रमन बने भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

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रायपुर, (ईएमएस)। छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी को लगातार तीन बार सत्ता में काबिज कराने वाले पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को पार्टी के शिखर नेतृत्व ने संगठन में अहम जिम्मेदारी सौंपते हुए उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है। लोकसभा चुनाव की तैयारियों के दौर में संगठनात्मक परिवर्तन के तहत उन्हें यह दायित्व सौंपा गया है। वैसे राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने डॉ. रमन के साथ ही मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ भाजपा के अध्यक्ष धरमलाल कौशिक को नेता प्रतिपक्ष बनाये जाने के बाद यह लगभग तय माना जा रहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह 15 साल बाद फिर से छत्तीसगढ़ में भाजपा का संगठन सम्भालेंगे। लेकिन जिस तरह से नेता प्रतिपक्ष के चुनाव में आयी अंदरुनी अड़चनों की वजह से राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल को हस्तक्षेप करना पड़ा और अंततः डॉ. रमन की पसंद धरमलाल कौशिक के नाम पर मुहर लगाई गई, उसके बाद लगता है कि भाजपा ने डॉ. रमन को संगठन की केन्द्रीय टीम में शामिल करना बेहतर समझा है। क्योंकि अगर धरमलाल कौशिक को नेता प्रतिपक्ष बनाये जाने के बाद डॉ. रमन छत्तीसगढ़ भाजपा की कमान सम्भालते तो पार्टी का एक वर्ग जो प्रकारांतर से विरोध कर रहा है, उसे एक नया अवसर मिलता। फिर भी अगर डॉ. रमन को छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन की कमान सौंपी जाती तो खुलकर विरोध के कोई आसार नजर नहीं आते। क्योंकि वर्ष 2003 में मुख्यमंत्री बनने के पहले डॉ. रमन के ही संगठन नेतृत्व में भाजपा सत्ता में आयी थी और उनके राजनीतिक नेतृत्व में भाजपा ने छत्तीसगढ़ में लगातार 15 वर्ष तक राज किया है। बहस का विषय तो यह भी हो सकता है कि डॉ. रमन को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने क्या उन्हें केन्द्रीय राजनीति में खींचने का संकेत दिया है। बहरहाल अब सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि अगर डॉ. रमन सिंह राष्ट्रीय संगठन में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभायेंगे तो छत्तीसगढ़ भाजपा का सिरमौर कौन बनेगा ? अगर डॉ. रमन सिंह की पसंद की बात की जाये तो पूर्व लोक निर्माण मंत्री राजेश मूणत यह जिम्मेदारी प्राप्त कर सकते हैं। किंतु यदि डॉ. रमन की पसंद के अलहदा अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी किसी वरिष्ठ नेता को सौंपी जाती है, तो तालमेल बैठाने की कसरत भी बहुत जरूरी होगी। यह भी सम्भव है कि नेता प्रतिपक्ष का पद डॉ. रमन के पसंदीदा धरमलाल कौशिक को दिये जाने से नाराज वर्ग को संतुष्ट करने के लिए किसी अन्य दिग्गज को अवसर दे दिया जाये। किंतु जहां तक छत्तीसगढ़ में भाजपा के आंतरिक समीकरणों का सवाल है, तो भाजपा का शीर्ष नेतृत्व फिलहाल डॉ. रमन की पसंद को ही महत्व दे सकता है।