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ग़ाजियाबाद

आम आदमी की पहुंच से दूर हुई कविनगर रामलीला

मॉल की तर्ज पर कविनगर रामलीला का मैन्युचार्ट

गाजियाबाद। ‘ऊंची दुकान फीका पकवान’ ये पंक्तियां इन दिनों शहरभर में आयोजित की जा रही रामलीला महोत्सवों पर बिलकुल सटीक साबित हो रही हैं। शहर की कई रामलीला महोत्सवों में इस बार खाने पीने के बड़े बडेÞ पंडाल लगाये गये हैं, जो आने वाले लोगों को खूब आर्कषित कर रहे हैं। खाने-पीने के पंडालों में जो मैन्यूकार्ड हैं वह किसी हाईफाई मॉल के मैन्यूचार्ट से कम नही है। गोल गप्पे जहां आपकों अपने आसपास चंद रुपयों में मिल सकते हैं, लेकिन कविनगर की रामलीला में आपकों भारी भरकम पैसों की अदायगी करनी होगी।

कविनगर रामलीला में इस बार खाने पीने के बड़े बड़े पंडाल लगाये गये हैं। रामलीला प्रागंण में लगे इन बड़े पंडालों को कविनगर रामलीला सूिमति पदाधिकारियों ने मोटे किराये में दिए हैं। कविनगर रामलीला समिति पदाधिकारियों की बात की जाए तो इस बार पूरी रामलीला का ठेका एक करोड़ रुपये से उपर का रहा है। ऐसे में जब ठेका एक करोड़ रुपये से उपर का छुटा है तो मोटे दामों पर खाने पीने के पंडाल लिए हैं तो उन्हें भी अपनी दी हुई राशि मुनाफे के साथ वापस करनी होगी, जिसकी तर्ज पर खाने पीने की चीजों के दामों आसमान छू रहे हैं। खाने पीने के दाम जहां ज्यादा हैं, वहीं खाने की कवालिटी भी कुछ खास नहीं है।

बड़ी बड़ी कंपनियों ने पसारे पैर
कविनगर रामलीला का स्वरूप हर बार बदलता है और यहां पर आने वाले लोगों के लिए कुछ ना कुछ खास प्रत्येक बार होता है। एक दशक के भीतर रामलीला मैदान के स्वरूप में भी अमूल चूल परिवर्तन देखने को मिले हैं। इस बार रामलीला मैदान में बकायदा बड़ी-बड़ी कंपनियों के छोटे-छोटे शोरूम खोले गये हैं। खोले जाने वाले शोरूम को बेहद खूूबसुरती के साथ बनाया गया है।

फूड सेफ्टी विभाग दे ध्यान
कविनगर रामलीला मैदान में इस बार खाने पीने के बड़े बडेÞ पंडाल लगाये गये हैं, वहीं खाने पीने के मूल्य भी बेहताशा ज्यादा हैं। खाने पीने की हर चीजें मौजूद हैं और बड़ी मात्रा में खाने पीने की चीजों को लोग खरीद रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि खाने पीने की चीजों में जमकर मिलावट की जा रही है और लोगों से ज्यादा पैसे वसूलकर उन्हें मानकों के विपरित खाना परोसा जा रहा है। फूड विभाग के अधिकारियों को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए, क्योंकि बड़े पैमाने पर लोग रामलीला देखने आयेंगे और लोग खाने पीने की चीजों का इस्तेमाल करेंगे।

रामलीला कमेटी निभाये जिम्मेदारी
कविनगर रामलीला कमेटी में अध्यक्ष ललित जायसवाल हैं। ललित जायसवाल शहर के प्रमुख समाजसेवी हैं और वह सिविल डिफेंस में चीफ वार्डन के पद पर भी आसीन हैं। वह निरंतर समाज की सेवा कर रहे हैं, और निरंतर हर वर्ग का कहीं ना कहीं उद्धार भी उनके माध्यम से हो रहा है। ऐसे में रामलीला में जिस तरह से मंहगाई पैर पसार चुकी है, इस दिशा में भी उन्हें गंभीरता से सोचना चाहिए, क्योंकि रामलीला में जहां खास वर्ग भी आता है तो बड़ी संख्या में आम आदमी भी रामलीला मंचन देखने के साथ मेला घूमने के लिए आता है। कमेटी पदाधिकारियों को भी अपनी जिम्मेदारियों को भली भॉति समझना होगा।

सीता रसोई पर नहीं दिया कोई ध्यान
इस बार कविनगर रामलीला में सीता रसोई भी तैयार की गई है। सीता रसोई को कविनगर रामलीला मैदान में खाने पीने के पंडालों के अंत में लगाया गया है। सीता रसोई भी इस बार महंगी हो गई है। पूर्व में जहां लोग सीता रसोई में चंद दामों पर खाना खा लिया करते थे, अब उन्हें यहां पर भी मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है।

सबकुछ हो गया महंगा
जिस तेजी के साथ मंहगाई देश में पांव पसार रही है उससे कहीं अधिक कविनगर रामलीला महोत्सव में मंहगाई ने पैर पसार लिये हैं। खाने पीने की चीजों के दाम जहां आम आदमी की पहुंच से दूर हैं वहीं इस बार झूले आदि का किराया भी बेहताशा बढ़ा दिया गया है। मंहगाई के पीछे कोई तर्क दे रहा है कि समिति पदाधिकारियों ने किराये पर दी जाने वाली जमीनों के मूल्यों को बढ़ा दिया है, जिस कारण कारोबार के लिहाज से आने वाले कारोबारी मजबूरी में अपने सामान की कीमतों को औना पौना बढ़ा देते हैं।

कमाई पर दे रही है वर्तमान कमेटी ध्यान: रामकुमार तोमर

रामलीला कमेटी के पूर्व अध्यक्ष रामकुमार तोमर का कहना है कि उन्होंने कमेटी का संचालन लंबे समय तक किया है। उन्होंने जब भी रामलीला महोत्सव कराया उसमें विशेष हिदायत रही कि कोई भी दुकानदार बाजार मूल्यों से अधिक में सामान नही बेचगा, लेकिन वर्तमान कमेटी पदाधिकारी सिर्फ कमाई पर ध्यान दे रहे हैं। दुकानदारों को लाखों रुपये में जमीन किराये पर दी गई है और दुकान मुनाफे को ध्यान में रखते हुए सामान के मूल्य औने पौने दामों में बेच रहे हैं। आम आदमी का कोई ध्यान नही दिया जा रहा है, कमेटी के पदाधिकारी सिर्फ कमाई कर रहे हैं।

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