रूस ने बनाया इंट्रानेट पर आधारित इन्टरनेट सिस्टम

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नई दिल्ली (ईएमएस)। रूस ने इंटरनेट सिस्टम का विकल्प तैयार किया है। यह विकल्प पूरी तरह सफल रहा । रूसी कानून के अनुसार सरकारी संस्थानों, सुरक्षा सेवाओं, सभी संचार आपरेटर मैसेंजर, ईमेल सेवा
सोशल मीडिया से जुड़ने इंट्रानेट के माध्यम से इन्टरनेट कम्युनिकेशन की सुविधा दी है। इसके लिए अलग डोमेन की कोडिंग की गई है। रूस ने इंटरनेट सिस्टम से जुड़ने के लिए नया प्रावधान किया है। इससे बिना किसी रूकावट के, तेज गति से लोग इंट्रानेट और इंटरनेट के माध्यम से बिना किसी रोक-टोक के कम्युनिकेशन कर पा रहे हैं। रूस दुनिया का पहला देश है। जिसने अपने लिए अलग से इंटरनेट से जुड़ने का सिस्टम तैयार किया है। इसके पहले चीन और ईरान भी कोशिश कर चुके हैं, लेकिन वह सफल नहीं हुए थे।
अमेरिका का इंटरनेट संचार माध्यम में हस्तक्षेप?
इंटरनेट की सेवा किसी भी देश या सरकार द्वारा नियंत्रित नहीं है। इस पर किसी का मालिकाना हक नहीं है > वर्ल्ड वाइड वेब से जुड़ने के लिए विश्व के सभी देशों ने जो नियम बनाए थे उसके अनुसार सभी देश में इंटरनेट के सिग्नल उपलब्ध होंगे। इन सिग्नल को रोकने का अधिकार किसी भी देश को नहीं है।
इंटरनेट की सेवा
वैश्विक मानक के अनुसार डोमिन इंटरनेट का महत्वपूर्ण सिस्टम है। वर्ल्ड वाइड वेब अर्थात 3 डब्ल्यू पर आईपी एड्रेस तैयार होता है। सारी दुनिया में अब कई रजिस्टार हैं। जो डोमेन रजिस्टर करते हैं। जैसे डॉट कॉम,डॉट नेट,डॉट ओआरजी इत्यादि।यह डोमिन सारी दुनिया भर के देशों के नेटवर्क से जुड़कर सभी कंप्यूटर को आपस में जोड़ देता है। इसके लिए समुद्र के नीचे केबल डाल कर सारी दुनिया के देशों को आपस में इस संचार माध्यम से जोड़ा गया। अब सेटेलाइट के माध्यम से भी संचार माध्यम जोड़ा जा रहा है। इंटरनेट की सेवाएं बाधित करने का किसी भी देश को अधिकार नहीं है।
वेबसाइट पर रोक लगाने का अधिकार
किसी भी देश की सरकार को यह अधिकार नहीं है कि वह इंटरनेट के सिग्नल को रोक सके । वैश्विक स्तर पर सभी देशों के बीच जो समझौता हुआ है। उसके अनुसार प्रत्येक देश की सरकार कानूनन रूप से उन वेबसाइट को प्रतिबंधित कर सकती है। जो उनके देश के नियम कानून के अनुरूप नहीं हैं। लेकिन इंटरनेट के सिग्नल को बाधित करने का अधिकार किसी जी सरकार को नहीं है
कैसे काम करता है इंटरनेट
डोमेन रजिस्टार डोमिन पर आईपी एड्रेस बनाते हैं । सभी आईपी ऐड्रेस पर डोमिन का उल्लेख होते ही इंटरनेट का सर्वर उसे संबंधित आईपी एड्रेस से जोड़ देता है, जो भी व्यक्ति या उपयोगकर्ता आईपी एड्रेस से जुड़कर जो सेवाएं अथवा जानकारी लेना चाहता है। उसके लिए सेवा लेने वाला और सेवा देने वाला दोनों कंप्यूटर एक साथ ऑनलाइन हो होकर आपस में जुड़ जाते हैं।
साइबर हमले सबसे बड़ी चुनौती
इंटरनेट जिस डोमेन पर वेबसाइट खुल रही है । वह टेक्निकल लोगों द्वारा तैयार की जाती है। इस पर कोई रोक नहीं है। वेबसाइट और प्रोग्राम बनाने का काम तकनीकी विशेषज्ञ करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में बड़ी तेजी के साथ इंटरनेट पर हमला करके वेबसाइट हैक कर लेना। उसका डाटा कॉपी कर लेना, अथवा ईमेल और सोशल मीडिया के जो प्लेटफार्म हैं। वह आम आदमी की निजता पर जासूसी कर के उसके हितों के विपरीत काम करने लगे हैं। कई देशों की सरकारें जिसमें अमेरिका चीन तथा रूस जैसे देश भी शामिल हैं। इंटरनेट पर जासूसी करने के लिए और एक दूसरे की सुरक्षा पर सेंध लगाने के लिए तरह-तरह के प्रोग्राम बनाकर जासूसी कर रहे हैं, जो रोक पाना आसानी से संभव नहीं है। इजराइल की एक कंपनी ने हाल ही में कई देशों की सरकारों को सॉफ्टवेयर भेजा है। जिसके माध्यम से किसी भी आईपी एड्रेस की जानकारी और उसके द्वारा जो भी कम्युनिकेशन किया गया है। उसका पूरा का पूरा विवरण सरकार जासूसी के काम में इस्तेमाल कर रही हैं।
रूस ने इंट्रानेट और इंटरनेट को दो भागों में बांटा
रूस ने अपने सुरक्षा संस्थानों, ईमेल और सोशल मीडिया के सभी प्रोवाइडर्स को रूस के अंदर कम्युनिकेशन करने के लिए, इंट्रानेट पर एक अलग प्लेटफार्म तैयार किया है। इंट्रानेट के माध्यम से इंटरनेट से जुड़ने की नवीन तकनीकी अपनाने के लिए संप्रभु इंटरनेट बिल रूस ने तैयार कर अपने आंतरिक कम्युनिकेशन सिस्टम को मजबूत किया है।
इंट्रानेट का सफल प्रयोग
रूस ने अपने देश के लिए जो वैकल्पिक इंट्रानेट सिस्टम तैयार कर इंटरनेट से जोड़ा है। इसके बारे में उपयोगकर्ता को पता ही नहीं लगा। जब सरकार ने इस सूचना को सार्वजनिक किया तब रूस और सारी दुनिया के लोग हैरान होकर रह गए इंटरनेट सिस्टम पर बिना किसी बदलाव के सीधे इंटरनेट पर जाने की स्थान पर अब रूस का इंटरानेट सिस्टम,इंटरनेट से जुड़ने की परमिशन देता है बिना किसी रूकावट के यह प्रयोग सफल रहा है रूस की सरकार पिछले 3 सालों से इंट्रानेट के माध्यम से अपना संचार माध्यम मजबूत करने की जो कोशिश कर रही थी रूस की सरकार उसमें पूर्ण सफल रही है रूस की सुरक्षा व्यवस्था मैं सेंध लगा पाना अन्य देशों के लिए आसान नहीं होगा।
अमेरिका-ब्रिटेन का विरोध
रूस के इस प्रयोग पर अमेरिका और ब्रिटेन ने गंभीर आपत्ति जताई है। दोनों देशों ने आलोचना करते हुए कहा कि इससे इन्टरनेट का ब्रेक अप होगा। रूस इन्टरनेट पर अपना अधिपत्य स्थापित करना चाहता हूं।