सामाजिक सरोकारो के इस जज्बे को सलाम

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ना राजनीतिक टिकट चाहिये ना पद चाहिये
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो शहर में कुछ ना होते हुये भी बहुत कुछ होते हैं। ये लोग शहर की शान होते हैं,अक्सर सियासी लोग तो आम भी तभी खिलाते है जब कोई खास मकसद छिपा होता है। लेकिन समाजसेवा से जुड़े कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें ना पुरस्कार की लालसा है, जिन्हें एनजीओ के नाम पर कोई सरकारी इमदाद भी नहीं लेनी है और वो किसी दल के टिकट की दौड़ में भी नही हैं लेकिन फिर भी शहर में हर धार्मिक कार्यक्रम से लेकर सामाजिक आंदोलन में ये सबसे आगे मिलेंगे।
समाज की हर खुशी में इनकी खुशी देखने लायक होती है ओर समाज के हर गम में ये बराबर के शरीक होते हैं। ऐसे चेहरों में सबसे पहला नाम डॉ. बीके शर्मा हनुमान का आता है। कोई घटना हो तो सबसे पहले प्रतिक्रिया इनकी आती है। थैलीसीमिया से पीड़ित ज्योति अरोड़ा ने जब हौसलों की जंग के साथ उपन्यासकार बनकर एक मिसाल पेश की तो ज्योति अरोड़ा के जज्बे को सलाम करने और उसका हौसला बढ़ाने के लिये बीके शर्मा हनुमान और परमार्थ समिति के अध्यक्ष वीके अग्रवाल सबसे पहले उनके घर पहुंचे और उनका सम्मान किया। बीके हनुमान एक या दो नहीं बल्कि दर्जनों सामाजिक संस्थाओं में पदाधिकारी हैं। कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ दो दशक से अभियान चला रहे हैं। प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं का सम्मान कर रहे हैं। किसी भी नयी पहल का स्वागत करने सबसे पहले जाते हैं। इसी तरह वीके अग्रवाल भी समाजसेवा की एक मिसाल हैं। थीम सबसे अलग लेकर आते हैं। भंडारे से लेकर परिचय सम्मेलन तक समाजसेवा का एक लंबा सिलसिला है। अब मैंगों पार्टी के दौर में जामुन पार्टी लाकर थीम ही चेंज कर दी। खास बात ये है कि जामुन के साथ साथ शुगर फ्री का ही सदेंश नही था बल्कि पॉलीथिन मुक्त अभियान का सदेंश भी दे रहे थे। कार्यक्रम ऐसे करते हैं कि देशभक्ति और धर्म दोनों का संदेश देते हैं। इस तरह के लोग समाज में कम ही होते हैं। कैंडल मार्च से लेकर आंदोलन तक जनता के लिये हाजिर होते हैं। जो सबका सम्मान करते हैं उनका सम्मान भी समाज को करना चाहिये। जेल में बंद कैदियों से लेकर प्रतिभाशाली बच्चों का सम्मान करने वाले इन चेहरों की तारीफ करनी होगी। कोई बड़े कारोबारी नही हैं,जैसे तैसे करके संसाधन जोड़ते हैं और फिर उस आनंद को समाज के लिये सर्मपित कर देते हैं। इसी तरह बीके हनुमान को भी न कोई पद सियासत में चाहिये और वह भी कोई बड़े कारोबारी नही हैं लेकिन दिल के धनी हैं और समाज सेवा का जज्बा कूट-कूट कर भरा हुआ है। समाज के ये जागरुक चेहरे यदि न हो तो कई मामलों में तो आवाज ही न उठे। पूरे समाज का मनोबल बढ़ाने वाले इन समाजसेवियों का सम्मान होना ही चाहिये।