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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को राहत, सुनवाई 1 अक्टूबर तक टली

नैनीताल (ईएमएस)। स्टिंग केस में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर मुकदमा दर्ज करने के लिए नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सीबीआई नैनीताल हाईकोर्ट से कांग्रेस नेता हरीश रावत पर मुकदमा दर्ज से अनुमति मांग रही है। सुनवाई के दौरान हरीश रावत भी नैनीताल हाईकोर्ट में मौजूद रहे।
जानकारी के मुताबिक,कोर्ट में सीबीआई की तरफ से पेश की गई दलील में कहा गया कि मामले में जांच हो चुकी है, लिहाजा इस मामले पर एफआईआर की अनुमति दे। वहीं हरीश रावत की तरफ से कोर्ट से अतिरिक्त समय की मांग की गई।इसके बाद नैनीताल कोर्ट ने हरीश रावत की मांग को स्वीकार करते हुए,मामले की अगली सुनवाई एक अक्टूबर तक टाल दी है।बता दें कि 2016 में सीबीआई ने हरीश रावत के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। यह मुकदमा राष्ट्रपति शासन के दौरान दर्ज किया गया था,लेकिन सुप्रीम कोर्ट से सरकार बहाल होते ही हरीश कैबिनेट ने एफआईआर को खारिज करने की सिफारिश की। लेकिन सीबीआई ने अब हरीश रावत के खिलाफ पुख्ता दस्तावेज इकट्ठे करने का दावा करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट से केस दर्ज करने की अनुमति मांग रही है।
बता दें कि 2016 में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और हरक सिंह रावत के नेतृत्व में 9 कांग्रेस विधायकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के ख़िलाफ़ बगावत कर दी थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने हरीश रावत सरकार को बर्खास्त कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। हरीश रावत हाईकोर्ट गए थे जहां से उनकी सरकार बहाल हुई थी। इस दौरान एक निजी चैनल के मालिक ने हरीश रावत का स्टिंग किया था जिसमें वह हरीश रावत से विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त की बात करते दिखाई दिए थे! इसी स्टिंग को आधार बनाकर तत्कालीन राज्यपाल ने इसकी सीबीआई जांच की सिफ़ारिश कर दी थी। इसके बाद हरीश रावत गिरफ़्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट की शरण में चले गए थे और हाईकोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया था कि कोई भी कार्रवाई करने से पहले वह कोर्ट से अनुमति ले।

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