। लाइव साइंस में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार यह जीव दो प्रकार थे। वैज्ञानिकों ने तय किया है कि इनमें से जो बड़ा जीव था उसका नाम टान्यस्ट्रोफेयर हायड्रॉड्स होगा जो हायड्रा के जैसा दिखता था। वहीं छोटे वाले जीव का नाम वैज्ञानिकों ने टान्यस्ट्रोफेयर लोंगोबार्डिकस रखा है।
करेंट बायोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के शोधकर्ताओं के अनुसार यह खास लंबी गर्दन वाले जानवर कम नहीं थे और साथ ही इनकी गर्दन काफी कड़क थी। वैज्ञानिकों की मानी जाए तो हायड्रॉड्स लोगोबार्डिकस किसी तरह से एक साथ जीने का तरीका सीख गए थे। यह लगभग 24.2 करोड़ साल पहले हुआ था। यह अब तक रहस्य ही है कि इस तरह के सरीसृप कैसे विकसित हुए यह अभी तक रहस्य ही है। यहां तक कि यह भी पता नहीं चल सका है कि ये सरीसृप पानी में रहना ज्यादा पसंद करते थे या फिर जमीन पर घूमना। इनकी जिराफ की तरह बाहर निकली लंबी गर्दन वैज्ञानिकों के लिए कौतूहल से ज्यादा रहस्य का विषय है। इतना ही नहीं अब तक इस तरह के जितने भी जीवाश्म मिले सभी मगरमच्छ के आकार के नहीं थे। इनमें से कई छोटे थे। लेकिन जीवाश्मविज्ञानियों के लिए यह बहुत ही कठिन सवाल बन गया था कि क्या ये जीवश्म बच्चों के हैं या फिर ये पूरी तरह से अलग ही प्रजाति थी।
इस तरह से अंतर करने के लिए शोधकर्ताओं को यह देखना पड़ता है कि जीवाश्म की हड्डियां पूरी तरह से विकसित हो चुकी थीं या फिर विकसित हो रही थीं। इसके लिए शोधकर्ताओं ने इन जीवाश्मों का एक्स रे का अध्ययन किया और हाई रिजोल्यूशन कम्प्यूटराइज्ड टोमोग्राफी तकनीक के जरिए थ्री डी मॉडल बनाए, इसी के जरिए उन्हें पता चला कि ये अलग प्रजातिओं के जीव हैं।

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